पैसा डबल करने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी, महाराष्ट्र से सात आरोपी गिरफ्तार!!!
करेंसी डबल करने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी, महाराष्ट्र से 7 आरोपी गिरफ्तार….
रायपुर: छत्तीसगढ़ पुलिस ने ऐसे अंतरराज्यीय ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को उनकी रकम कुछ ही समय में दोगुनी करने का लालच देकर करोड़ों रुपये ठगने का आरोप है। पुलिस ने महाराष्ट्र से सात लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उस जांच का हिस्सा है, जिसमें पहले नागपुर से दो महिलाओं को पकड़ा गया था।
पुलिस के अनुसार, गिरोह लोगों को भरोसा दिलाता था कि काले या खराब दिखने वाले नोटों को विशेष केमिकल की मदद से नए असली नोटों में बदला जा सकता है और रकम भी दोगुनी हो जाएगी। इसके लिए आरोपी पहले प्रदर्शन करके लोगों का विश्वास जीतते और बाद में अलग-अलग बहानों से बड़ी रकम वसूलते थे।
कैसे चलता था पूरा ठगी का खेल?
जांच में सामने आए तरीके के मुताबिक आरोपी संभावित पीड़ितों से होटल या अन्य जगहों पर मुलाकात करते थे। वहां वे असली नोटों और कथित केमिकल के जरिए एक ऐसा प्रदर्शन करते थे, जिससे सामने वाले व्यक्ति को लगता था कि उनके पास पैसा बदलने या बढ़ाने की कोई खास तकनीक है।
इसके बाद ठग पीड़ित से पैसे की मांग शुरू करते थे। कभी केमिकल मंगाने, कभी टेस्ट कराने, कभी सरकारी मंजूरी और कभी दूसरी औपचारिकताओं के नाम पर किस्तों में रकम ली जाती थी। यानी असली कमाई किसी मुद्रा को डबल करने से नहीं, बल्कि पीड़ित से लगातार पैसा ऐंठने से होती थी।
खंडाला के रिसॉर्ट तक पहुंची पुलिस
पुलिस की कार्रवाई तब आगे बढ़ी जब नागपुर मामले में गिरफ्तार दो महिलाओं से महत्वपूर्ण जानकारी मिली। उनके इनपुट और डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस टीम ने पुणे जिले के खंडाला में करीब एक सप्ताह तक निगरानी की।
पुलिस ने एक रिसॉर्ट में सात संदिग्धों को कथित तौर पर उस समय पकड़ा, जब वे एक वाराणसी निवासी व्यक्ति से करोड़ों रुपये लेकर करेंसी डबल करने का प्रयास कर रहे थे। आरोपियों को बाद में ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया।
4 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 4 करोड़ रुपये से अधिक नकद, 17 मोबाइल फोन, मुद्रा नोटों के आकार में काटे गए काले कागज, कांच की प्लेटें और अन्य सामान बरामद करने की जानकारी दी है। जांच एजेंसियां इन वस्तुओं को कथित ठगी के प्रदर्शन में इस्तेमाल किए जाने की दिशा में जांच कर रही हैं।
100 से ज्यादा लोगों को निशाना बनाने का शक
पुलिस को संदेह है कि यह नेटवर्क काफी पुराना है और आरोपी 2005 से इस तरह की गतिविधियों में सक्रिय हो सकते हैं। शुरुआती जांच में गिरोह पर छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों में 100 से ज्यादा लोगों को ठगने का संदेह जताया गया है। हालांकि, इन सभी मामलों की पुष्टि और कुल ठगी की रकम का सही आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
गिरोह में कौन-कौन शामिल?
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ योगी, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन/शेट्टी/रेड्डी, मनोज कुमार श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर, विवेक सिंह, शुभम पांडे, योगेंद्र चौहान और बालमुकुंद दीक्षित शामिल हैं।
पुलिस ने ज्ञान प्रकाश, प्रवीण कुमार और मनोज कुमार को कथित तौर पर गिरोह के प्रमुख लोगों के रूप में चिन्हित किया है। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपियों का पहले मुंबई और वाराणसी में जेल जाने का रिकॉर्ड रहा है।
पहले भी सामने आया था इसी तरह का मामला
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगस्त की शुरुआत में रायपुर पुलिस ने नागपुर की दो महिलाओं को कथित तौर पर एक कारोबारी से ₹1.13 करोड़ की ठगी के मामले में गिरफ्तार किया था। कारोबारी को कथित तौर पर ₹45 करोड़ की फंडिंग दिलाने का भरोसा दिया गया था। जांच के दौरान उन्हीं आरोपियों द्वारा काले कागज को केमिकल से करेंसी में बदलने जैसा प्रदर्शन करने की बात सामने आई थी।
इससे संकेत मिलता है कि पुलिस जिस नेटवर्क की जांच कर रही है, उसमें फर्जी निवेश, फंडिंग और करेंसी डबलिंग जैसे अलग-अलग लालच को एक ही ठगी मॉडल में इस्तेमाल किया जा सकता है।
विश्लेषण: लोग ऐसे जाल में क्यों फंसते हैं?
इस तरह की ठगी का सबसे बड़ा हथियार लालच के साथ विश्वास पैदा करना होता है। ठग सीधे यह नहीं कहते कि वे पैसा चुरा रहे हैं। वे पहले एक कथित तकनीक का प्रदर्शन करते हैं, फिर पीड़ित को छोटी या नियंत्रित प्रक्रिया दिखाकर भरोसा दिलाते हैं।
इसके बाद जैसे-जैसे पीड़ित अधिक पैसा लगाता है, ठग नए खर्च सामने लाते रहते हैं। इसे एक तरह का “फ्रॉड एस्केलेशन मॉडल” समझा जा सकता है—पीड़ित पहले से लगाए गए पैसे को बचाने के लिए आगे और पैसा देता चला जाता है।
आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सबक
- पैसा दोगुना करने का कोई वैध रासायनिक फॉर्मूला नहीं है।
- किसी व्यक्ति के पास बड़ी मात्रा में नकदी बदलने या बढ़ाने की “गुप्त तकनीक” होने का दावा गंभीर रेड फ्लैग है।
- केमिकल, ग्लास प्लेट या नोट बदलने का लाइव प्रदर्शन असली प्रमाण नहीं है।
- “पहले फीस दो, फिर पैसा मिलेगा” जैसी मांग पर तुरंत सावधान हो जाएं।
- बड़ी रकम देने से पहले किसी स्वतंत्र बैंकिंग/कानूनी विशेषज्ञ से सत्यापन करें।
- ठगी हो जाने पर आरोपी से खुद सौदा करने के बजाय तुरंत पुलिस और संबंधित वित्तीय संस्थान को सूचना दें।
सबसे अहम बात: “कम समय में पैसा दोगुना” करने का दावा जितना आकर्षक लगता है, उतना ही बड़ा खतरा हो सकता है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई दिखाती है कि ठगी केवल ऑनलाइन लिंक या OTP के जरिए नहीं होती—पुराने जमाने का लालच, नकली प्रदर्शन और मनोवैज्ञानिक दबाव भी करोड़ों की ठगी का हथियार बन सकते हैं।
कानूनी स्थिति: गिरफ्तारियां पुलिस के आरोपों और जांच पर आधारित हैं; आरोपियों का दोष अदालत में साबित होना बाकी है। रायपुर पुलिस ने मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज किया है।
