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सावधान!!!आपका Bank account भी बन सकता है साइबर जाल का हिस्सा।|

aajtaksafe@gmail.com July 13, 2026
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₹14.68 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा: बाराबंकी पुलिस ने पकड़ा ‘म्यूल अकाउंट’ गैंग, ऐसे चलता था करोड़ों का खेल

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने देश के कई राज्यों में फैले साइबर ठगों की मदद से लगभग 14.68 करोड़ रुपये की अवैध रकम बैंक खातों के जरिए इधर-उधर पहुंचाई। पुलिस के अनुसार यह केवल एक स्थानीय गिरोह नहीं था, बल्कि कई राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से जुड़ा हुआ नेटवर्क था।

क्या है पूरा मामला?

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि कुछ लोग कमीशन के बदले अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा रहे थे। ऐसे खातों को “म्यूल अकाउंट (Money Mule Account)” कहा जाता है।

साइबर ठग ऑनलाइन निवेश, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी KYC, नौकरी, लोन, OTP और UPI फ्रॉड जैसी घटनाओं से लोगों से ठगे गए पैसे को सबसे पहले इन खातों में भेजते थे। इसके बाद रकम को कई अलग-अलग खातों में तेजी से ट्रांसफर किया जाता था ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।

कैसे काम करता था नेटवर्क?

पुलिस जांच के अनुसार गिरोह पहले ऐसे लोगों की पहचान करता था जिन्हें पैसों की जरूरत होती थी। उन्हें कुछ हजार रुपये या कमीशन का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जाता था।

इसके बाद—

  • ठगी की रकम म्यूल अकाउंट में जमा होती थी।
  • कुछ ही मिनटों में रकम दूसरे और तीसरे खातों में भेज दी जाती थी।
  • कई बार पैसा नकद निकाल लिया जाता था या क्रिप्टोकरेंसी तथा अन्य डिजिटल माध्यमों में बदल दिया जाता था।
  • इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पैसे का वास्तविक स्रोत छिपाना होता था।

इसी वजह से जांच एजेंसियों को असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है।

पुलिस को क्या मिला?

डिजिटल ट्रांजैक्शन, मोबाइल नंबर, बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क की पहचान की। जांच में करोड़ों रुपये के लेन-देन का पता चला, जो विभिन्न राज्यों के बैंक खातों के जरिए संचालित हो रहे थे।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह के तार किन बड़े साइबर फ्रॉड मॉड्यूल और अंतरराज्यीय अपराधियों से जुड़े हैं। अधिकारियों का मानना है कि आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

‘मनी म्यूल’ क्यों बन रहा है सबसे बड़ा खतरा?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आज अधिकांश ऑनलाइन ठगी में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका म्यूल अकाउंट निभाते हैं। बिना ऐसे खातों के अपराधी चोरी की रकम को छिपा नहीं सकते।

भारतीय साइबर एजेंसियों के अनुसार देशभर में हजारों बैंक खातों का इस्तेमाल केवल साइबर अपराधों में धन को इधर-उधर भेजने के लिए किया जा रहा है। यही कारण है कि पुलिस अब केवल ठगों को ही नहीं बल्कि ऐसे खाते उपलब्ध कराने वालों पर भी सख्त कार्रवाई कर रही है।

देशभर में बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं

हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात और कर्नाटक सहित कई राज्यों में म्यूल अकाउंट नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

  • उत्तर प्रदेश पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर हजारों संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है।
  • मध्य प्रदेश की एक बड़ी जांच में हजारों म्यूल खातों के जरिए करोड़ों रुपये की लेयरिंग का खुलासा हुआ।
  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) लगातार बैंकों और राज्यों के साथ मिलकर ऐसे खातों की निगरानी कर रहा है।
  • कई मामलों में देखा गया है कि साइबर ठग गरीब, बेरोजगार या छात्रों को आसान कमाई का लालच देकर उनका बैंक खाता इस्तेमाल करते हैं।

यदि आपने भी किसी को अपना बैंक खाता दिया है तो सावधान

कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग किसी दूसरे को साइबर अपराध में उपयोग करने देता है, तो उसे भी जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए—

  • अपना बैंक खाता कभी किराए पर न दें।
  • किसी अनजान व्यक्ति के लिए बैंक खाता न खुलवाएं।
  • एटीएम कार्ड, OTP, UPI PIN या नेट बैंकिंग पासवर्ड किसी से साझा न करें।
  • “घर बैठे कमाई”, “खाता चाहिए”, “कमीशन मिलेगा” जैसे संदेशों से सावधान रहें।
  • किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

निष्कर्ष

बाराबंकी का यह मामला केवल 14.68 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा नहीं है, बल्कि यह बताता है कि साइबर अपराध अब संगठित आर्थिक अपराध का रूप ले चुके हैं। आज अपराधी सीधे लोगों से पैसे चुराने के साथ-साथ बैंक खातों का पूरा नेटवर्क तैयार कर रहे हैं ताकि चोरी का पैसा आसानी से गायब किया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आम लोग अपने बैंक खाते और वित्तीय जानकारी को सुरक्षित रखें तथा किसी भी लालच में आकर अपना खाता किसी दूसरे को न दें, तो ऐसे साइबर नेटवर्क को काफी हद तक कमजोर किया जा सकता है।

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