मुंबई में प्रॉपर्टी फ्रॉड का बड़ा मामला, आठ लोगों पर आरोप और ₹100 करोड़ की जमीन सवालों में!
मुंबई में ₹100 करोड़ की जमीन धोखाधड़ी का आरोप, कंपनी डायरेक्टर समेत 8 लोगों पर केस……
मुंबई में जमीन के कागजों के जरिए कथित तौर पर ₹100 करोड़ की संपत्ति पर कब्जे की कोशिश का एक बड़ा मामला सामने आया है। पवई पुलिस ने रियल एस्टेट और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों से जुड़े लोगों समेत 8 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि एक जमीन के स्वामित्व को अपने पक्ष में दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और पुराने अधिकारों की गलत व्याख्या कर जमीन पर दावा किया गया।
मामला सामने आने के बाद इसकी गंभीरता को देखते हुए जांच मुंबई क्राइम ब्रांच की Economic Offences Wing (EOW) को सौंप दी गई है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
विवाद आखिर किस जमीन को लेकर है?
शिकायत के मुताबिक विवादित जमीन करीब 1 एकड़ 33 गुंठा, यानी लगभग 5,388 वर्ग मीटर है। यह जमीन एक बहुत बड़े भूखंड का हिस्सा है, जो कुल मिलाकर करीब 376 एकड़ और 20.5 गुंठा क्षेत्र में फैला हुआ बताया गया है। यह संपत्ति मुंबई के Tirandas, Powai, Tungaa, Paspoli और Saki गांवों के इलाके में बताई गई है।
शिकायतकर्ता Smith Properties Pvt Ltd के निदेशक Narottam Chitaranjan Sharma, उम्र 65 वर्ष, ने 25 फरवरी 2026 को पुलिस में शिकायत दी थी।
उनका दावा है कि इस बड़ी जमीन पर उनके परिवार के पुराने अधिकार रहे हैं। शिकायत के अनुसार उनके दादा Chandbhan Bhuramal Sharma और दो अन्य लोगों ने वर्ष 1948 में Sir Mohammad Yusuf Trust से यह जमीन लीज पर ली थी।
इसके बाद 30 मार्च 1964 को दो Sale Deeds के जरिए जमीन खरीदी गई। यानी शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार इस संपत्ति के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज कई दशक पुराने हैं।
आरोप है कि Lease Rights को Ownership की तरह पेश किया गया
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक Khandelwal परिवार के कुछ सदस्यों, Durga Prasad Ramcharan Pvt Ltd, Master Clock and Watch Works Pvt Ltd, Renis Electronics Pvt Ltd और Powai Vihar Developers Pvt Ltd से जुड़े लोगों ने कथित तौर पर जमीन के कुछ हिस्सों पर अपना मालिकाना हक जताया।
यहीं से इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित पक्षों के पास जमीन से जुड़े कुछ Sub-Lease Rights थे, लेकिन इन अधिकारों को कथित तौर पर Ownership Rights की तरह इस्तेमाल किया गया और बाद में जमीन के लेनदेन किए गए।
₹60 लाख का Development Agreement और फिर ₹13 करोड़ का सौदा
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2007 में एक Development Agreement हुआ था। इसके तहत लगभग 4,276.50 वर्ग मीटर जमीन के विकास अधिकार Powai Vihar Developers को दिए गए थे। इसके लिए करीब ₹60 लाख का भुगतान बताया गया है।
लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार वर्ष 2021 में Khandelwal परिवार के चार सदस्यों ने लगभग 1,112 वर्ग मीटर जमीन पर Adverse Possession के आधार पर मालिकाना दावा किया।
इसके बाद कथित तौर पर यही जमीन ₹13 करोड़ में Renis Electronics को ट्रांसफर की गई।
यही वह लेनदेन है जिसने पूरे मामले को करीब ₹100 करोड़ की कथित संपत्ति धोखाधड़ी के दायरे में ला दिया है। हालांकि ₹100 करोड़ का आंकड़ा विवादित संपत्ति के अनुमानित मूल्य से जुड़ा है और इसका अंतिम निर्धारण जांच में होना बाकी है।
असली खेल: कागजों पर मालिक बदलने की कोशिश?
जमीन से जुड़े मामलों में सबसे बड़ा खतरा यही होता है कि विवाद केवल जमीन पर कब्जे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि Revenue Records, Sale Deeds, Power of Attorney, Development Agreements और पुराने Title Documents के जरिए किसी संपत्ति पर अधिकार का दावा खड़ा किया जा सकता है।
मुंबई में सामने आया यह मामला इसी वजह से महत्वपूर्ण है।
यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी पक्ष ने अपने अधिकार से अधिक जमीन पर मालिकाना दावा किया और उसके आधार पर बिक्री या विकास का लेनदेन किया, तो मामला सिर्फ सामान्य Property Dispute नहीं रहेगा। इसमें Cheating, Forgery और Criminal Breach of Trust जैसे आपराधिक पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
वर्तमान मामले में पुलिस ने इन्हीं तरह के आरोपों के तहत FIR दर्ज की है। हालांकि अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
मुंबई में जमीन के फर्जीवाड़े का यह अकेला मामला नहीं
इस मामले को व्यापक संदर्भ में देखें तो महाराष्ट्र में Land Records और Property Documents की विश्वसनीयता को लेकर पहले भी गंभीर मामले सामने आते रहे हैं।
मार्च 2026 में मीडिया ने रिपोर्ट किया था कि महाराष्ट्र में 1.5 से 2 लाख परिवारों तक के जमीन रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों की आशंका सामने आई थी। मामला Maharashtra Land Revenue Code की Section 155 के कथित दुरुपयोग से जुड़ा था, जिसके तहत रिकॉर्ड में clerical या typographical errors सुधारने की व्यवस्था है। राज्य सरकार ने इस मामले के बाद व्यापक audit का आदेश दिया था।
मुंबई में जुलाई 2026 में एक अलग land-grabbing मामले में Crime Branch ने एक बिल्डर को गिरफ्तार किया था। उस मामले में भी पुलिस ने Forged Power of Attorney, फर्जी बैंक अकाउंट और जमीन के possession rights के कथित गलत हस्तांतरण की जांच की थी।
इससे एक बात साफ होती है—Property Fraud में केवल नकली हस्ताक्षर ही खतरा नहीं हैं। पुराने रिकॉर्ड, Power of Attorney, Development Rights और Ownership Claims के बीच अंतर को गलत तरीके से इस्तेमाल करना भी बड़े विवाद का कारण बन सकता है।
सरकार ने भी Property Registration को लेकर कदम उठाया
महाराष्ट्र में 1 अक्टूबर 2026 से immovable property documents की registration प्रक्रिया में Aadhaar authentication अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था property sale, purchase, mortgage और partition जैसे 63 प्रकार के registrations पर लागू बताई गई है।
सरकार का उद्देश्य फर्जी पहचान, fake parties और impersonation जैसी गड़बड़ियों को कम करना है। हालांकि Aadhaar verification अकेले किसी जमीन के असली मालिकाना हक का प्रमाण नहीं है; Title Verification और पुराने property records की जांच अब भी जरूरी रहती है।
आम आदमी के लिए सबसे बड़ा सबक
इस मामले से सबसे महत्वपूर्ण सबक यह है कि जमीन खरीदते समय सिर्फ Registry देखकर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है।
खरीदार को पुराने Title Deeds, Mutation Entries, Encumbrance, Power of Attorney, Development Agreement, Property Tax Records और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए।
खासकर तब जब जमीन की कीमत करोड़ों में हो या Seller यह दावा करे कि उसे जमीन किसी पुराने agreement, lease या development right के जरिए मिली है।
Lease Right और Ownership Right एक ही चीज नहीं हैं। इसी तरह Development Rights मिलने का मतलब हमेशा जमीन का मालिक बन जाना नहीं होता।
मुंबई का यह मामला अभी जांच के दौर में है। EOW अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित दस्तावेज कैसे तैयार हुए, किन लोगों ने उनका इस्तेमाल किया, वास्तविक ownership क्या है और कथित लेनदेन में किसकी क्या भूमिका थी।
अंतिम सच जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
