Crypto में पैसा लगाने से पहले सावधान! नकली Profit दिखाकर आपका पूरा बैंक बैलेंस खाली किया जा सकता है।
क्रिप्टो में बड़ा मुनाफा दिखाकर फंसाया, 28 साल के टेक्नीशियन से ₹20 लाख की ठगी……
विशाखापत्तनम में क्रिप्टो निवेश के नाम पर ऑनलाइन ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पहले पीड़ित को थोड़ा मुनाफा दिखाया गया और फिर धीरे-धीरे उससे लाखों रुपये निवेश करा लिए गए।
विशाखापत्तनम के 28 वर्षीय एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल को एक महिला ने WhatsApp के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का ऑफर दिया। महिला ने अपना नाम ‘खुशी’ बताया और दावा किया कि वह Thornston and Ross में Finance Manager के तौर पर काम करती है।
उसने पीड़ित को Netobit.com नाम के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बारे में बताया और वहां क्रिप्टो ट्रेडिंग से तेजी से पैसा कमाने का दावा किया। भरोसा पैदा करने के लिए कथित तौर पर ट्रेडिंग के स्क्रीनशॉट और मुनाफे के आंकड़े भी दिखाए गए।
शुरुआत सिर्फ ₹60 हजार से हुई
अगस्त 2026 में पीड़ित ने पहली बार करीब ₹60,000 लगाए। कुछ समय बाद प्लेटफॉर्म पर उसे लगभग ₹4,000 का मुनाफा दिखाई दिया।
यही इस पूरे फ्रॉड का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था।
पीड़ित को लगा कि प्लेटफॉर्म वास्तव में काम कर रहा है और वहां निवेश करके पैसा कमाया जा सकता है। इसके बाद उसे लगातार ट्रेडिंग सिग्नल और बढ़ते हुए डिजिटल वॉलेट बैलेंस दिखाई देने लगे।
धीरे-धीरे भरोसा बढ़ा और निवेश की रकम भी बढ़ती गई।
इसके बाद पीड़ित ने ₹5-₹5 लाख की चार किस्तों में कुल ₹20 लाख ट्रांसफर कर दिए।
यह रकम सामान्य बैंक ट्रांसफर की तरह सीधे किसी भारतीय बैंक खाते में नहीं गई। रिपोर्ट के मुताबिक, OnRamp एप्लिकेशन के जरिए रुपये को USDT यानी Tether में बदला गया। इसके बाद रकम Trust Wallet और फिर कथित ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म द्वारा दिए गए क्रिप्टो वॉलेट एड्रेस पर भेजी गई।
स्क्रीन पर ₹58 लाख देखकर बढ़ा भरोसा
कुछ समय बाद Netobit प्लेटफॉर्म पर पीड़ित के निवेश की वैल्यू लगभग ₹58 लाख दिखाई जाने लगी।
यानी ₹20 लाख के निवेश पर करीब ₹38 लाख का कथित फायदा।
लेकिन असली खेल यहीं से शुरू हुआ।
जब पीड़ित ने अपना पैसा निकालने की कोशिश की तो प्लेटफॉर्म ने कहा कि रकम निकालने के लिए पहले 15% Processing Fee देनी होगी।
यह शुल्क करीब ₹9 लाख बैठ रहा था।
पीड़ित से कहा गया कि यदि वह यह पैसा जमा कर देता है तो उसका पूरा बैलेंस और कथित मुनाफा उसे वापस मिल जाएगा।
यहीं उसे शक हुआ।
उसे समझ आया कि जिस खाते में ₹58 लाख दिखाई दे रहे थे, संभव है कि वह वास्तविक पैसा था ही नहीं। वह सिर्फ एक फर्जी डिजिटल बैलेंस हो सकता था, जिसका इस्तेमाल उससे और पैसे ऐंठने के लिए किया जा रहा था।
यह ठगी कैसे काम करती है?
इस मामले को केवल “क्रिप्टो का नुकसान” समझना सही नहीं होगा।
यह असल में Social Engineering + Fake Investment Platform का मॉडल दिखाई देता है।
इस तरह के फ्रॉड में अपराधी आमतौर पर पहले व्यक्ति को निवेश के लिए तैयार करते हैं। इसके बाद छोटी रकम पर मुनाफा दिखाकर उसका भरोसा जीतते हैं। फिर पीड़ित को ज्यादा पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
सबसे खतरनाक हिस्सा यह है कि मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने वाला Profit हमेशा असली पैसा नहीं होता।
अगर कोई प्लेटफॉर्म आपको ₹10 लाख, ₹50 लाख या ₹1 करोड़ का बैलेंस दिखा रहा है, लेकिन उसे बैंक या आपके वैध वॉलेट में निकालने नहीं दे रहा, तो स्क्रीन पर दिखने वाली रकम का कोई वास्तविक मूल्य नहीं हो सकता।
₹20 लाख जाने के बाद भी ठगी रुकती नहीं
इस मामले में एक और बड़ा संकेत था—Withdrawal के समय अचानक Processing Fee की मांग।
यही पैटर्न कई ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश घोटालों में दिखाई देता है। पहले फर्जी मुनाफा दिखाया जाता है और पैसा निकालने के समय Tax, Processing Fee, Brokerage, Verification Charge या Withdrawal Fee के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं।
हाल ही में पुणे में भी एक टेक प्रोफेशनल को फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये का बैलेंस दिखाया गया और रकम निकालने के लिए भारी शुल्क मांगा गया था।
इसलिए “पहले पैसा जमा करो, तभी अपना मुनाफा निकाल पाओगे” निवेश फ्रॉड का एक बड़ा Red Flag है।
SEBI की चेतावनी भी इसी खतरे की ओर इशारा करती है
SEBI लगातार निवेशकों को ऐसे ऑनलाइन निवेश प्रस्तावों से सावधान रहने को कहता रहा है, जिनमें Guaranteed Return, Fixed Profit या असामान्य रूप से ज्यादा रिटर्न का दावा किया जाता है।
SEBI के अनुसार निवेश से पहले यह जांचना जरूरी है कि जिस संस्था या व्यक्ति के जरिए निवेश किया जा रहा है, वह संबंधित नियामक के पास पंजीकृत है या नहीं।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है:
Crypto और regulated securities investment एक ही चीज नहीं हैं।
किसी व्यक्ति या वेबसाइट का खुद को “Crypto Expert”, “Investment Manager” या “Finance Professional” बताना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह भरोसेमंद है।
विशाखापत्तनम में पुलिस ने मामला दर्ज किया
पीड़ित को ठगी का एहसास होने के बाद उसने National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत की। इसके बाद विशाखापत्तनम साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज किया।
पुलिस ने कथित आरोपियों के खिलाफ Cheating, Identity Theft और Communication Device के जरिए Personation से संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की है। मामले की जांच जारी है।
इस घटना से आम आदमी क्या सीखे?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सबक “पहले छोटा फायदा, फिर बड़ा निवेश” वाला जाल है।
अगर कोई अनजान व्यक्ति WhatsApp पर संपर्क करके कहता है—
- कम पैसे से क्रिप्टो शुरू करें
- रोजाना निश्चित मुनाफा मिलेगा
- हमारे Expert Trading Signals फॉलो करें
- ऐप में Profit बढ़ता हुआ दिखाई देगा
- ज्यादा पैसा लगाइए, ज्यादा Return मिलेगा
- पैसा निकालने के लिए पहले Fee या Tax जमा करें
तो एक कदम पीछे हटना चाहिए।
आंध्र प्रदेश पुलिस के साइबर जागरूकता पोर्टल पर भी लोगों को अनजान संदेशों और लिंक से बचने, अनधिकृत ऐप या वेबसाइट पर बैंक ट्रांजैक्शन न करने और कम निवेश पर ज्यादा रिटर्न का वादा करने वाले अनरजिस्टर्ड निवेश प्लेटफॉर्म पर भरोसा न करने की सलाह दी गई है।
पैसा चला गया तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो देरी बिल्कुल न करें।
भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार वित्तीय साइबर फ्रॉड की तत्काल सूचना 1930 पर दी जा सकती है। ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज की जा सकती है।
जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी जल्दी संबंधित लेनदेन को रोकने या रकम को फ्रीज कराने की संभावना बन सकती है।
सबसे बड़ा सवाल
इस मामले में सवाल सिर्फ ₹20 लाख की ठगी का नहीं है।
सवाल यह है कि एक पढ़े-लिखे टेक प्रोफेशनल को भी फर्जी प्रोफिट स्क्रीन, WhatsApp पर बनी पहचान और क्रिप्टो वॉलेट के जरिए बनाई गई पूरी व्यवस्था असली क्यों लगी?
यही आज के ऑनलाइन निवेश फ्रॉड की सबसे खतरनाक सच्चाई है—
अब ठग सिर्फ पैसा नहीं मांगते। वे पहले भरोसा बनाते हैं, फिर स्क्रीन पर मुनाफा दिखाते हैं और आखिर में आपकी अपनी लालच और भरोसे को आपके खिलाफ इस्तेमाल करते हैं।
