₹645 करोड़ का बैंक घोटाला: चंडीगढ़ के ज्वेलर राजन कटोडिया ED की गिरफ्त में!!!
₹645 करोड़ का बैंक घोटाला: चंडीगढ़ के ज्वेलर राजन कटोडिया ED की गिरफ्त में…….
खबर एक नज़र में
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चंडीगढ़ की फर्म सावन ज्वेलर्स के पार्टनर राजन सिंह कटोडिया को गिरफ्तार किया है। मामला IDFC फर्स्ट बैंक के उस घोटाले से जुड़ा है, जिसमें हरियाणा सरकार के विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन का पैसा निकाल लेने का आरोप है।
कटोडिया को 22 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। पंचकूला की विशेष PMLA कोर्ट ने उन्हें चार दिन की ED हिरासत में भेज दिया।
ED का आरोप क्या है?
- ED के अनुसार, कटोडिया सेक्टर 35-C (चंडीगढ़) की सावन ज्वेलर्स के सक्रिय मैनेजिंग पार्टनर थे और फर्म का पूरा कामकाज वही संभालते थे।
- जांच में सामने आया कि 6 नवंबर 2024 से 18 फरवरी 2026 के बीच इस फर्म से जुड़े खातों में करीब ₹332 करोड़ आए। यह पैसा उन शेल और बिचौलिया कंपनियों से आया, जिन पर कथित मास्टरमाइंड ऋषि का नियंत्रण बताया गया है।
- जांचकर्ताओं ने यह भी देखा कि ऋषि से जुड़ने के बाद फर्म की बुलियन (सोना-चांदी) की खरीद अचानक तेज़ी से बढ़ गई।
- ED ने अब तक करीब ₹225 करोड़ की चल-अचल संपत्ति कुर्क, जब्त या फ्रीज़ की है।
ध्यान दें: ये सब आरोप हैं। दोष अदालत में साबित होना बाकी है।
घोटाला हुआ कैसे? (आसान भाषा में)
- FD के नाम पर पैसा: हरियाणा सरकार की कई एजेंसियों ने यह रकम बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए रखी थी, लेकिन आरोप है कि उसे FD में लगाने की बजाय निजी इस्तेमाल के लिए घुमा दिया गया।
- शेल कंपनियां: आरोप है कि ब्रांच मैनेजर ऋभव ऋषि और रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार ने सरकारी विभागों का पैसा अपनी शेल कंपनियों में भेजा।
- सोने की खरीद का दिखावा: ED के मुताबिक पैसा कई शेल कंपनियों और ज्वेलर्स के खातों से घुमाया गया, ताकि लगे कि यह सोना खरीदने के असली लेन-देन हैं। इसके लिए कथित तौर पर फर्जी बिल इस्तेमाल हुए।
- कमीशन काटकर कैश वापस: ED का कहना है कि ज्वेलर्स के खातों में गया पैसा कमीशन काटकर नकद के रूप में लौटा दिया जाता था।
ज़रूरी शब्द (Special Terms)
- PMLA (धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002): काले धन को सफेद दिखाने (मनी लॉन्ड्रिंग) के खिलाफ कानून। ED इसी के तहत गिरफ्तारी करती है।
- शेल कंपनी: ऐसी कंपनी जो कागज़ पर होती है, असली कारोबार बहुत कम या नहीं होता। इसका इस्तेमाल पैसे का असली रास्ता छिपाने में होता है।
- लेयरिंग: चोरी का पैसा कई खातों में घुमाना, ताकि स्रोत पकड़ में न आए।
- प्रोसीड्स ऑफ क्राइम: अपराध से कमाया गया पैसा या संपत्ति।
- बुलियन: सोना-चांदी जैसी कीमती धातुएं, जो बाज़ार भाव पर खरीदी-बेची जाती हैं।
अब तक का घटनाक्रम
- मार्च 2026: ED ने चंडीगढ़, गुरुग्राम और मोहाली में 19 ठिकानों पर छापे मारे। तब रकम करीब ₹590 करोड़ बताई गई थी।
- 11 मई: ED ने ऋभव ऋषि और अभय कुमार को गिरफ्तार किया।
- 29 मई: रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। ED के अनुसार उन्हें ₹70 करोड़ से ज़्यादा की अपराध की कमाई मिली।
- सितंबर 2026: ED ने चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में करीब 14 ठिकानों पर छापे मारे, जिनमें ज्वेलर्स शामिल थे।
- 22 अक्टूबर: राजन सिंह कटोडिया की गिरफ्तारी।
विश्लेषण: इस खबर से हमें क्या समझना चाहिए?
1. घोटाला बैंक के अंदर से शुरू हुआ। आरोप के मुताबिक मुख्य किरदार बैंक के ही कर्मचारी थे। यानी सिस्टम की सबसे बड़ी कमज़ोरी अक्सर वही लोग होते हैं जिनके पास अंदर की पहुंच होती है।
2. रकम के आंकड़े अलग-अलग क्यों हैं? शुरू में ₹590–597 करोड़ की बात हुई, फिर ED ने ₹645 करोड़ कहा। CBI के अनुसार हरियाणा मामले में ₹504 करोड़ और चंडीगढ़ मामले में ₹153 करोड़ का फ्रॉड है, जबकि ED कुल ₹645 करोड़ बताती है। जांच आगे बढ़ने पर आंकड़े बदलना आम बात है, इसलिए खबर लिखते समय “ED के अनुसार” जैसा स्रोत ज़रूर लिखें।
3. जांच का दायरा बढ़ रहा है। CBI ने तीसरी चार्जशीट में हरियाणा कैडर के छह IAS अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों के नाम शामिल किए हैं। ED अब तक 14 संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट और ₹211 करोड़ की संपत्ति की कुर्की कर चुकी है। (ध्यान दें, ₹211 करोड़ का यह आंकड़ा सितंबर की रिपोर्ट का है; ताज़ा बयान में ₹225 करोड़ बताया गया है।)
4. ज्वेलरी सेक्टर निशाने पर क्यों? सोने की खरीद-बिक्री में नकद लेन-देन आसान होता है और बड़े बिल बनाना भी सामान्य लगता है। इसी वजह से इसे काले-सफेद पैसे के खेल में इस्तेमाल करने के आरोप लगते हैं।
आम लोगों के लिए सबक
- सरकारी या निजी, किसी भी बैंक में खाता है तो नियमित रूप से FD रसीद और स्टेटमेंट खुद जांचें।
- ऑनलाइन या ऑफलाइन, किसी भी बैंक कर्मचारी को ओटीपी, पासवर्ड या खाली साइन किए हुए फॉर्म न दें।
- बड़े सोने की खरीद पर हमेशा पक्का बिल लें और भुगतान बैंक के ज़रिए करें।
- बैंक की शिकायत पर सुनवाई न हो तो RBI के बैंकिंग लोकपाल से शिकायत की जा सकती है।
