फर्जी GST बिलों से करोड़ों की टैक्स चोरी, जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क।
असम में ₹50 करोड़ का फर्जी GST क्रेडिट घोटाला: कोलकाता से दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 15 फर्जी कंपनियों का खुलासा….
असम में फर्जी GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले की जांच कर रही राज्य GST विभाग और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने संयुक्त अभियान चलाकर कोलकाता से दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार यह घोटाला करीब ₹50 करोड़ का है और इसमें कई राज्यों तक फैला एक संगठित नेटवर्क शामिल होने की आशंका है।
क्या है पूरा मामला?
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने कई फर्जी या केवल कागजों पर मौजूद कंपनियां (Shell Companies) बनाईं। इन कंपनियों के नाम पर बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की खरीद-बिक्री किए नकली GST बिल तैयार किए गए। इन फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत लाभ लिया गया और अन्य कंपनियों को भी इसका फायदा पहुंचाया गया।
प्रारंभिक जांच में लगभग 15 संदिग्ध GST फर्मों का पता चला है, जिनका इस्तेमाल फर्जी बिलिंग और टैक्स क्रेडिट पास करने के लिए किया गया। जांच अभी जारी है और आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई गई है।
कोलकाता से कैसे हुई गिरफ्तारी?
असम GST विभाग और STF ने कई दिनों तक तकनीकी निगरानी, दस्तावेजों की जांच और खुफिया सूचनाओं के आधार पर अभियान चलाया। इसके बाद कोलकाता में छापेमारी कर दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। दोनों को असम लाकर पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
फर्जी GST ITC घोटाला होता कैसे है?
इस तरह के घोटालों में अपराधी:
- फर्जी कंपनियां या शेल फर्म बनाते हैं।
- बिना वास्तविक व्यापार के नकली GST इनवॉइस जारी करते हैं।
- इन फर्जी बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करते हैं।
- कई कंपनियों के बीच कागजी लेनदेन दिखाकर टैक्स चोरी करते हैं।
- सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाते हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
असम में इससे पहले भी फर्जी ITC रैकेट के खिलाफ कार्रवाई हुई है। हाल के महीनों में जांच एजेंसियों ने करोड़ों रुपये के नकली GST क्रेडिट से जुड़े कई मामलों का खुलासा किया था। एक अन्य मामले में लगभग ₹47.71 करोड़ की टैक्स देनदारी और फर्जी ITC नेटवर्क का पता चला था, जिसमें कई राज्यों तक फैला गिरोह सक्रिय था।
सरकार और जांच एजेंसियां क्या कर रही हैं?
GST विभाग, राज्य पुलिस और विभिन्न जांच एजेंसियां डेटा एनालिटिक्स, ई-वे बिल, बैंक खातों और GST रिटर्न की डिजिटल जांच के जरिए ऐसे नेटवर्क की पहचान कर रही हैं। संदिग्ध कंपनियों के GST पंजीकरण रद्द किए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ GST कानून तथा भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।
आम लोगों और व्यापारियों के लिए सीख
- केवल वास्तविक और सत्यापित सप्लायर से ही खरीदारी करें।
- किसी भी फर्म का GST नंबर और रिटर्न रिकॉर्ड जांच लें।
- केवल बिल मिलने से ITC सुरक्षित नहीं हो जाता; लेनदेन वास्तविक होना भी जरूरी है।
- संदिग्ध या बेहद सस्ते सौदों से बचें।
- समय-समय पर GST पोर्टल पर अपने ITC और लेजर का मिलान करें।
निष्कर्ष
असम का यह मामला दिखाता है कि फर्जी GST बिलिंग और नकली इनपुट टैक्स क्रेडिट का नेटवर्क अब कई राज्यों में फैला हुआ है। कोलकाता से हुई इन गिरफ्तारियों को जांच एजेंसियां बड़ी सफलता मान रही हैं, लेकिन जांच अभी जारी है। यदि पूरे नेटवर्क का खुलासा होता है, तो इस घोटाले में शामिल कई और लोगों तथा कंपनियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
