GST settlement fraud: GST निपटाने का झांसा देकर 7.99 करोड़ की कथित ठगी, मुंबई में तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज।
GST बकाया खत्म कराने का झांसा, 7.99 करोड़ की कथित ठगी; मुंबई में तीन लोगों पर केस….
मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में GST बकाया निपटाने के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। बांद्रा पुलिस ने एक पूर्व कॉरपोरेट अधिकारी की शिकायत पर हिरेन उर्फ रोमी भगत, आकाश गुप्ता और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने कंपनी के करीब 11 करोड़ रुपये के लंबित टैक्स दायित्व को सुलझाने का भरोसा दिलाकर उनसे लगभग 7.99 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
मामले की जांच अब मुंबई क्राइम ब्रांच की Economic Offences Wing (EOW) कर रही है। अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
कौन हैं शिकायतकर्ता और मामला कैसे शुरू हुआ?
शिकायतकर्ता अमित प्रभाकर टिपनिस, 50 वर्ष, दादर निवासी हैं। वे BWW Global Pvt Ltd में कंट्री मैनेजर के पद पर काम कर चुके हैं।
शिकायत के मुताबिक, कंपनी का कारोबार 2020 में कोविड महामारी के दौरान बंद हो गया था। इसके बाद कंपनी से जुड़ी करीब 11 करोड़ रुपये की GST देनदारी का मामला सामने आया। इसी सिलसिले में सितंबर 2023 में टिपनिस की मुलाकात अधिवक्ता प्रकाश निचानी के माध्यम से हिरेन भगत और उसके सहयोगी आकाश गुप्ता से हुई। आरोप है कि दोनों ने टैक्स संबंधी विवाद को सुलझाने में मदद करने का भरोसा दिया।
फिर कैसे बढ़ता गया पैसों का लेन-देन?
FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर कंपनी के एक अधिकारी के खिलाफ गुवाहाटी में शिकायत करने की सलाह दी। बाद में जनवरी 2024 में भगत की किसी दूसरे मामले में गिरफ्तारी के बाद भी कथित तौर पर पैसे जुटाने की प्रक्रिया जारी रही।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आकाश गुप्ता ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराने को कहा और GST विभाग में अपने संपर्क होने का दावा किया। कथित तौर पर बैंक खाता फ्रीज कराने की धमकी भी दी गई।
इसके बाद शिकायतकर्ता का वाशी स्थित Axis Bank खाता GST अधिकारियों द्वारा फ्रीज किए जाने की बात सामने आई। इस घटनाक्रम ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता के दबाव और डर को और बढ़ा दिया।
करीब 8 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में भेजे
शिकायतकर्ता के अनुसार, GST मामले को पूरी तरह निपटाने के भरोसे पर उन्होंने लगभग 8 करोड़ रुपये बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर किए। इसके अलावा एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को 5 लाख रुपये की पेशेवर फीस भी देने की बात FIR में दर्ज है।
लेकिन अगस्त 2024 से लगातार संपर्क करने के बावजूद कथित GST समाधान नहीं हुआ। शिकायतकर्ता ने बाद में आरोप लगाया कि उनसे रकम लेने के बाद भी समस्या का कोई वास्तविक समाधान नहीं किया गया।
मार्च 2025 की मुलाकात के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा
शिकायत के मुताबिक, मार्च 2025 में वर्ली स्थित एक होटल में आरोपियों से मुलाकात हुई। इस दौरान शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर अपने पैसे और GST मामले के समाधान को लेकर सवाल उठाए।
आरोप है कि इसी दौरान उन्हें धमकाया गया। इसके बाद संपर्क टूटने और कथित धमकियों से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने पुलिस से संपर्क किया।
बांद्रा पुलिस ने मामले में FIR दर्ज की और जांच आगे बढ़ाई गई। बाद में EOW ने जांच अपने हाथ में ले ली।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल क्या है?
इस केस का सबसे अहम पहलू सिर्फ 7.99 करोड़ रुपये की कथित ठगी नहीं है, बल्कि यह भी है कि टैक्स विवाद को सुलझाने के नाम पर कथित तौर पर निजी खातों में इतनी बड़ी रकम कैसे पहुंची।
GST विवाद वास्तविक था या नहीं, आरोपियों ने वास्तव में किसी सरकारी विभाग या अधिकृत पेशेवर के माध्यम से कोई समाधान कराने की कोशिश की थी या नहीं—इन सवालों का जवाब बैंक ट्रांजैक्शन, चैट, कॉल रिकॉर्ड, दस्तावेजों और GST विभाग से जुड़े रिकॉर्ड की जांच से सामने आ सकता है।
विशेष शब्दों में समझें
- GST Liability: किसी व्यक्ति या कंपनी पर बकाया GST की रकम।
- FIR: पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्रथम सूचना रिपोर्ट; यह अपने आप में अपराध साबित नहीं करती।
- EOW: आर्थिक अपराधों और बड़े वित्तीय मामलों की जांच करने वाली विशेष पुलिस शाखा।
- Bank Trail: पैसा किन खातों में गया और वहां से आगे कहां पहुंचा, इसका डिजिटल वित्तीय रिकॉर्ड।
- Financial Fraud: धोखे या गलत जानकारी के जरिए आर्थिक लाभ हासिल करना।
विश्लेषण: यह मामला आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह घटना एक बड़े जोखिम की ओर इशारा करती है—सरकारी टैक्स, GST, आयकर या कानूनी विवाद को जल्द खत्म कराने का दावा करने वाले बिचौलियों पर आंख बंद करके भरोसा करना।
बड़े टैक्स विवाद में अगर कोई व्यक्ति यह दावा करे कि उसके सरकारी अधिकारियों में सीधे संपर्क हैं और कुछ रकम देकर मामला खत्म कराया जा सकता है, तो यह गंभीर Red Flag होना चाहिए।
दूसरी महत्वपूर्ण बात है बैंक खाते में पैसा भेजने का तरीका। सरकारी टैक्स भुगतान सामान्यतः निर्धारित सरकारी प्रणालियों और अधिकृत चैनलों से किया जाता है। किसी कथित समाधान के नाम पर निजी व्यक्ति या अनजान कंपनी के खातों में करोड़ों रुपये भेजना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
इस केस में जांच एजेंसियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम होगा—पैसे का पूरा ट्रेल खोजना, लाभार्थी खातों की पहचान करना, डिजिटल बातचीत की जांच करना और यह पता लगाना कि रकम आखिरकार किन लोगों तक पहुंची।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि FIR में लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। अदालत में आरोप सिद्ध होने तक संबंधित व्यक्तियों को कानूनी रूप से दोषी नहीं माना जा सकता।
आम लोगों के लिए 5 जरूरी सावधानियां
- GST/Income Tax विवाद खत्म कराने के नाम पर निजी खाते में पैसा न भेजें।
- सरकारी विभाग से संबंधित दावे की आधिकारिक पोर्टल या विभागीय अधिकारी से स्वतंत्र पुष्टि करें।
- किसी एजेंट के “ऊपर तक संपर्क” वाले दावे पर भरोसा न करें।
- करोड़ों रुपये के लेन-देन से पहले स्वतंत्र CA या टैक्स वकील से राय लें।
- संदिग्ध भुगतान हो चुका है तो बैंक और पुलिस/साइबर क्राइम एजेंसी को तुरंत सूचना दें।
निष्कर्ष: मुंबई का यह मामला बताता है कि टैक्स और कानूनी परेशानियों का डर दिखाकर लोगों से बड़ी रकम हासिल करने की कोशिश कितनी गंभीर हो सकती है। जांच में अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि 7.99 करोड़ रुपये की पूरी रकम कहां गई और इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
