KPSC विवाद में पेपर लीक, OBC भर्ती और कथित बिचौलियों का नेटवर्क जांच एजेंसियों के निशाने पर।
KPSC भर्ती विवाद: बेटी की सरकारी नौकरी से पेपर लीक तक, कर्नाटक में आयोग पर क्यों उठे गंभीर सवाल?
कर्नाटक में सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती कराने वाली कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) इन दिनों गंभीर विवाद के केंद्र में है। मामला केवल एक परीक्षा में गड़बड़ी तक सीमित नहीं है। जांच में पेपर लीक, कथित बिचौलियों, अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने, OMR शीट में बदलाव के आरोप और आयोग के तत्कालीन चेयरमैन के परिवार से जुड़े भर्ती विवाद सामने आए हैं।
KPSC चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार को 25 अगस्त 2026 को राज्य सरकार की सिफारिश पर कर्नाटक के राज्यपाल ने निलंबित कर दिया था। इसके बाद कर्नाटक पुलिस की Criminal Investigation Department (CID) अलग-अलग शिकायतों और FIR के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
सबसे बड़ा मामला 400 पशु चिकित्सकों की भर्ती का
विवाद का एक प्रमुख हिस्सा 400 Veterinary Officers की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। यह परीक्षा जनवरी 2026 में हुई थी।
CID की जांच के मुताबिक, आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों तक परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले पहुंच गया था। जांच में करीब 29 चयनित अभ्यर्थियों पर विशेष रूप से सवाल उठे हैं। शिकायत में कहा गया है कि इनमें एक व्यक्ति का संबंध KPSC चेयरमैन के परिवार से भी बताया गया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के बदले 40 लाख से 80 लाख रुपये तक लेने का आरोप है। कथित तौर पर कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले होटल और रिसॉर्ट में ठहराया गया और उन्हें उत्तर भरने की तैयारी कराई गई। इसके बाद उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने का भी आरोप सामने आया है।
यहां ध्यान रखना जरूरी है कि ये बातें जांच में सामने आए आरोप और पुलिस के दावे हैं। अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होंगे।
जांच के घेरे में KPSC के अधिकारी और बिचौलिये
इस मामले में KPSC के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा कथित बिचौलिये बसवराज एन. कन्नाले को भी जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया।
CID के मुताबिक, प्रश्नपत्र तक पहुंच और अभ्यर्थियों से संपर्क में इन लोगों की कथित भूमिका की जांच की जा रही है। जांच में कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट कॉल और वित्तीय लेन-देन जैसे इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी सबूतों की पड़ताल की जा रही है।
ताजा जांच में एक और चौंकाने वाला वित्तीय पहलू सामने आया है। CID ने अदालत को बताया कि कुछ अभ्यर्थियों से कथित तौर पर करीब 70 लाख रुपये की रकम बिचौलिये तक पहुंची। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस रकम का एक हिस्सा सोने और हीरे के आभूषण खरीदने में इस्तेमाल हुआ। इस संबंध में बैंक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और कॉल डिटेल्स की जांच का उल्लेख अदालत में किया गया है।
चेयरमैन की बेटी की सरकारी नौकरी भी जांच के दायरे में
दूसरा बड़ा विवाद KPSC चेयरमैन की बेटी सुमा़ साहूकार की सरकारी नियुक्ति से संबंधित है।
FIR के मुताबिक, मार्च 2024 में Industrial Extension Officer के 50 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। सुमा़ ने OBC की 3B श्रेणी के तहत आवेदन किया, जुलाई 2025 में परीक्षा दी और जनवरी 2026 में चयनित हुईं।
लेकिन दस्तावेजों की जांच के दौरान उनके परिवार की वार्षिक आय से जुड़ा प्रमाणपत्र जांच के दायरे में आ गया।
पुलिस की FIR में आरोप है कि प्रमाणपत्र में परिवार की वार्षिक आय 40,000 रुपये दिखाई गई थी। दूसरी ओर, उनके पिता उस समय KPSC में वरिष्ठ पद पर थे। रिपोर्ट के अनुसार KPSC रिकॉर्ड में चेयरमैन का 2023 का सकल मासिक वेतन करीब 3.60 लाख रुपये बताया गया है, यानी सालाना रकम 42 लाख रुपये से अधिक बैठती है।
इसी आधार पर पुलिस ने दस्तावेज में कथित गड़बड़ी और आरक्षण लाभ हासिल करने से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की। सुमा़ साहूकार को 24 जुलाई को सशर्त अग्रिम जमानत मिली थी।
चेयरमैन पर कार्रवाई क्यों हुई?
इन आरोपों के बीच राज्य सरकार ने KPSC चेयरमैन के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। इसके बाद राज्यपाल ने 25 अगस्त को संविधान के अनुच्छेद 317(2) के तहत उन्हें निलंबित किया।
आदेश के अनुसार, अगला वरिष्ठ KPSC सदस्य आगे की व्यवस्था होने तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालेगा।
हालांकि, निलंबन को किसी व्यक्ति के खिलाफ अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। यह प्रशासनिक कार्रवाई है, जबकि आपराधिक मामलों में आरोप साबित करने का अंतिम अधिकार अदालत के पास है।
7 सितंबर को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज की
मामले में 7 सितंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने शिवशंकरप्पा साहूकार की anticipatory bail याचिका खारिज कर दी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने 400 पशु चिकित्सकों की भर्ती से जुड़े आरोपों की गंभीरता पर चिंता जताई और कहा कि ऐसी घटनाओं से परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। अदालत के समक्ष जांच एजेंसी ने अधिकारियों, परिवार के सदस्यों और बिचौलियों के बीच कथित संबंधों तथा अभ्यर्थियों से पैसे लेकर नियुक्ति दिलाने के आरोपों का उल्लेख किया।
साहूकार ने जांच के दौरान कथित रूप से यह पक्ष रखा है कि ज्ञानेंद्र कुमार के साथ उनकी बातचीत प्रशासनिक विषयों तक सीमित थी और उन्होंने बिचौलिये बसवराज कन्नाले से व्यक्तिगत मुलाकात से इनकार किया।
मामला सिर्फ दो घटनाओं तक सीमित नहीं
जांच में एक तीसरी शिकायत/FIR भी सामने आई है। इसमें आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले कुछ उम्मीदवारों की गोपनीय जानकारी कथित तौर पर बिचौलियों तक पहुंचाई गई।
एक मामले में उम्मीदवार को कथित तौर पर 80 लाख रुपये के बदले OMR शीट में बदलाव कराने की पेशकश किए जाने की बात सामने आई। इस संबंध में कथित रिकॉर्डिंग पुलिस को शिकायत के साथ दी गई थी।
इसके अलावा CID की जांच का दायरा 384 KAS Gazetted Probationers की भर्ती तक भी पहुंचा है। इस परीक्षा की 2024 की प्रारंभिक परीक्षा में दो लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों के शामिल होने की बात रिपोर्ट में सामने आई है। एक अलग शिकायत में मई 2026 के इंटरव्यू के दौरान KAS अभ्यर्थी को कथित लाभ पहुंचाने का आरोप भी जांच में है।
इस पूरे मामले का असली महत्व क्या है?
KPSC जैसी संस्था का काम हजारों उम्मीदवारों के बीच योग्यता के आधार पर सरकारी पदों के लिए चयन करना है। इसलिए पेपर लीक या OMR में कथित हेरफेर का असर केवल कुछ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहता।
यदि किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से किसी समूह को मिल जाए, तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए पूरी चयन प्रक्रिया असमान हो जाती है। इसी वजह से जांच में केवल यह देखना महत्वपूर्ण नहीं है कि पैसा किसने दिया, बल्कि यह भी पता लगाना जरूरी है कि प्रश्नपत्र किस स्तर से बाहर निकला, किसने उसे आगे पहुंचाया, किन उम्मीदवारों को फायदा मिला और चयन प्रक्रिया में बाद में कोई बदलाव हुआ या नहीं।
इसी तरह, किसी संवैधानिक भर्ती संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारी के परिवार से जुड़े उम्मीदवार की नियुक्ति में यदि दस्तावेज या हितों के टकराव से जुड़े सवाल उठते हैं, तो पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता की जांच स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल स्थिति
- KPSC चेयरमैन शिवशंकरप्पा एस. साहूकार निलंबित हैं।
- 400 Veterinary Officers भर्ती मामले में CID जांच जारी है।
- IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और बिचौलिये बसवराज कन्नाले गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
- करीब 29 अभ्यर्थियों की भूमिका जांच के दायरे में बताई गई है।
- कथित तौर पर अभ्यर्थियों से 40–80 लाख रुपये तक लेने के आरोप की जांच हो रही है।
- KPSC चेयरमैन की बेटी की भर्ती से संबंधित आय प्रमाणपत्र का मामला अलग FIR में जांच के अधीन है।
- 384 KAS पदों की भर्ती और एक KAS इंटरव्यू से जुड़ी शिकायत भी जांच के दायरे में आई है।
- कई मामलों में अंतिम दोष तय होना अभी बाकी है और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
निष्कर्ष: कर्नाटक का KPSC विवाद एक भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक से कहीं व्यापक जांच में बदल गया है। अब जांच का मुख्य सवाल यही है कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा था, सरकारी भर्ती प्रक्रिया के किन स्तरों तक उसकी पहुंच थी और किन लोगों को वास्तविक लाभ मिला। इन सवालों का अंतिम उत्तर CID की जांच और अदालतों की आगे की कार्यवाही से सामने आएगा।
