एक फोन कॉल ने उड़ाए लाखों, अब साइबर गैंग का सरगना पुलिस गिरफ्त में।
फर्जी कॉल सेंटर का मास्टरमाइंड गिरफ्तार: विदेशी नागरिकों को ठगने वाले बड़े साइबर नेटवर्क का खुलासा….
भारत में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। इसी कड़ी में हरियाणा-पंजाब क्षेत्र में सक्रिय एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर गिरोह के कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी लंबे समय से ऐसे कॉल सेंटर चला रहा था, जहां से विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिका और अन्य देशों के लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी की जाती थी। यह गिरफ्तारी जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
कैसे चलता था पूरा खेल?
जांच के अनुसार, गिरोह के सदस्य खुद को बड़ी कंपनियों, बैंक, टेक्निकल सपोर्ट, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। इसके बाद वे अलग-अलग बहाने बनाकर पीड़ितों से पैसे ऐंठते थे।
इनके सामान्य तरीके थे—
- कंप्यूटर या लैपटॉप में वायरस होने का डर दिखाना।
- बैंक खाता बंद होने या KYC अपडेट का बहाना बनाना।
- टैक्स रिफंड, रिफंड प्रोसेस या गिफ्ट मिलने का झांसा देना।
- Amazon, Microsoft, PayPal जैसी कंपनियों का फर्जी प्रतिनिधि बनना।
- लोगों से रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल करवाकर उनके सिस्टम पर नियंत्रण हासिल करना।
- क्रेडिट कार्ड या बैंकिंग जानकारी लेकर अवैध ट्रांजैक्शन करना।
पुलिस को क्या मिला?
जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े थे, कितनी रकम की ठगी हुई और पैसा किन माध्यमों से विदेश या देश के अन्य हिस्सों में भेजा गया।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी की रकम को सीधे बैंक खातों में रखने के बजाय कई मामलों में—
- क्रिप्टोकरेंसी
- हवाला नेटवर्क
- फर्जी कंपनियां
- कई बैंक खातों (Layering)
के माध्यम से घुमाकर उसका स्रोत छिपाया जाता था।
पहले भी हो चुकी हैं बड़ी कार्रवाई
यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में पंजाब और हरियाणा में कई फर्जी कॉल सेंटर पकड़े जा चुके हैं।
- 2024 में मोहाली में दो फर्जी कॉल सेंटरों पर छापेमारी कर 155 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि ये अमेरिका के नागरिकों को ठग रहे थे।
- 2026 में पंचकूला में भी एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ हुआ था, जहां 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आरोपी खुद को Amazon Customer Support बताकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी करते थे।
इन मामलों से स्पष्ट है कि फर्जी कॉल सेंटर अब संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध का हिस्सा बन चुके हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे अपराध?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं—
- इंटरनेट और डिजिटल पेमेंट का तेजी से बढ़ता उपयोग।
- VoIP कॉलिंग और इंटरनेट आधारित कॉल की आसान उपलब्धता।
- नकली वेबसाइट और फर्जी ईमेल बनाना आसान होना।
- क्रिप्टोकरेंसी के जरिए धन छिपाने की कोशिश।
- विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर अधिक रकम हासिल करना।
- सोशल इंजीनियरिंग (Psychological Manipulation) का इस्तेमाल।
आम लोग कैसे बचें?
यदि किसी अनजान व्यक्ति का फोन आए और वह—
- बैंक अधिकारी,
- पुलिस,
- इनकम टैक्स,
- Microsoft,
- Amazon,
- Google,
- या किसी सरकारी विभाग का कर्मचारी बताकर
OTP, पासवर्ड, कार्ड नंबर, CVV, स्क्रीन शेयरिंग या Remote Access ऐप इंस्टॉल करने को कहे, तो तुरंत कॉल काट दें।
साथ ही—
- किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- केवल कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन पर ही संपर्क करें।
- किसी दबाव या धमकी में पैसा ट्रांसफर न करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें।
इस मामले से क्या सीख मिलती है?
यह कार्रवाई दिखाती है कि फर्जी कॉल सेंटर अब छोटे-मोटे ठगी के अड्डे नहीं, बल्कि संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं। ये प्रशिक्षित कॉल एजेंट, फर्जी पहचान, इंटरनेट कॉलिंग, क्रिप्टोकरेंसी और हवाला जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर जांच से बचने की कोशिश करते हैं। हालांकि पुलिस, साइबर सेल और प्रवर्तन एजेंसियां लगातार ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन सबसे मजबूत सुरक्षा अभी भी जागरूक नागरिक ही हैं। यदि लोग किसी भी कॉल, ईमेल या मैसेज पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करेंगे, तो ऐसे साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत अपने आप खत्म हो जाएगी।
