₹2,676 करोड़ का कथित निवेश घोटाला! Nexa Evergreen के निदेशक समेत 23 आरोपियों के खिलाफ ED की चार्जशीट!!!!!
₹2,676 करोड़ के निवेश घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, Nexa Evergreen के निदेशक समेत 23 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट……
जयपुर | 11 अक्टूबर 2026
राजस्थान से सामने आए कथित ₹2,676 करोड़ के निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। एजेंसी ने Nexa Evergreen Group के निदेशक सुभाष बिजारनिया, 12 कंपनियों और 10 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। मामले में अब तक ED ने करीब ₹34.91 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच करने की कार्रवाई भी की है। यह मामला गुजरात के धोलेरा में जमीन और प्लॉट दिलाने तथा निवेश पर आकर्षक रिटर्न देने के कथित वादों से जुड़ा है।
ED की कार्रवाई का उद्देश्य कथित धोखाधड़ी से जुटाए गए धन के स्रोत, उसके इस्तेमाल और उससे खरीदी गई संपत्तियों का पता लगाना है। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
निवेशकों को कैसे लुभाया गया?
ED की ओर से जून 2025 में जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, राजस्थान पुलिस की कई FIR और चार्जशीट के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, रणवीर बिजारनिया, सुभाष बिजारनिया और उनके सहयोगियों पर बड़ी संख्या में निवेशकों से करीब ₹2,676 करोड़ जुटाने का आरोप है।
आरोप है कि निवेशकों को बताया गया कि उनकी रकम गुजरात के धोलेरा में जमीन और प्लॉट विकसित करने वाली परियोजनाओं में लगाई जाएगी। निवेश के बदले प्लॉट या कम समय में अच्छा रिटर्न देने का वादा किया गया। निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए धोलेरा की विभिन्न परियोजनाओं की तस्वीरें भी दिखाई गईं। ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी परियोजना की तस्वीर दिखाना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि निवेशकों की रकम वास्तव में उसी परियोजना में लगाई गई थी।
3 प्रतिशत साप्ताहिक रिटर्न का कथित वादा
रिपोर्ट में ED की जांच के हवाले से बताया गया कि निवेशकों को 60 सप्ताह तक हर सप्ताह 3 प्रतिशत रिटर्न देने या प्लॉट आवंटित करने का वादा किया गया था। इसके अलावा, नए निवेशक जोड़ने पर कमीशन और निवेश के कुछ स्तर हासिल करने पर लैपटॉप, मोटरसाइकिल तथा कार जैसे इनाम देने की योजनाएं भी कथित तौर पर चलाई गईं।
ऐसी व्यवस्था में लोगों को केवल अपना पैसा लगाने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने परिचितों को भी योजना से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इस मामले में ED का आरोप है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल और उसके लेन-देन को छिपाने के लिए कई कंपनियों, साझेदारी फर्मों और अन्य कारोबारी संस्थाओं का इस्तेमाल किया गया।
शुरुआत में भुगतान, फिर अचानक बंद
ED की जून 2025 की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, कुछ निवेशकों को शुरुआती दौर में रिटर्न मिला था। इससे उनका भरोसा बढ़ा और उन्होंने कथित तौर पर अधिक रकम निवेश की। कई लोगों ने अपनी बचत, कर्ज और परिवार से मिली रकम तक लगा दी।
लेकिन एजेंसी के अनुसार, जनवरी 2023 में भुगतान अचानक बंद हो गए। निवेशकों को बाद में पता चला कि कंपनी के कार्यालय बंद हो चुके थे और संबंधित संचालक वहां से जा चुके थे। इसके बाद कई शिकायतें और FIR दर्ज हुईं।
यही इस मामले का सबसे गंभीर पहलू है। शुरुआती भुगतान किसी निवेश योजना के सुरक्षित या वैध होने की गारंटी नहीं होते। यदि किसी योजना में पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए लगातार नए लोगों से पैसा जुटाने पर निर्भरता हो, तो उसमें पोंजी जैसी व्यवस्था का जोखिम हो सकता है। हालांकि, किसी विशेष मामले को कानूनी रूप से पोंजी योजना साबित करने के लिए जांच और न्यायिक प्रक्रिया जरूरी होती है।
ED की पहले की कार्रवाई में क्या मिला था?
ED ने 13 जून 2025 को जारी अपनी आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया था कि उसने 12 जून 2025 को राजस्थान के जयपुर, सीकर और झुंझुनूं तथा गुजरात के अहमदाबाद में 25 स्थानों पर तलाशी ली थी।
उस कार्रवाई में एजेंसी ने:
- करीब ₹2.04 करोड़ नकद जब्त किए।
- मामले से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए।
- Nexa Group की विभिन्न इकाइयों और सहयोगियों से जुड़े बैंक तथा क्रिप्टो खातों में मौजूद लगभग ₹15 करोड़ की रकम फ्रीज की।
बाद में, रिपोर्ट के अनुसार, ED ने सुभाष चंद्र बिजनोरिया उर्फ सुभाष बिजारनिया को गिरफ्तार किया था। जयपुर की विशेष अदालत ने उस समय उन्हें पूछताछ के लिए ED की हिरासत में भेजा था।
अब 11 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 12 कंपनियों और 10 अन्य व्यक्तियों के साथ निदेशक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। इस तरह मामला तलाशी और गिरफ्तारी से आगे बढ़कर अभियोजन की प्रक्रिया में पहुंचा है।
₹34.91 करोड़ की संपत्ति अटैच होने का क्या मतलब है?
ED द्वारा संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच करने का अर्थ है कि संबंधित संपत्ति को कानून के तहत जांच के दौरान बेचने, हस्तांतरित करने या उसके साथ अन्य लेन-देन करने पर रोक लगाई जा सकती है। इसका उद्देश्य कथित अपराध से जुड़े धन या संपत्ति को जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित रखना है।
लेकिन ₹34.91 करोड़ की संपत्ति अटैच होने का यह अर्थ नहीं है कि निवेशकों को उतनी रकम वापस मिल गई है। संपत्ति की जब्ती या अटैचमेंट और पीड़ितों को वास्तविक भुगतान मिलना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
इसी तरह, ₹2,676 करोड़ की कथित निवेश राशि, ₹34.91 करोड़ की अटैच संपत्ति, पहले जब्त ₹2.04 करोड़ नकद और फ्रीज किए गए ₹15 करोड़ को जोड़कर कुल बरामदगी बताना भी सही नहीं होगा। ये अलग-अलग कार्रवाइयों और श्रेणियों से संबंधित आंकड़े हैं, जिनमें संभावित अंतर या ओवरलैप की पुष्टि जरूरी है।
आम निवेशकों के लिए इस मामले से क्या सीख मिलती है?
इस घटना में कुछ ऐसे संकेत सामने आते हैं, जिन पर किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले ध्यान देना चाहिए।
पहला संकेत: असामान्य रूप से ऊंचा रिटर्न। हर सप्ताह 3 प्रतिशत रिटर्न देने का दावा बेहद आकर्षक लग सकता है, लेकिन ऐसे वादे के पीछे वास्तविक कारोबार, जोखिम और भुगतान की क्षमता की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
दूसरा संकेत: दूसरों को जोड़ने पर कमीशन। यदि किसी योजना में वास्तविक उत्पाद या कारोबार की तुलना में नए निवेशक जोड़ने पर अधिक जोर दिया जाता है, तो उसकी कमाई का मॉडल अच्छी तरह समझना चाहिए।
तीसरा संकेत: जमीन के नाम पर निवेश। किसी शहर या परियोजना का नाम सुनकर पैसा न लगाएं। जमीन के मालिकाना हक, संबंधित कंपनी, परियोजना की वैधता, रजिस्ट्री और भुगतान की शर्तों की जांच करें।
चौथा संकेत: शुरुआती भुगतान। शुरुआत में पैसा वापस मिलने से यह साबित नहीं होता कि पूरी योजना सुरक्षित है। बड़े निवेश से पहले स्वतंत्र वित्तीय और कानूनी सलाह लेना बेहतर है।
निष्कर्ष
Nexa Evergreen का मामला दिखाता है कि जमीन, आकर्षक रिटर्न और रेफरल इनाम का मेल निवेशकों को बड़े जोखिम में डाल सकता है। ED के मुताबिक, इस मामले में हजारों या बड़ी संख्या में निवेशकों से जुटाई गई रकम की जांच की जा रही है और कथित धन के प्रवाह को समझने के लिए कई संस्थाओं तथा संपत्तियों की पड़ताल की गई है।
अब जांच के साथ-साथ अदालत की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित ₹2,676 करोड़ में से कितनी रकम का पता लगाया जा सकेगा, कितनी संपत्ति कानूनी रूप से जब्त या वसूल हो पाएगी और पीड़ित निवेशकों को उनका पैसा वापस दिलाने की क्या व्यवस्था बनेगी।
