लोन चाहिए था कारोबार बढ़ाने के लिए, लेकिन फर्जी एजेंटों ने खाते से लाखों रुपये गायब कर दिए!!!!!
₹15 लाख का लोन दिलाने का झांसा, कारोबारी से ₹13.01 लाख ऐंठे…..
राजकोट: गुजरात के राजकोट में एक 34 वर्षीय टेक्सटाइल कारोबारी कथित तौर पर ऐसे साइबर ठगों के जाल में फंस गया, जिन्होंने खुद को अलग-अलग NBFC (Non-Banking Financial Company) का प्रतिनिधि बताकर उसे ₹15 लाख का बिजनेस लोन दिलाने का भरोसा दिया। लोन मिलने के बजाय कारोबारी से अलग-अलग फीस और चार्ज के नाम पर कुल ₹13.01 लाख वसूल लिए गए।
मामले की शिकायत के मुताबिक, वांकानेर में कारोबार करने वाले रिषभ सांघवी को 21 अगस्त को Facebook पर ₹15 लाख के बिजनेस लोन का विज्ञापन दिखाई दिया। कारोबार के लिए पैसों की जरूरत होने के कारण उन्होंने विज्ञापन में दिए ‘Apply Loan’ विकल्प पर क्लिक किया।
इसके अगले दिन एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम संतोष नायर बताया और खुद को एक NBFC का प्रतिनिधि बताया। उसने लोन की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही। शुरुआत में कारोबारी से ₹8,500 प्रोसेसिंग फीस के नाम पर QR कोड के जरिए भुगतान कराया गया।
इसके बाद ठगों ने एक के बाद एक नए शुल्क सामने रखने शुरू कर दिए। कभी एग्रीमेंट, कभी स्टांप ड्यूटी, कभी इंश्योरेंस, GST और दूसरे सरकारी शुल्क के नाम पर पैसे मांगे गए।
एक भुगतान के बाद शुरू हुआ लगातार पैसों का खेल
23 अगस्त को कारोबारी से TDS और NOC शुल्क के नाम पर ₹1.18 लाख मांगे गए। शिकायत के अनुसार, यह राशि Riya Das के नाम से जुड़े UPI QR कोड पर भेजी गई।
अगले दिन एक अन्य व्यक्ति ने संपर्क किया। उसने अपना नाम अभिषेक मंडल बताया और खुद को दूसरी NBFC का प्रतिनिधि बताया। उसने दावा किया कि ₹15 लाख का लोन मंजूर हो चुका है। इसके बाद प्रोसेसिंग और कानूनी शुल्क के नाम पर ₹21,240 और ले लिए गए।
मामला यहीं नहीं रुका। 25 अगस्त को कारोबारी की पत्नी के बैंक खाते से ₹55,250 और उसके एक दोस्त के खाते से ₹56,500 कथित तौर पर यह कहकर लिया गया कि दूसरे राज्य में रकम ट्रांसफर करने के लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
इसके बाद भी ठगों ने भुगतान की मांग जारी रखी। EMI, hold-release, digital signature और auto-pay charges जैसे अलग-अलग बहाने बनाए गए। आखिरकार कारोबारी को कुल ₹13.01 लाख का नुकसान हो गया।
असली चाल क्या थी?
इस मामले को केवल “फर्जी लोन” की घटना मानना पूरी तस्वीर नहीं बताता। ठगी का तरीका psychological pressure और staged payment पर आधारित दिखाई देता है।
पहले पीड़ित को बड़ा लोन मिलने की उम्मीद दिखाई गई। इसके बाद छोटी रकम से शुरुआत कर धीरे-धीरे बड़ी रकम मांगी गई। जब पीड़ित पहले ही कुछ पैसे दे चुका था, तब उसके सामने लोन पूरा होने का भरोसा बनाए रखा गया और हर अगले भुगतान को पिछली प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा बताया गया।
यही वजह है कि ₹15 लाख का लोन पाने की उम्मीद में कारोबारी खुद ₹13.01 लाख तक भुगतान करता चला गया।
यह तरीका दूसरे ऑनलाइन loan scams में भी दिखाई देता है, जहां अपराधी processing fee, verification charge, security deposit या loan-release charge जैसे नामों का इस्तेमाल करते हैं। हाल की वित्तीय जागरूकता रिपोर्टों में भी upfront fee को ऐसे scams का प्रमुख warning sign बताया गया है।
RBI की व्यवस्था के बावजूद खतरा क्यों?
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। RBI ने डिजिटल लोन देने वाली वैध संस्थाओं और उनके ऐप की पहचान में मदद के लिए Digital Lending Apps (DLA) Directory शुरू की है। सरकार के अनुसार यह व्यवस्था ग्राहकों को यह जांचने में मदद करती है कि कोई Digital Lending App किसी RBI-regulated entity से जुड़ा है या नहीं।
सरकार ने जुलाई 2026 में बताया था कि MeitY ने 87 अवैध loan-lending applications को ब्लॉक किया था। साथ ही RBI के Digital Lending Directions, 2025 में regulated entities और उनसे जुड़े lending service providers के लिए ग्राहक सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और शिकायत निवारण से जुड़े प्रावधान हैं।
इसलिए किसी अनजान व्यक्ति का फोन आना और केवल फोन पर “आपका लोन मंजूर हो गया है” कहना पर्याप्त प्रमाण नहीं है।
इस घटना से आम लोगों को क्या सीख मिलती है?
पहली चेतावनी: Facebook, WhatsApp या SMS पर दिखने वाला loan advertisement अपने-आप में किसी lender की विश्वसनीयता साबित नहीं करता।
दूसरी चेतावनी: लोन जारी करने से पहले बार-बार अलग-अलग निजी खातों या QR codes पर पैसे मांगना बड़ा red flag है।
तीसरी चेतावनी: अगर कोई व्यक्ति बिना उचित verification के “लोन पक्का”, “तुरंत approval” या “आज ही पैसा मिलेगा” कह रहा है, तो पहले lender की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए।
चौथी चेतावनी: किसी कथित NBFC प्रतिनिधि की पहचान केवल उसके बताए नाम या WhatsApp profile से सत्यापित नहीं होती। संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट और RBI की जानकारी से पुष्टि करना जरूरी है।
अगर कोई व्यक्ति ऐसे साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाए तो 1930 National Cyber Crime Helpline पर तुरंत शिकायत करना और cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करना महत्वपूर्ण है। सरकार ने विशेष रूप से illegal loan apps और cyber incidents की रिपोर्टिंग के लिए इन व्यवस्थाओं का उल्लेख किया है।
निष्कर्ष
राजकोट की यह घटना दिखाती है कि साइबर ठगी में हमेशा चोरी का तरीका तकनीकी रूप से जटिल नहीं होता। कई बार अपराधी सिर्फ विश्वास, जल्दबाजी और पैसे की जरूरत को हथियार बनाते हैं।
इस मामले में ₹15 लाख के संभावित बिजनेस लोन का लालच धीरे-धीरे ₹13.01 लाख के कथित नुकसान में बदल गया। सबसे बड़ा सबक यही है—लोन लेने से पहले lender की पहचान जांचें और लोन दिलाने के नाम पर advance payment की मांग को गंभीर चेतावनी मानें।
