व्हाट्सऐप यूज़र्स सावधान: “लिंक्ड डिवाइस” के जरिए खाली हो रहे हैं खाते!!!
व्हाट्सऐप यूज़र्स सावधान: “लिंक्ड डिवाइस” के जरिए खाली हो रहे हैं खाते
खबर क्या है?
राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा लगातार लोगों को व्हाट्सऐप से जुड़ी ठगी के बारे में चेता रही है। ठग अब आपका फोन नहीं चुराते। वे आपके व्हाट्सऐप को चुपचाप अपने फोन या कंप्यूटर से “लिंक” कर लेते हैं।
ठग यह कैसे करते हैं?
GhostPairing (घोस्ट पेयरिंग) नाम का तरीका इसका बड़ा उदाहरण है। भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने इसे “हाई” खतरे वाला अभियान बताया है। एजेंसी के अनुसार ठग व्हाट्सऐप के “डिवाइस लिंक” फीचर का गलत इस्तेमाल करके, बिना पासवर्ड और बिना सिम बदले, खाते पर पूरा कब्जा कर लेते हैं।
शुरुआत अक्सर ऐसे होती है:
- आपके किसी जान-पहचान वाले के नंबर से मैसेज आता है, जैसे “देखो, यह फोटो।”
- ठग लोगों को अपना फोन नंबर डालने के लिए फुसलाते हैं, ताकि “फोन नंबर से डिवाइस लिंक करें” वाला तरीका चल जाए।
- लिंक होते ही ठग को लगभग वही पहुँच मिल जाती है जो आपको व्हाट्सऐप वेब पर मिलती है। यानी आपके मैसेज, फोटो और वीडियो उसे दिखने लगते हैं।
⚠️ खास शब्द आसान भाषा में
- लिंक्ड डिवाइस: वे फोन या कंप्यूटर जिन पर आपका व्हाट्सऐप एक साथ चल रहा है।
- पेयरिंग कोड: लिंक करते समय आने वाला कोड। इसे किसी को बताना मतलब अपना घर किसी को सौंप देना।
- हाइजैकिंग: आपके खाते पर कब्जा कर लेना।
- इम्पर्सोनेशन: किसी और बनकर ठगी करना।
- 2FA / टू-स्टेप वेरिफिकेशन: खाते पर लगा दूसरा ताला, यानी एक अतिरिक्त पिन।
खाता हाथ में आने के बाद ठग क्या करते हैं?
- आपके दोस्तों और परिवार से पैसे माँगते हैं। यह ठगी पकड़ना मुश्किल है, जब तक कोई संपर्क फोन करके पूछ न ले।
- आपकी निजी चैट और फोटो देखते हैं।
- आपके नाम पर गलत काम करते हैं, जिससे आप खुद मुसीबत में पड़ सकते हैं।
यह अकेला तरीका नहीं है
1. बड़े अफसर या “साहब” बनकर ठगी। पत्रिका के मुताबिक राजस्थान पुलिस की साइबर शाखा ने बॉस या बड़े अधिकारी की फोटो-नाम वाले मैसेज पर चेताया है, जिनमें तुरंत पैसे या गिफ्ट वाउचर माँगे जाते हैं।
2. “अकाउंट किराए पर दो” का जाल। कुछ ठग रोज़ के 500 से 1,000 रुपये का लालच देकर लोगों से उनका व्हाट्सऐप “किराए” पर माँगते हैं। इसके बाद वे QR कोड स्कैन करवाते हैं या संदिग्ध लिंक खुलवाते हैं। नतीजा यह कि कई बार बेकसूर लोगों से पूछताछ तक हुई, क्योंकि उनके नंबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े मिले।
3. त्योहार और चुनाव का फायदा। राजस्थान पुलिस के साइबर डीजीपी हेमंत प्रियदर्शी ने कहा था कि ठग क्रिसमस और नए साल जैसे मौकों पर व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और फेसबुक पर खतरनाक लिंक भेजते हैं। शहरी निकाय चुनाव से पहले भी पुलिस ने “वोटर लिस्ट में नाम देखें” जैसे नकली लिंक, OTP और QR कोड से सावधान रहने को कहा।
विश्लेषण: यह ठगी इतनी असरदार क्यों है?
- भरोसे का इस्तेमाल। मैसेज अनजान से नहीं, अपने किसी जानने वाले के नंबर से आता है।
- तकनीकी चूक नहीं, इंसानी चूक। CERT-In के मुताबिक ठग पासवर्ड नहीं तोड़ते, यूज़र से खुद कोड या नंबर डलवा लेते हैं। इसलिए एंटीवायरस भी बचा नहीं पाता।
- देर से पता चलना। खाता चुपचाप लिंक रहता है, इसलिए कई दिन तक पीड़ित को खबर नहीं होती।
- एक खाता, कई शिकार। एक हैक हुआ नंबर पूरी संपर्क सूची के लिए जाल बन जाता है।
यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं है। गृह मंत्रालय के अधीन BPRD ने व्हाट्सऐप पर सात तरह की ठगी गिनाई है, जिनमें मिस्ड कॉल, वीडियो कॉल, नौकरी और निवेश का झाँसा, इम्पर्सोनेशन, हाइजैकिंग और स्क्रीन शेयर शामिल हैं। हांगकांग पुलिस ने भी एक हफ्ते में ऐसे 20 मामलों में लगभग 10 लाख हांगकांग डॉलर तक के नुकसान की बात कही।
बचाव के आसान कदम
- व्हाट्सऐप खोलें, Settings → Linked Devices में जाएँ।
- जो डिवाइस आपका नहीं है, उसे Log out करें। यह जाँच हर कुछ दिन में करें।
- Two-step verification चालू करें। हांगकांग के प्राइवेसी कमिश्नर ऑफिस ने भी टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करने और लिंक्ड डिवाइस की नियमित जाँच करने की सलाह दी है।
- “यह फोटो देखो” जैसे मैसेज में लिंक पर क्लिक न करें। पहले उस व्यक्ति को सामान्य कॉल करके पूछें।
- कोई कोड, पिन या OTP किसी को न बताएँ, चाहे वह अपना ही क्यों न लगे।
- अनजान QR कोड स्कैन न करें।
- व्हाट्सऐप या सिम पैसे लेकर किसी को न दें।
- ऐप सिर्फ आधिकारिक स्टोर से डाउनलोड करें।
ठगी हो जाए तो क्या करें?
- तुरंत व्हाट्सऐप से संदिग्ध डिवाइस हटाएँ और पासवर्ड और पिन बदलें।
- अपने परिवार और दोस्तों को बता दें कि आपके नाम से आए पैसे के मैसेज पर भरोसा न करें।
- साइबर हेल्पलाइन 1930, साइबर क्राइम पोर्टल या नजदीकी थाने में तुरंत शिकायत करें।
- पैसे कट गए हों तो जितनी जल्दी हो बैंक को भी सूचित करें।
