Embassy Scam Alert!! Fake Embassy Call से बचिए, वरना पड़ सकते हैं मुश्किल में!
अमेरिका में भारतीयों के लिए बड़ा अलर्ट! दूतावास और पुलिस अधिकारी बनकर ठग रहे साइबर अपराधी, भारतीय वाणिज्य दूतावास ने जारी की चेतावनी…
अमेरिका के बोस्टन स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास (Consulate General of India) ने वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण साइबर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। दूतावास ने बताया है कि हाल के दिनों में ऐसे मामलों में तेजी आई है, जिनमें साइबर ठग खुद को भारतीय दूतावास, वाणिज्य दूतावास, पुलिस, एफबीआई, होमलैंड सिक्योरिटी, इमिग्रेशन अथॉरिटी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन कर रहे हैं।
इन फर्जी कॉल्स का मकसद लोगों को डराकर उनकी निजी जानकारी, बैंक विवरण, पासपोर्ट संबंधी जानकारी या सीधे पैसे ठगना है।
कैसे काम करता है यह नया साइबर फ्रॉड?
ठग पहले पीड़ित को फोन करते हैं और बेहद आत्मविश्वास के साथ खुद को सरकारी अधिकारी बताते हैं। कई मामलों में कॉलर आईडी (Caller ID) भी ऐसी दिखाई जाती है जिससे लगता है कि कॉल वास्तव में किसी सरकारी कार्यालय से आई है। इसे Caller ID Spoofing कहा जाता है।
इसके बाद पीड़ित को बताया जाता है कि—
- उनके नाम पर कोई अवैध पार्सल पकड़ा गया है।
- उनका मोबाइल नंबर किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है।
- उनके दस्तावेज़ मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या साइबर अपराध से जुड़े पाए गए हैं।
- उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।
- यदि तुरंत सहयोग नहीं किया गया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा या अमेरिका से डिपोर्ट किया जा सकता है।
डर का माहौल बनाकर अपराधी लोगों से बैंक ट्रांसफर, गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी या निजी दस्तावेज़ मांगते हैं।
दूतावास ने क्या कहा?
भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने स्पष्ट किया है कि भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास कभी भी किसी व्यक्ति को फोन करके—
- पैसे जमा करने के लिए नहीं कहता,
- बैंक खाते की जानकारी नहीं मांगता,
- OTP या पासवर्ड नहीं पूछता,
- गिरफ्तारी की धमकी नहीं देता,
- वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करता,
- किसी अपराध के नाम पर तुरंत भुगतान करने के लिए दबाव नहीं बनाता।
यदि किसी व्यक्ति को ऐसा फोन आता है, तो उसे तुरंत कॉल काटने और संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देने की सलाह दी गई है।
भारतीयों को क्यों बनाया जा रहा है निशाना?
विदेशों में रहने वाले भारतीय अक्सर वीज़ा, पासपोर्ट, OCI, इमिग्रेशन या दूतावास से जुड़े मामलों को लेकर सतर्क रहते हैं। साइबर अपराधी इसी मनोवैज्ञानिक कमजोरी का फायदा उठाते हैं।
वे जानते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को यह कह दिया जाए कि उसके दस्तावेज़ किसी अपराध में फंस गए हैं या उसका वीज़ा रद्द हो सकता है, तो वह घबरा सकता है और बिना जांच किए उनकी बात मान सकता है।
केवल बोस्टन ही नहीं, पहले भी जारी हो चुकी हैं ऐसी चेतावनियां
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय मिशन ने ऐसी चेतावनी जारी की हो। अमेरिका, कनाडा और कई अन्य देशों में स्थित भारतीय दूतावास एवं वाणिज्य दूतावास पहले भी लोगों को फर्जी कॉल, स्पूफिंग और सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने वाले गिरोहों से सावधान रहने की सलाह दे चुके हैं। इन मामलों में अपराधी लगातार नई तकनीकों और नकली पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं।
डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड से मिलती-जुलती है यह ठगी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका भारत में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” फ्रॉड जैसा ही है।
इसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, ED, कस्टम, RBI या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर घंटों वीडियो कॉल पर रखते हैं और पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी गंभीर अपराध में फंस चुका है। इसके बाद उससे बैंक खाते खाली करवाए जाते हैं या गोपनीय जानकारी हासिल कर ली जाती है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे मामलों में करोड़ों रुपये की ठगी सामने आ चुकी है।
अगर ऐसा फोन आए तो क्या करें?
यदि आपको किसी दूतावास, पुलिस या सरकारी अधिकारी के नाम पर संदिग्ध कॉल मिले, तो इन बातों का पालन करें—
- घबराएं नहीं।
- किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
- OTP, बैंक विवरण, पासपोर्ट नंबर या आधार जैसी जानकारी न दें।
- किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें।
- कॉल पर भेजे गए लिंक या QR कोड पर क्लिक न करें।
- यदि शक हो तो संबंधित दूतावास या सरकारी एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक फोन नंबर से स्वयं संपर्क करें।
- घटना की सूचना स्थानीय पुलिस और साइबर अपराध हेल्पलाइन को दें।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के साइबर अपराधी केवल तकनीक का नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव (Social Engineering) का इस्तेमाल करते हैं। वे डर, जल्दबाजी और सरकारी कार्रवाई का भय पैदा करके लोगों से गलत निर्णय करवाते हैं।
याद रखें—
कोई भी असली सरकारी एजेंसी फोन पर आपको धमकी देकर पैसे नहीं मांगती।
यदि कोई कॉल आपको डराकर तुरंत कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर रही है, तो उसके फर्जी होने की संभावना बहुत अधिक है।
निष्कर्ष
बोस्टन स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास की यह चेतावनी केवल अमेरिका में रहने वाले भारतीयों के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के भारतीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है। साइबर अपराधी अब सरकारी संस्थाओं की पहचान का दुरुपयोग कर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, सतर्कता और आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि ही इस तरह की ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
