सावधान! ₹30 करोड़ के साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़, पुलिस ने MBA ग्रेजुएट समेत 7 शातिर जालसाजों को दबोचा।
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साइबर ठगी का काला सच: ₹30 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का भंडाफोड़, MBA ग्रेजुएट समेत 7 शातिर गिरफ्तार…..
दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराधियों (Cyber Fraudsters) के एक ऐसे खतरनाक और संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो भोले-भाले नागरिकों को ठगने के लिए म्यूल बैंक अकाउंट्स (Mule Bank Accounts) और फर्जी कंपनियों का जाल बिछा रहा था। इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक MBA ग्रेजुएट समेत कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
इस सिंडिकेट का दायरा इतना बड़ा था कि इसके जरिए 30 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की रकम को इधर-उधर (Route) किया गया। आइए इस पूरी घटना को बेहद सरल भाषा में, तथ्यों और गहराई के साथ समझते हैं:
कैसे खुला राज? (मामले की शुरुआत)
इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक छात्रा साइबर ठगी का शिकार हो गई।
- घटना: पिछले महीने उस छात्रा ने सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन देखकर एक कुर्ती (Kurti) खरीदने की कोशिश की।
- धोखाधड़ी: विज्ञापन के लिंक पर क्लिक करने पर उसे व्हाट्सएप पर रिडायरेक्ट किया गया, जहाँ ₹799 का ऑर्डर बुक करने को कहा गया। इसके बाद, पार्सल कोड जनरेट करने और डिलीवरी के नाम पर उससे अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹6,450 ठग लिए गए।
- कार्रवाई: 4 सितंबर को छात्रा ने इसकी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और इस विशाल नेटवर्क की परतें उधड़ती चली गईं।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम
दिल्ली पुलिस (उत्तर जिला) की डीसीपी निहारिका भट्ट के अनुसार, इस सिंडिकेट में शामिल मुख्य आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
- गौरव पांडे (उम्र 24 वर्ष) – एक MBA ग्रेजुएट, जो इस पूरे नेटवर्क में बैंक खातों की सप्लाई को कोऑर्डिनेट करता था।
- आदित्य मिश्रा (उम्र 23 वर्ष)
- आयुष वर्मा (उम्र 22 वर्ष)
- अभिषेक पाल (उम्र 23 वर्ष)
- हिमांशु राणा (उम्र 29 वर्ष)
- राहुल कुमार (उम्र 30 वर्ष)
- उदित प्रताप सिंह भदौरिया (उम्र 22 वर्ष)
ठगी का खतरनाक तरीका (Modus Operandi): कैसे काम करता था यह सिंडिकेट?
यह गिरोह बहुत ही शातिर तरीके से बैंकिंग सिस्टम को चकमा दे रहा था:
- फर्जी कंपनियां (Fake Firms): इस सिंडिकेट ने मुख्य रूप से तीन फर्जी कंपनियां खड़ी की थीं—
- Kizentech Solutions Pvt Ltd
- Executive Edge
- Nexcore
- खाते खोलना: इन फर्जी कंपनियों और कुछ व्यक्तिगत नामों पर बैंक खाते खोले गए
- म्यूल अकाउंट चेन (Mule Account Chain):
- चार आरोपियों का काम ऐसे बैंक खातों और खाताधारकों की व्यवस्था करना था।
- ये खाते अन्य दो आरोपियों को करीब ₹25,000 प्रति माह के किराए या भुगतान पर सौंप दिए जाते थे।
- ये लोग अकाउंट की किट्स (पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड) और उनसे जुड़ी लंक़्ड सिम कार्ड्स को गौरव पांडे (MBA Graduate) तक पहुँचाते थे।
- गौरव पांडे अंत में इन्हें आगे साइबर ठगों को मोटे कमीशन पर सप्लाई करता था।
विश्लेषणात्मक आंकड़े और गहराई (Analytical Insights & Scale)
- ₹30 करोड़ से अधिक के ट्रांजैक्शन: अब तक की जांच में यह सामने आया है कि इन संदिग्ध बैंक खातों के जरिए 30 करोड़ रुपये से ज्यादा के क्रेडिट ट्रांजैक्शन किए जा चुके हैं।
- 27 से अधिक शिकायतें लिंक्ड: इस एक ही नेटवर्क से जुड़े देशभर के विभिन्न राज्यों के 27 साइबर फ्रॉड मामलों/शिकायतों को जोड़ा जा चुका है।
- टेक्निकल सर्विलांस: पुलिस ने इस तक पहुँचने के लिए करीब 200 मोबाइल नंबरों और IMEI नंबरों का गहन विश्लेषण किया। साथ ही, कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और डिलीवरी सर्विसेज से बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा खंगाला गया।
छापेमारी और गिरफ्तारियां (Raids & Arrests)
पुलिस ने पुख्ता सबूत मिलने के बाद योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया:
- 16 अक्टूबर 2026: ग्रेटर नोएडा में ताबड़तोड़ छापेमारी कर 6 आरोपियों को दबोच लिया गया।
- 21 अक्टूबर 2026: मुख्य समन्वयक गौरव पांडे को कानपुर से गिरफ्तार किया गया।
आम जनता के लिए जरूरी सीख और चेतावनी (Expert Takeaway)
म्यूल अकाउंट क्या होते हैं? जब धोखेबाज किसी लालच (जैसे कमीशन, कम मेहनत में पैसे या पार्ट-टाइम जॉब) के चक्कर में आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध पैसे ट्रांसफर करने के लिए करते हैं, तो उन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है।
सावधान रहें: कभी भी अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, यूपीआई आईडी या दस्तावेजों को किसी अनजान व्यक्ति या फर्जी फर्म को इस्तेमाल के लिए न दें। ऐसा करना कानूनी रूप से गंभीर अपराध है और आप अनजाने में मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के बड़े मामलों में फंसकर जेल जा सकते हैं।
