फर्जी Adoption एजेंटों से सावधान, भरोसे की कीमत महिला ने लाखों में चुकाई।
बच्चा गोद दिलाने के नाम पर ₹13.7 लाख की ठगी: दिल्ली पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा, जानिए पूरा मामला…..
दिल्ली में बच्चा गोद लेने की चाह रखने वाली एक महिला के साथ बेहद भावनात्मक और सुनियोजित साइबर ठगी का मामला सामने आया है। महिला से कथित तौर पर ₹13.7 लाख की ठगी की गई। मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बरेली से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी खुद को बच्चा गोद दिलाने वाली संस्था और NGO से जुड़ा बताकर लोगों का भरोसा जीतते थे और फिर अलग-अलग बहानों से पैसे ऐंठते थे।
कैसे हुई ठगी?
पीड़िता इंटरनेट पर कानूनी तरीके से बच्चा गोद लेने की जानकारी तलाश रही थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात ऐसे लोगों से हुई जिन्होंने दावा किया कि वे जल्दी और आसान तरीके से बच्चा गोद दिला सकते हैं।
विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने खुद को NGO और गोद लेने की प्रक्रिया से जुड़े अधिकृत व्यक्ति बताया। इसके बाद उन्होंने महिला से अलग-अलग नामों पर पैसे मांगना शुरू कर दिया, जैसे—
- रजिस्ट्रेशन फीस
- फाइल प्रोसेसिंग चार्ज
- मेडिकल और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन फीस
- ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी चार्ज
- सुरक्षा जमा (Security Deposit)
महिला को भरोसा दिलाने के लिए कथित तौर पर फर्जी रसीदें और दस्तावेज भी भेजे गए। धीरे-धीरे महिला ने कुल लगभग ₹13.7 लाख आरोपियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब बच्चा नहीं मिला और आरोपी बहाने बनाने लगे, तब महिला को ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने कैसे पकड़ा?
दिल्ली पुलिस की जांच में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई गई। जांच के बाद बरेली से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक फिजियोथेरेपिस्ट भी शामिल बताया गया है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस गिरोह ने देश के अन्य राज्यों में भी कितने लोगों को इसी तरह निशाना बनाया।
यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, भावनाओं का शोषण
जांच एजेंसियों का मानना है कि ऐसे गिरोह उन दंपतियों और परिवारों को निशाना बनाते हैं जो वर्षों से बच्चा गोद लेने का इंतजार कर रहे होते हैं। उनकी भावनात्मक मजबूरी का फायदा उठाकर अपराधी जल्दी गोद दिलाने का झूठा वादा करते हैं और लाखों रुपये वसूल लेते हैं।
कानूनी रूप से बच्चा गोद लेने का सही तरीका
भारत में बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया कानून के तहत निर्धारित है। सामान्यतः गोद लेने की प्रक्रिया अधिकृत संस्थाओं और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से होती है। किसी भी व्यक्ति, एजेंट या सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए सीधे पैसे देकर बच्चा गोद लेने का दावा संदिग्ध माना जाना चाहिए।
कैसे बचें ऐसी ठगी से?
- सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप या फेसबुक पर बच्चा गोद दिलाने वाले विज्ञापनों पर भरोसा न करें।
- किसी निजी व्यक्ति के बैंक खाते में “रजिस्ट्रेशन” या “बुकिंग” के नाम पर पैसे न भेजें।
- केवल अधिकृत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही गोद लेने की कार्रवाई करें।
- किसी भी संस्था की वैधता और दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से जांच करें।
- अगर कोई जल्दी बच्चा दिलाने या नियमों को दरकिनार करने का दावा करे, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानें।
- ठगी का संदेह होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
निष्कर्ष
यह मामला दिखाता है कि साइबर ठग अब केवल बैंक, KYC या OTP तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों की सबसे संवेदनशील भावनाओं—माता-पिता बनने की इच्छा—को भी निशाना बना रहे हैं। इसलिए बच्चा गोद लेने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में केवल कानूनी और अधिकृत माध्यमों पर ही भरोसा करें। किसी भी शॉर्टकट का लालच लाखों रुपये के नुकसान और कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
