GST सिस्टम में 4.17 करोड़ का घोटाला!!!
₹4.17 करोड़ का GST घोटाला: फर्जी कंपनी बनाकर सरकार को लगाया करोड़ों का चूना, EOW ने दो आरोपियों को दबोचा…
उत्तर प्रदेश की आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने एक बड़े GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों ने फर्जी कंपनी बनाकर बिना किसी वास्तविक कारोबार के ₹4.17 करोड़ का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल किया, जिससे सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।
क्या है पूरा मामला?
EOW के अनुसार, वर्ष 2024 में आरोपियों ने मुरादाबाद में M/s Raghav Enterprises के नाम से एक फर्म का GST पंजीकरण कराया। जांच में सामने आया कि यह फर्म केवल कागजों पर मौजूद थी और इसका कोई वास्तविक व्यापार नहीं था।
इसके बाद आरोपियों ने फर्जी बिल (Fake Invoices), नकली दस्तावेज और GST रिटर्न का इस्तेमाल कर ₹4.17 करोड़ का फर्जी Input Tax Credit (ITC) प्राप्त कर लिया। इस मामले में पहले मुरादाबाद के मुगलपुरा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसकी जांच बाद में EOW मेरठ सेक्टर को सौंपी गई। हाल ही में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
आरोपी कैसे करते थे धोखाधड़ी?
प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह की कार्यप्रणाली कुछ इस प्रकार थी—
- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर GST पंजीकरण कराया।
- वास्तविक व्यापार किए बिना केवल कागजी लेन-देन दिखाया।
- नकली टैक्स इनवॉइस (Fake GST Bills) तैयार किए।
- इन्हीं फर्जी बिलों के आधार पर Input Tax Credit (ITC) का गलत लाभ लिया।
- सरकार के टैक्स राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया।
Input Tax Credit (ITC) क्या होता है?
GST व्यवस्था में यदि कोई व्यापारी सामान खरीदते समय GST देता है, तो वही टैक्स आगे बेचते समय देय GST से समायोजित (Adjust) किया जा सकता है। इसे Input Tax Credit (ITC) कहा जाता है।
लेकिन जब कोई व्यक्ति बिना वास्तविक खरीद-बिक्री के केवल फर्जी बिल बनाकर ITC का दावा करता है, तो यह गंभीर आर्थिक अपराध और टैक्स चोरी माना जाता है।
देशभर में बढ़ रहे हैं फर्जी GST रैकेट
यह मामला कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में ऐसे कई संगठित नेटवर्क सामने आए हैं जो शेल कंपनियां बनाकर फर्जी बिल जारी करते हैं और करोड़ों रुपये का ITC पास करते हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
- वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्रीय और राज्य GST अधिकारियों ने 25,000 से अधिक फर्जी कंपनियों का पता लगाया।
- इन कंपनियों के माध्यम से ₹61,000 करोड़ से अधिक के फर्जी ITC का नेटवर्क उजागर हुआ।
- पिछले पांच वर्षों में GST चोरी और फर्जी ITC से जुड़े मामलों में ₹7 लाख करोड़ से अधिक की कर चोरी का पता लगाया गया, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी फर्जी ITC की रही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में कई बड़े GST घोटाले सामने आए हैं। जांच एजेंसियों ने ऐसे गिरोह पकड़े हैं जो गरीब लोगों के आधार, पैन और बैंक दस्तावेज लेकर उनके नाम पर फर्जी कंपनियां बनाते थे और फिर नकली GST बिल जारी करके ITC बेचते थे। कई मामलों में असली कारोबारी भी कम कमीशन देकर ऐसे फर्जी ITC का लाभ लेते पाए गए हैं।
सरकार कैसे रोक रही है ऐसे फ्रॉड?
GST विभाग और जांच एजेंसियां अब कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही हैं—
- AI आधारित जोखिम विश्लेषण (Risk Analysis)
- फर्जी GSTIN की पहचान
- ई-वे बिल और बैंक लेन-देन का मिलान
- डेटा एनालिटिक्स से संदिग्ध कंपनियों की पहचान
- फर्जी इनवॉइस नेटवर्क की डिजिटल ट्रैकिंग
- राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच डेटा साझा करना
आम व्यापारियों के लिए जरूरी सलाह
- केवल सत्यापित GST पंजीकृत विक्रेताओं से ही खरीदारी करें।
- किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना आधार, पैन, बैंक पासबुक या डिजिटल सिग्नेचर उपलब्ध न कराएं।
- GST पोर्टल पर समय-समय पर अपना ITC और लेन-देन जांचते रहें।
- यदि आपके नाम पर बिना जानकारी के कोई GST फर्म पंजीकृत हो जाए तो तुरंत GST विभाग और पुलिस को सूचना दें।
निष्कर्ष
₹4.17 करोड़ का यह मामला दिखाता है कि फर्जी GST कंपनियां केवल सरकार को ही नहीं बल्कि पूरे कर तंत्र को नुकसान पहुंचाती हैं। EOW की कार्रवाई से इस नेटवर्क के दो प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में जांच के दौरान इस फर्जी ITC नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।
