दक्षिण-पूर्व एशिया के Scam Centres का जाल भारत तक पहुंचा, फर्जी नौकरियों से युवाओं की भर्ती बनी बड़ी चुनौती।
दक्षिण-पूर्व एशिया के Scam Centres का नया नेटवर्क: भारत और इंडोनेशिया तक फैली भर्ती और पैसों की कड़ी…..
नई दिल्ली: दक्षिण-पूर्व एशिया में चल रहे बड़े पैमाने के Online Scam Centres अब सिर्फ म्यांमार या कंबोडिया की समस्या नहीं रह गए हैं। इन साइबर ठगी नेटवर्क की जड़ें उन देशों तक भी पहुंच रही हैं जहां से लोगों की भर्ती की जाती है और जहां ठगी का पैसा Mule Accounts यानी ऐसे बैंक खातों के जरिए आगे भेजा जाता है।
रिपोर्ट का मुख्य दावा है कि भारत और इंडोनेशिया इन नेटवर्क के दो महत्वपूर्ण “pipeline points” बन गए हैं—भारत और इंडोनेशिया से लोगों की भर्ती तथा बैंकिंग नेटवर्क का इस्तेमाल, जबकि मुख्य Scam Compounds दक्षिण-पूर्व एशिया के अलग-अलग हिस्सों में संचालित होते हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत या इंडोनेशिया की सरकारें इन अपराधों में शामिल हैं। यहां बात मुख्य रूप से अपराधियों द्वारा स्थानीय भर्ती एजेंटों, सोशल मीडिया और वित्तीय नेटवर्क के दुरुपयोग की है।
कैसे चलता है पूरा Scam Centre मॉडल?
इन गिरोहों का काम किसी सामान्य साइबर ठगी से कहीं ज्यादा संगठित है। पहले सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या फर्जी जॉब वेबसाइट के जरिए युवाओं को Data Entry, Customer Support, IT या Computer Operator जैसी नौकरियों का लालच दिया जाता है।
कई मामलों में उम्मीदवारों को विदेश में अच्छी सैलरी का वादा किया जाता है। लेकिन गंतव्य पर पहुंचने के बाद उनका पासपोर्ट ले लिया जाता है और उन्हें जबरन Online Fraud, Romance Scam, Investment Scam और Social Engineering जैसे अपराधों में लगाया जा सकता है।
INTERPOL के अनुसार, मार्च 2025 तक 66 देशों के लोगों को Scam Centres में मानव तस्करी के जरिए पहुंचाए जाने के मामले सामने आए थे। इनमें से करीब 74% पीड़ितों को दक्षिण-पूर्व एशिया के Scam Centres में ले जाया गया था। संगठन ने यह भी कहा कि सभी Scam Centre कर्मचारी trafficking victims नहीं होते, लेकिन जिन लोगों को जबरन रोका जाता है उन्हें हिंसा, कर्ज के जाल, यौन शोषण और अन्य गंभीर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
2025 की शुरुआत में भारतीय सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए म्यावाड्डी क्षेत्र में करीब 2,000 भारतीय नागरिकों के Scam Operations में फंसे होने की बात सामने आई थी। रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत ने 2022 के बाद से 2,500 से ज्यादा भारतीयों को ऐसे परिसरों से वापस लाया है।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात है कि समस्या केवल विदेश में फंसे भारतीयों तक सीमित नहीं है। Recruitment Pipeline भारत के अंदर से शुरू हो सकती है।
फर्जी नौकरी के विज्ञापन, स्थानीय एजेंट, सोशल मीडिया ग्रुप और मैसेजिंग ऐप के जरिए युवाओं को पहले नेटवर्क में लाया जाता है। इसके बाद उन्हें थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया या अन्य देशों तक पहुंचाया जा सकता है।
इसलिए Cybercrime को केवल “विदेशी अपराध” मानना गलत होगा। इसका एक हिस्सा Domestic Recruitment Network भी है।
दूसरा बड़ा खतरा: Mule Accounts
Scam Centre से ठगी का पैसा सीधे अपराधियों के बैंक खाते में नहीं जाता। पैसा कई खातों, डिजिटल वॉलेट, क्रिप्टोकरेंसी और दूसरे वित्तीय माध्यमों से घुमाया जा सकता है।
ऐसे बैंक खातों को आम तौर पर Mule Accounts कहा जाता है। इनमें कुछ खाते जानबूझकर अपराधियों को उपलब्ध कराए जाते हैं, जबकि कुछ लोग कमीशन, नौकरी या दूसरे बहाने से अपना खाता उपलब्ध करा देते हैं और बाद में उसका इस्तेमाल ठगी के पैसे को आगे भेजने में होता है।
RBI ने भी डिजिटल फ्रॉड में Mule Accounts की भूमिका को गंभीर खतरा माना है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को ऐसे खातों की पहचान और निगरानी मजबूत करने पर जोर दिया है। RBI Innovation Hub का MuleHunter.AI मॉडल भी संदिग्ध Mule Accounts की पहचान के लिए विकसित किया गया है।
यानी Scam Centre की असली ताकत केवल वहां बैठे ठग नहीं हैं। इसके पीछे तीन अलग-अलग स्तर काम कर सकते हैं—
Recruitment → Scam Operation → Money Laundering
अगर इनमें से किसी एक कड़ी को तोड़ दिया जाए तो पूरे नेटवर्क की क्षमता कमजोर हो सकती है।
खतरा कितना बड़ा हो चुका है?
संयुक्त राष्ट्र के UNODC के अनुसार, 2025 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में Scam Networks से होने वाली वित्तीय क्षति का अनुमान $88.3 अरब से $114.1 अरब के बीच था। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय अपराधी नेटवर्क अब केवल एक प्रकार की ठगी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि Money Laundering, Human Trafficking, Data Theft और Underground Banking जैसी अलग-अलग अवैध सेवाओं को एक ही नेटवर्क में जोड़ रहे हैं।
UNODC ने इसे एक तरह के “Criminal Service Economy” के रूप में देखा है, जिसमें अलग-अलग अपराधी समूह विशेषज्ञता के अनुसार काम करते हैं।
सबसे चिंताजनक बदलाव Artificial Intelligence का इस्तेमाल है। INTERPOL के अनुसार AI का उपयोग फर्जी नौकरी विज्ञापन बनाने, नकली Online Profiles तैयार करने और Deepfake आधारित Romance तथा Sextortion Scams को अधिक विश्वसनीय बनाने में किया जा रहा है।
केवल Scam Centre बंद करने से समस्या खत्म क्यों नहीं होगी?
कंबोडिया या म्यांमार में किसी Scam Compound पर छापा मारना जरूरी है, लेकिन इससे पूरा नेटवर्क खत्म नहीं होता।
UNODC के मुताबिक, कानून प्रवर्तन की कार्रवाई के बाद कई नेटवर्क अपना ठिकाना बदल रहे हैं और कमजोर Governance वाले दूसरे क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं। इसे “Jurisdiction Shopping” कहा जा सकता है—यानी अपराधी वहां जाते हैं जहां कानून लागू करना कठिन हो, भ्रष्टाचार अधिक हो या निगरानी कमजोर हो।
हाल के घटनाक्रम भी बताते हैं कि कार्रवाई के बावजूद नेटवर्क तेजी से अपना तरीका बदल रहे हैं। Reuters के अनुसार, 2025 में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में Scam Networks ने कम से कम $88 अरब की ठगी की और दबाव बढ़ने पर कई समूहों ने अपने ऑपरेशन को दूसरे देशों और क्षेत्रों में स्थानांतरित किया।
भारत के लिए आगे की चुनौती क्या है?
भारत को इस समस्या से निपटने के लिए केवल विदेशों से अपने नागरिकों को वापस लाने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। पूरे Scam Supply Chain को निशाना बनाना जरूरी है।
विशेषज्ञ स्तर पर जरूरी कदम
1. Fake Job Recruitment पर सख्ती:
विदेशी नौकरी के नाम पर भर्ती करने वाले एजेंटों और सोशल मीडिया विज्ञापनों की लगातार निगरानी हो।
2. Recruitment-to-Trafficking Tracking:
अगर किसी भारतीय नागरिक को संदिग्ध तरीके से दक्षिण-पूर्व एशिया भेजा जा रहा है तो Immigration, Police, Cybercrime और विदेश मंत्रालय के बीच तत्काल सूचना साझा हो।
3. Mule Accounts पर Real-Time निगरानी:
बैंक, UPI और Payment Platforms को संदिग्ध लेन-देन की पहचान के लिए AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल और तेज करना होगा।
4. Crypto Trail को ट्रैक करना:
सिर्फ बैंक खातों पर निगरानी पर्याप्त नहीं है। Cryptocurrency wallets और Blockchain transactions को भी जांच का हिस्सा बनाना होगा।
5. Social Media Platforms की जवाबदेही:
फर्जी Job Ads, Romance Profiles और Investment Scams के लिए इस्तेमाल हो रहे खातों की तेज पहचान और कार्रवाई जरूरी है।
6. पीड़ित और अपराधी में अंतर:
किसी Scam Centre से बचाए गए हर व्यक्ति को अपराधी मानना सही नहीं होगा। जबरन काम करवाए गए लोगों को Human Trafficking Victims के रूप में पहचानकर कानूनी और मनोवैज्ञानिक सहायता देना जरूरी है।
निष्कर्ष
दक्षिण-पूर्व एशिया के Scam Centres को केवल म्यांमार या कंबोडिया में मौजूद कुछ इमारतों के रूप में देखना अब पर्याप्त नहीं है। यह एक Transnational Cybercrime Ecosystem बन चुका है, जिसमें भर्ती, मानव तस्करी, सोशल इंजीनियरिंग, बैंकिंग, क्रिप्टोकरेंसी और मनी लॉन्ड्रिंग अलग-अलग देशों में बंटी हुई गतिविधियां हो सकती हैं।
भारत के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि Scam Centre की सीमा विदेश में हो सकती है, लेकिन उसकी Pipeline भारत के अंदर भी शुरू हो सकती है।
इसीलिए अगली लड़ाई सिर्फ ठगों को गिरफ्तार करने की नहीं, बल्कि Recruitment Network + Mule Accounts + Digital Platforms + Money Laundering + Human Trafficking की पूरी श्रृंखला को एक साथ तोड़ने की है।
यही रणनीति दक्षिण-पूर्व एशिया के तेजी से बदलते Cybercrime मॉडल को रोकने में अधिक प्रभावी हो सकती है।
