“32nd Avenue Group पर ED की बड़ी छापेमारी ”….
500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में 32nd Avenue Group पर ED की बड़ी कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े वित्तीय घोटाले की जांच के तहत 32nd Avenue Group से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला लगभग 500 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग और निवेश घोटाले (Scam) की जांच के सिलसिले में ED ने दिल्ली-NCR, गोवा और मुंबई समेत 7 ठिकानों पर छापेमारी की।
क्या है पूरा मामला? (कैसे ठगे गए लोग)
जांच में सामने आया है कि 32nd एवेन्यू ग्रुप के प्रमोटर अनुभव शर्मा और ध्रुव शर्मा ने आम निवेशकों को लुभाने के लिए एक सुनियोजित ‘पोंजी स्कीम’ (Ponzi Scheme) चलाई थी, जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ निवेशकों और कंपनियों से बड़ी रकम जुटाने के नाम पर लोगों को ऊँचे रिटर्न का लालच दिया गया। आरोप है कि:
- निवेशकों से पैसा लिया गया,
- लेकिन उस पैसे का इस्तेमाल तय प्रोजेक्ट्स में नहीं किया गया,
- बल्कि उसे इधर-उधर घुमाकर (मनी लॉन्ड्रिंग) किया गया।
- एक ही दुकान कई लोगों को बेची: आरोप है कि प्रमोटरों ने प्रोजेक्ट के नक्शे में हेरफेर करके एक ही वर्चुअल स्पेस (दुकान या ऑफिस) को कई अलग-अलग निवेशकों को बेच दिया।
- झूठे वादे: निवेशकों को 30 साल तक पक्के किराए (Assured Rental) और बाद में संपत्ति वापस खरीदने (Buyback) का लालच दिया गया था।
- धोखाधड़ी: कुछ महीनों तक किराया देने के बाद प्रमोटरों ने भुगतान बंद कर दिया। जब निवेशकों ने अपनी जमा पूंजी मांगी, तो उन्हें टाल दिया गया।
ED को शक है कि यह एक तरह की निवेश धोखाधड़ी/पोंजी जैसे मॉडल पर आधारित स्कीम हो सकती है, जिसमें नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता है।
छापेमारी में क्या मिला?
छापों के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण चीजें जब्त कीं, जिनमें शामिल हैं:
- ED की टीम ने इस तलाशी अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में कैश 1.05 करोड़ रुपये नकद और लगभग 1.5 करोड़ रुपये के सोने के गहने बरामद किए हैं।
- इसके अलावा कई बैंक खातों और लॉकरों को भी सील कर दिया गया है।
- टीम को भारी मात्रा में संपत्ति के दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी मिले हैं।
ये सभी सबूत अब जांच का हिस्सा बनाए गए हैं।
निवेशकों के पैसे से ऐशो-आराम की जिंदगी…
ED की जांच के अनुसार, निवेशकों से ठगे गए 500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को प्रमोटरों ने निजी विलासिता पर खर्च किया।
- प्रमोटरों ने गुरुग्राम के आलीशान अपार्टमेंट्स में घर खरीदे।
- गोवा के तट पर एक महंगी याच (Yacht – लग्जरी नाव) और कई लग्जरी विला खरीदे।
- फंड को कई शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के जरिए इधर-उधर घुमाया गया ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।
ED क्यों कर रही है जांच?
यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत दर्ज किया गया है। आम तौर पर ED तब जांच शुरू करती है जब:
- पुलिस या अन्य एजेंसी कोई धोखाधड़ी/आर्थिक अपराध का केस दर्ज करती है,
- और उसमें काले धन या अवैध लेन-देन का शक होता है।
इस केस में भी पहले से दर्ज शिकायतों और एफआईआर के आधार पर ED ने कार्रवाई शुरू की।
निवेशकों का आरोप
अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार:
- कई निवेशकों ने शिकायत की है कि उन्हें प्रोजेक्ट्स में निवेश के बदले मुनाफे का वादा किया गया था।
- लेकिन समय पर पैसा या रिटर्न नहीं मिला।
- कुछ मामलों में निवेशकों ने दावा किया कि उन्हें गलत जानकारी देकर निवेश कराया गया।
अब तक क्या कार्रवाई हुई?
इस मामले में हरियाणा पुलिस और दिल्ली पुलिस ने पहले ही कई FIR दर्ज की थीं।
- ध्रुव शर्मा और शीरीन शर्मा को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था और वे फिलहाल जेल (न्यायिक हिरासत) में हैं।
- मुख्य आरोपी अनुभव शर्मा और ममता शर्मा फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है।
आगे क्या होगा?
अब ED:
- जब्त दस्तावेजों की जांच करेगी,
- पैसों के लेन-देन की पूरी ट्रेल खंगालेगी,
- और जरूरत पड़ने पर आरोपियों से पूछताछ करेगी।
अगर आरोप साबित होते हैं, तो संबंधित लोगों पर मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
आम लोगों के लिए समझने वाली बात
आम जनता के लिए सीख:
यह मामला याद दिलाता है कि किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले उसके कागजात और ‘एश्योर्ड रिटर्न’ जैसे लुभावने वादों की पूरी पड़ताल जरूर करें। अक्सर ऊंचे मुनाफे का लालच बड़े धोखे की वजह बन जाता है।
इस मामले से एक बड़ी सीख मिलती है:
- बहुत ज्यादा रिटर्न का वादा करने वाली योजनाओं से सावधान रहें।
- निवेश से पहले कंपनी और प्रोजेक्ट की सही जांच जरूर करें।
- बिना भरोसे के किसी स्कीम में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।
