सरकारी नौकरी का सपना दिखाया, फ्लैट का भरोसा दिलाया, लेकिन बिहार के युवक से कथित तौर पर ₹30 लाख ले लिए।
सरकारी नौकरी और देहरादून में फ्लैट का सपना दिखाकर ₹30 लाख की ठगी का आरोप, पुलिस ने दर्ज किया केस……
देहरादून: सरकारी नौकरी पाने की चाहत और पहाड़ों की राजधानी देहरादून में अपना घर होने का सपना एक बिहार निवासी को कथित तौर पर करीब ₹30 लाख का नुकसान करा गया। आरोप है कि देहरादून में डिजिटल मीडिया से जुड़े एक व्यक्ति ने उसे उत्तराखंड सचिवालय में सरकारी कॉन्ट्रैक्ट नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और बाद में एक फ्लैट दिलाने के नाम पर भी रकम ली।
मामले में राजपुर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के सामने लगाए गए आरोपों के अनुसार, शिकायतकर्ता की आरोपी से मुलाकात वर्ष 2020 में देहरादून में हुई थी। इसके बाद सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया।
नौकरी के नाम पर कथित तौर पर लिए ₹25 लाख
शिकायत के मुताबिक, बिहार निवासी आशीष कुमार से सचिवालय में नौकरी दिलाने के नाम पर करीब ₹25 लाख लिए गए। इसके बाद उसे ट्रेनी डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट ऑफिसर पद से जुड़ा एक नियुक्ति पत्र दिए जाने का दावा किया गया।
लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद उसे वास्तविक नौकरी नहीं मिली।
यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—किसी सरकारी नौकरी के नाम पर केवल लेटर या दस्तावेज दिखा देना नियुक्ति का प्रमाण नहीं होता। सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया निर्धारित भर्ती नियमों, विभागीय आदेशों और आधिकारिक रिकॉर्ड के जरिए होती है।
फ्लैट दिखाकर फिर मांगे ₹5 लाख
शिकायतकर्ता के अनुसार, नौकरी के बाद आरोपी ने उसे देहरादून में एक फ्लैट भी दिखाया और सौदा पूरा कराने का भरोसा दिया। इसके लिए कथित तौर पर उससे अतिरिक्त ₹5 लाख लिए गए।
इस तरह शिकायत में कुल रकम करीब ₹30 लाख बताई गई है।
बाद में जब शिकायतकर्ता ने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो कथित तौर पर उसे दिए गए कुछ चेक बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि रकम वापस मांगने पर उसे धमकाया गया और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस ने किस आधार पर केस दर्ज किया?
रिपोर्ट के अनुसार, राजपुर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2) के तहत केस दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि FIR दर्ज होना दोष सिद्ध होना नहीं है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों, पैसों के लेन-देन, दस्तावेजों, चेक, बैंक रिकॉर्ड और नौकरी से जुड़े दावों की जांच करेगी। जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
यह ठगी का तरीका इतना प्रभावी क्यों होता है?
ऐसे मामलों में ठग अक्सर तीन चीजों को एक साथ इस्तेमाल करते हैं—
1. सरकारी नौकरी का लालच:
सरकारी नौकरी को सुरक्षित और प्रतिष्ठित माना जाता है। इसलिए नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी रकम मांगने पर भी कई लोग भरोसा कर लेते हैं।
2. प्रभाव और पहचान का दावा:
आरोपी खुद को मीडिया, प्रशासनिक अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताकर भरोसा पैदा कर सकता है। लेकिन किसी व्यक्ति की पहचान या संपर्क सरकारी नियुक्ति की गारंटी नहीं होती।
3. दस्तावेज दिखाकर विश्वास जीतना:
कथित नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र, मुहर या दूसरे कागजात दिखाकर सामने वाले को विश्वास दिलाया जा सकता है कि प्रक्रिया वास्तविक है। इसलिए दस्तावेज देखकर ही पैसा देना सुरक्षित नहीं है।
सरकारी नौकरी के नाम पर पैसा मांगना सबसे बड़ा रेड फ्लैग
इस घटना से एक बेहद जरूरी बात सामने आती है—सरकारी नौकरी के लिए निजी व्यक्ति को लाखों रुपये देना गंभीर चेतावनी संकेत है।
किसी भी सरकारी पद की भर्ती आमतौर पर निर्धारित सरकारी भर्ती प्रक्रिया से होती है। उदाहरण के लिए उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं को लेकर पहले भी गंभीर विवाद सामने आ चुके हैं। 2022 के UKSSSC पेपर लीक मामले में उत्तराखंड STF ने कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी और चार्जशीट दाखिल की गई थी। उस मामले में करीब ₹94.79 लाख नकद बरामद किए जाने और कई बैंक खातों में रकम फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
हालांकि, मौजूदा ₹30 लाख वाले मामले को उस पुराने पेपर लीक मामले से सीधे जोड़ना उचित नहीं है। दोनों घटनाएं अलग हैं।
आम लोगों के लिए सबक
सरकारी नौकरी, टेंडर, लाइसेंस या सरकारी ठेके के नाम पर कोई व्यक्ति यदि निजी खाते में लाखों रुपये मांगता है तो तुरंत सावधान हो जाएं।
पैसा देने से पहले ये 7 जांच जरूर करें:
- संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भर्ती की जानकारी देखें।
- नियुक्ति पत्र की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।
- जिस पद का दावा किया जा रहा है, उसका विज्ञापन और भर्ती नियम खोजें।
- सरकारी कार्यालय के आधिकारिक नंबर से सत्यापन करें।
- निजी व्यक्ति के भरोसे पर नकद भुगतान न करें।
- बैंक ट्रांजैक्शन और सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें।
- संदेह होने पर तुरंत पुलिस या संबंधित साइबर/कानूनी प्राधिकरण से संपर्क करें।
निष्कर्ष
देहरादून का यह मामला दिखाता है कि सरकारी नौकरी और प्रॉपर्टी का लालच आर्थिक ठगी का मजबूत हथियार बन सकता है। शिकायत के अनुसार ₹25 लाख नौकरी और ₹5 लाख फ्लैट के नाम पर लिए गए, लेकिन न नौकरी मिली और न कथित सौदा पूरा हुआ। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
