ऑनलाइन ठगी: भारत में सबसे ज़्यादा लोग किन जालों में फँस रहे हैं?
ऑनलाइन ठगी: भारत में सबसे ज़्यादा लोग किन जालों में फँस रहे हैं?
शॉपिंग, लॉटरी और नौकरी के नाम पर सबसे ज़्यादा धोखा……
खबर क्या है?
मोबाइल कंपनियों की वैश्विक संस्था GSMA की नई रिपोर्ट के अनुसार पिछले 12 महीनों में 12 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि वे ठगी का शिकार हुए। पिछली रिपोर्ट में यह आँकड़ा 10 प्रतिशत था। यह सर्वे एशिया के कई देशों में हुआ है। भारत में ठगी का आँकड़ा पूरे ASEAN-6 समूह के औसत (8%) से ज़्यादा निकला।
ठगी के तीन सबसे बड़े तरीके
ठगी का शिकार हुए लोगों में 33% के साथ ऑनलाइन शॉपिंग का फ्रॉड सबसे आम था। इनाम, लॉटरी और विरासत वाली ठगी 31% के साथ दूसरे नंबर पर रही, और नौकरी या कमाई के नाम पर ठगी 30% के साथ तीसरे नंबर पर।
| ठगी का तरीका | शिकार हुए लोगों में हिस्सा |
|---|---|
| ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड | 33% |
| इनाम / लॉटरी / विरासत | 31% |
| नौकरी या कमाई का झाँसा | 30% |
ज़रूरी बात: ये प्रतिशत “शिकार हुए लोगों” में से हैं। इसका मतलब यह नहीं कि 33% भारतीय शॉपिंग फ्रॉड में फँसे। पूरे सर्वे में सिर्फ 12% लोग ठगी के शिकार हुए थे। यह फर्क समझाना खबर को सही रखने के लिए ज़रूरी है।
ठग आपसे कहाँ संपर्क करते हैं?
42% मामलों में मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल हुआ। इसके बाद सोशल मीडिया (37%) और ईमेल (33%) आए। यानी जो ऐप आप रोज़ चलाते हैं, ठग वहीं बैठे हैं।
AI से ठगी और मुश्किल हुई
89% भारतीय उपभोक्ताओं ने कहा कि उन्होंने ठगी में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल होते देखा है। इसमें नकली आवाज़, डीपफेक वीडियो और असली जैसे दिखने वाले मैसेज आते हैं। अब सिर्फ गलत हिंदी या अंग्रेज़ी देखकर नकली मैसेज पहचानना काफी नहीं है।
पैसा वापस क्यों नहीं मिलता?
यह इस रिपोर्ट का सबसे चिंता वाला हिस्सा है।
- 64% पीड़ितों का पैसा डूबा।
- 86% पीड़ितों ने किसी संस्था (बैंक, ई-वॉलेट, प्लेटफॉर्म या पुलिस) से शिकायत की। ASEAN-6 में यह आँकड़ा 69% है। यानी भारत में लोग शिकायत करने में आगे हैं।
- फिर भी हर तीन में से एक शिकायत अनसुलझी रही।
- रिपोर्ट के अनुसार पैसा गँवाने वाले करीब 67% पीड़ितों को कुछ भी वापस नहीं मिला।
मतलब लोग शिकायत कर रहे हैं, पर नतीजा कमज़ोर है। रिपोर्ट में पुलिस, बैंक और प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर तालमेल की माँग की गई है।
सरकारी आँकड़े क्या कहते हैं?
सर्वे सिर्फ एक अंदाज़ा देता है। असली तस्वीर के लिए सरकारी शिकायतें देखनी चाहिए।
- I4C (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, गृह मंत्रालय के अधीन) के अनुसार 2025 में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 24 लाख से ज़्यादा शिकायतें आईं और ₹22,495 करोड़ की ठगी दर्ज हुई। एक अन्य रिपोर्ट में 2025 का आँकड़ा लगभग ₹19,813 करोड़ बताया गया है, जो अलग गिनती-तरीके के कारण हो सकता है। इसलिए अपने कंटेंट में “लगभग ₹20,000 करोड़ से ज़्यादा” लिखना सुरक्षित रहेगा।
- CFCFRMS (नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग प्रणाली) ने 31 दिसंबर 2025 तक ₹8,189 करोड़ से ज़्यादा रकम बचाई और 12 लाख से ज़्यादा SIM कार्ड ब्लॉक किए।
- एक रिपोर्ट के अनुसार 2025 में साइबर ठगी में गई रकम का 76% हिस्सा नकली निवेश स्कीमों में गया। इसमें पोंज़ी स्कीम, नकली शेयर ट्रेडिंग ऐप और क्रिप्टो ठगी शामिल हैं।
विश्लेषण: इन आँकड़ों से हमें क्या समझना चाहिए?
- सबसे ज़्यादा लोग शॉपिंग में फँसते हैं, पर सबसे बड़ा नुकसान निवेश में होता है। शॉपिंग फ्रॉड में रकम छोटी होती है और लोग ज़्यादा होते हैं। निवेश ठगी में लोग कम होते हैं, पर रकम बहुत बड़ी जाती है।
- ठगी के तरीके बदलते रहते हैं। 2023 के YouGov सर्वे में शॉपिंग ठगी 27% और नौकरी ठगी 26% थी। नौकरी वाली ठगी Gen Z में सबसे ज़्यादा (31%) थी, और शॉपिंग वाली Millennials में (33%)। यानी जवान लोग भी इन जालों से बचे नहीं हैं।
- सर्वे की सीमा: GSMA सर्वे में भारत से करीब 500 लोग शामिल थे। यह छोटा नमूना है। इसलिए 12% को पूरे देश की सटीक सच्चाई नहीं, बल्कि एक संकेत मानें।
- पैसा लौटने की उम्मीद कम है। इसलिए सबसे अच्छा बचाव ठगी होने से पहले सावधान रहना है।
आम लोगों के लिए ज़रूरी सावधानियाँ
- नौकरी या लॉटरी के लिए पैसे माँगे तो रुकें। असली नौकरी में जॉइनिंग से पहले “रजिस्ट्रेशन फीस” नहीं ली जाती। जिस लॉटरी का टिकट आपने खरीदा ही नहीं, उसमें आप जीत नहीं सकते।
- OTP, PIN, CVV किसी को न बताएँ। बैंक कभी फोन पर ये नहीं माँगता।
- सिर्फ भरोसेमंद साइट से खरीदें। बहुत सस्ते दाम और “आज ही आखिरी दिन” वाले ऑफर पर शक करें।
- अनजान लिंक या QR कोड पर क्लिक न करें। QR स्कैन करने से पैसा कटता है, आता नहीं।
- “गारंटीड रिटर्न” का वादा हो तो समझ लें कि यह ठगी है।
- फोन पर “डिजिटल अरेस्ट” जैसी धमकी आए तो फोन काट दें। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।
- किसी परिचित की आवाज़ में पैसे माँगने वाली कॉल आए तो दूसरे नंबर से उन्हें खुद फोन करके पुष्टि करें, क्योंकि आवाज़ AI से बनाई जा सकती है।
ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
- फौरन 1930 पर कॉल करें। यह राष्ट्रीय साइबर ठगी हेल्पलाइन है, जो पैसा निकलने से पहले उसे रुकवाने में मदद करती है। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा बचने की उम्मीद उतनी ज़्यादा है।
- cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- अपने बैंक या वॉलेट कंपनी को बताएँ और कार्ड या खाता ब्लॉक करवाएँ।
- स्क्रीनशॉट, ट्रांज़ैक्शन ID और चैट सँभालकर रखें।
- शर्म न करें। ठगी में गलती ठग की होती है, पीड़ित की नहीं।
