Work from Home की नौकरी समझकर भरोसा किया, टास्क पूरे करते-करते युवक ने गंवा दिए 27 लाख से ज्यादा।
वर्क फ्रॉम होम के नाम पर 27.24 लाख की ठगी, WhatsApp मैसेज से शुरू हुआ पूरा खेल…..
वडोदरा: घर बैठे कमाई करने की तलाश एक व्यक्ति को इतनी महंगी पड़ गई कि उसे 27.24 लाख रुपये गंवाने पड़े। वडोदरा जिले के डुडेलाव गांव के 32 वर्षीय व्यक्ति को WhatsApp पर वर्क फ्रॉम होम नौकरी का ऑफर मिला था। ठगों ने कम समय में अच्छी कमाई का भरोसा दिलाया और धीरे-धीरे उसे ऐसे ऑनलाइन काम में उलझाया, जिसमें पहले पैसे जमा कराने पड़ते थे।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित को 26 जून 2025 को एक अनजान नंबर से WhatsApp संदेश मिला। संदेश में दावा किया गया कि रोजाना सिर्फ तीन से चार घंटे काम करके ₹2,400 से ₹5,600 तक कमाए जा सकते हैं। नौकरी का ऑफर आकर्षक लगा, इसलिए उसने जवाब दिया।
इसके बाद WhatsApp पर उससे एक महिला ने संपर्क किया और एक लिंक भेजा। इस लिंक के जरिए पीड़ित से “Rent” नाम का एक ऐप डाउनलोड कराया गया। शिकायत के मुताबिक, ऐप में मोबाइल नंबर और बैंक संबंधी जानकारी दर्ज करने के बाद उसे कुछ ऑनलाइन टास्क दिए गए।
शुरुआत में पैसा लौटाकर जीता भरोसा
यह इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ठगों ने शुरुआत में पीड़ित को कुछ छोटे काम दिए और उनके बदले पैसा वापस किया। इससे उसे लगा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वास्तविक है और इसमें कमाई की जा सकती है।
इसके बाद ठगों ने उसे ज्यादा रकम वाले टास्क ऑफर किए। हर नए स्तर पर ज्यादा कमाई का लालच दिया गया और काम पूरा करने के लिए पहले पैसे जमा कराने को कहा गया।
धीरे-धीरे रकम बढ़ती गई और पीड़ित अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजता रहा। पुलिस के मुताबिक, आखिरकार उसने कुल ₹27,24,036 ट्रांसफर कर दिए।
लेकिन जब भुगतान वापस लेने की बारी आई तो कथित ठगों ने रकम लौटाने के बजाय संपर्क करना बंद कर दिया। तब पीड़ित को समझ आया कि वह नौकरी नहीं, बल्कि एक ऑनलाइन टास्क फ्रॉड का शिकार हो चुका है।
करीब 14 महीने बाद दर्ज हुई FIR
पुलिस के अनुसार, कथित ठगी 26 जून से 7 जुलाई 2025 के बीच हुई थी। मामले में वाघोडिया पुलिस ने 4 सितंबर 2026 को FIR दर्ज की।
रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित ने शुरुआत में 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत की थी। जांच के बाद जब धोखाधड़ी की पुष्टि हुई, तब पुलिस ने मामला दर्ज किया।
शिकायत में दो संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। इनमें एक व्यक्ति की पहचान प्रियंका मोहन के रूप में बताई गई है, जबकि दूसरे संदिग्ध की पहचान मोबाइल नंबर के आधार पर हिदाया कारी के रूप में की गई है। दोनों की पूरी जानकारी पुलिस जांच के दायरे में है।
असली खतरा नौकरी नहीं, ‘पहले पैसा दो’ वाला मॉडल है
इस घटना को केवल एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी मानना पर्याप्त नहीं होगा। इसमें जिस तरीके का इस्तेमाल किया गया, वह Task-Based Job Scam का जाना-पहचाना पैटर्न है।
ऐसे मामलों में ठग पहले नौकरी या पार्ट-टाइम काम का भरोसा देते हैं। इसके बाद छोटे टास्क देकर पीड़ित को थोड़ी रकम वापस की जा सकती है। इससे भरोसा पैदा होता है।
फिर ज्यादा कमाई वाले टास्क के नाम पर बड़ी रकम जमा कराने को कहा जाता है। जब पीड़ित बड़ी रकम लगा देता है, तो पैसा निकालने के लिए टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या अन्य शुल्क की मांग शुरू हो सकती है।
I4C की 8 अप्रैल 2025 की आधिकारिक एडवाइजरी में भी फर्जी ऑनलाइन जॉब और CAPTCHA-आधारित टास्क फ्रॉड के इसी तरह के तरीकों का उल्लेख है। एडवाइजरी के अनुसार, ठग आकर्षक कमाई का लालच देकर पहले रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग या सॉफ्टवेयर के नाम पर पैसे मांग सकते हैं और बाद में भुगतान रोककर अतिरिक्त रकम की मांग कर सकते हैं।
इस ठगी में सबसे बड़ा ‘Red Flag’ क्या था?
इस पूरे मामले से एक सीधा नियम समझ आता है:
नौकरी आपको पैसे देती है, नौकरी पाने के लिए आपसे पैसे नहीं मांगती।
अगर कोई व्यक्ति या कंपनी—
- बिना उचित इंटरव्यू के तुरंत नौकरी देने का दावा करे,
- WhatsApp या Telegram पर ही पूरा भर्ती प्रक्रिया चलाए,
- असामान्य रूप से ज्यादा कमाई का वादा करे,
- काम शुरू करने से पहले Deposit या Registration Fee मांगे,
- पैसे जमा करने पर ही ज्यादा कमाई वाले Task खोलने की बात करे,
- पैसा निकालने के लिए अलग से Tax/Processing Fee मांगे,
तो उसे गंभीर Cyber Fraud Red Flag माना जाना चाहिए।
ठग पहले थोड़ा पैसा क्यों लौटाते हैं?
यह तरीका साइबर अपराधियों की Psychological Manipulation रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को पहले ₹500 या ₹1,000 का भुगतान मिल जाता है, तो उसका भरोसा बढ़ जाता है। इसके बाद वही व्यक्ति ₹10,000, ₹50,000 या उससे भी ज्यादा रकम लगाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो सकता है।
यानी शुरुआती छोटी रकम वास्तव में कमाई नहीं, बल्कि Trust-Building Trap हो सकती है।
इसी कारण केवल यह देखकर कि किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने शुरुआत में पैसा वापस कर दिया, उसे वास्तविक कंपनी या नौकरी मान लेना सुरक्षित नहीं है।
I4C भी फर्जी ऑनलाइन जॉब से सावधान रहने की सलाह देता है
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार Online Job Fraud वह धोखाधड़ी है जिसमें रोजगार या अधिक आय का झूठा भरोसा देकर व्यक्ति से पैसे ठगे जाते हैं।
I4C की आधिकारिक सलाह में विशेष रूप से अग्रिम भुगतान, अवास्तविक कमाई के दावे, भुगतान रोकना और पैसे निकालने के लिए अतिरिक्त शुल्क मांगना जैसे संकेतों को खतरे की निशानी बताया गया है।
इसका मतलब साफ है कि वर्क फ्रॉम होम का ऑफर अपने आप में फर्जी नहीं है। असली सवाल यह है कि नौकरी देने वाला कौन है, काम क्या है और क्या आपसे पहले पैसा मांगा जा रहा है?
अगर ऐसी ठगी हो जाए तो क्या करें?
सबसे जरूरी बात है कि शिकायत करने में देरी न करें।
1. तुरंत 1930 पर कॉल करें।
राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायत की जा सकती है।
2. cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
I4C के पोर्टल पर साइबर अपराध की ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।
3. सबूत डिलीट न करें।
WhatsApp चैट, मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजैक्शन, UPI ID, ऐप लिंक, वेबसाइट, स्क्रीनशॉट और भेजे गए दस्तावेज सुरक्षित रखें। साइबर क्राइम पोर्टल भी शिकायत के दौरान ऐसे सबूत सुरक्षित रखने की सलाह देता है।
4. बैंक को तुरंत सूचना दें।
जिस बैंक खाते या UPI माध्यम से पैसा भेजा गया है, वहां तुरंत शिकायत दर्ज करें और संबंधित ट्रांजैक्शन की जानकारी दें।
निष्कर्ष
वडोदरा का यह मामला बताता है कि साइबर ठग अब केवल OTP या फर्जी बैंक कॉल के जरिए ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे। नौकरी, पार्ट-टाइम कमाई और Work From Home जैसे सामान्य दिखने वाले अवसर भी ठगी का माध्यम बन सकते हैं।
इसलिए ऑनलाइन नौकरी खोजते समय सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “मैं कितना कमा सकता हूं?” बल्कि यह होना चाहिए कि “जिसे मैं पैसा दे रहा हूं, वह वास्तव में कौन है?”
अगर किसी नौकरी की शुरुआत ही आपसे पैसा मांगने से होती है, तो वहां से पीछे हटना ही सबसे सुरक्षित फैसला है।
