सिर्फ ₹5 की फीस का झांसा, फिर ₹11.92 लाख की चपत! वोटर ID अपडेट कराने से पहले सावधान रहें।
पुणे में वोटर ID अपडेट कराने के नाम पर ₹11.92 लाख की साइबर ठगी…..
79 वर्षीय बुजुर्ग को चुनाव अधिकारी बनकर ठग ने फंसाया, ₹5 की प्रोसेसिंग फीस के बहाने हासिल की निजी जानकारी; बैंक खाते से निकले लाखों रुपये।
महाराष्ट्र के पुणे में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें मतदाता पहचान पत्र में नाम सुधारने की प्रक्रिया को ही धोखाधड़ी का हथियार बना लिया गया। मीडिया की 12 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 79 वर्षीय एक बुजुर्ग के बैंक खाते से कथित तौर पर ₹11.92 लाख निकाल लिए गए। ठग ने खुद को चुनाव संबंधी काम में मदद करने वाला अधिकारी बताया और बुजुर्ग को उनकी पत्नी के वोटर ID में नाम ठीक कराने के लिए Form 8 भरने के नाम पर अपने जाल में फंसाया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें ठगी के लिए किसी बड़े भुगतान या आकर्षक इनाम का लालच नहीं दिया गया। इसके बजाय, एक सामान्य सरकारी प्रक्रिया, व्यक्तिगत जानकारी और केवल ₹5 की फीस का इस्तेमाल करके भरोसा जीता गया।
क्या हुआ था उस दिन?
रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्ग ने अपनी पत्नी के मतदाता पहचान पत्र में नाम से जुड़ा सुधार कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन में उन्होंने अपना मोबाइल नंबर भी दिया था। इसके बाद उन्हें WhatsApp पर संदेश और फोन कॉल आने लगे। कॉल करने वाले व्यक्ति ने ऐसा जताया, जैसे उसे उनके आवेदन की पूरी जानकारी हो और वह प्रक्रिया पूरी कराने में मदद कर सकता हो।
7 अक्टूबर को संपर्क करने वाले कथित ठग ने बुजुर्ग से कहा कि नाम में सुधार के लिए Form 8 भरना जरूरी है। इसके बाद उसने बुजुर्ग और उनकी पत्नी के आधार नंबर, वोटर ID की जानकारी, तस्वीरें और ईमेल पते मांगे। सरकारी प्रक्रिया पूरी कराने की बात पर भरोसा करते हुए बुजुर्ग ने ये जानकारियां साझा कर दीं।
इसके बाद ठग ने केवल ₹5 की प्रोसेसिंग फीस देने को कहा। बुजुर्ग ने UPI के माध्यम से भुगतान करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें ट्रांजैक्शन फेल होने का संदेश मिला। दोबारा कोशिश करने पर भी भुगतान सफल नहीं हुआ।
लेकिन असली परेशानी तब सामने आई, जब उन्होंने अपना बैंक बैलेंस चेक किया। उनके खाते से उनकी अनुमति के बिना बड़ी रकम निकल चुकी थी। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि खाते से दो NEFT ट्रांजैक्शन किए गए थे—एक ₹4.99 लाख का और दूसरा ₹6.93 लाख का। दोनों को मिलाकर कुल नुकसान ₹11.92 लाख था।
बुजुर्ग ने 7 अक्टूबर को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पुणे के स्वारगेट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस जांच कर रही है कि ठगों को बैंकिंग संबंधी जानकारी कैसे मिली और पैसे निकालने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया गया।
Form 8 क्या है और इसका इस्तेमाल कब होता है?
Form 8 — मतदाता पहचान पत्र में सुधार का आधिकारिक फॉर्म
भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, Form 8 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज विवरण सुधारने, निवास स्थान बदलने, वोटर ID कार्ड बदलवाने और दिव्यांग मतदाता के रूप में चिह्नित कराने जैसी प्रक्रियाओं के लिए किया जाता है।
आधिकारिक पोर्टल: voters.eci.gov.in
इस घटना में एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है: Form 8 असली है, लेकिन उसके नाम पर संपर्क करने वाला हर व्यक्ति असली सरकारी अधिकारी नहीं होता। किसी व्यक्ति को आवेदन की जानकारी होना भी उसकी पहचान का प्रमाण नहीं है।
जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?
इस मामले में पुलिस की जांच केवल पैसे निकालने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं है। यह भी पता लगाने की जरूरत है कि ठगी की शुरुआत कैसे हुई।
- निजी जानकारी ठग तक कैसे पहुंची? बुजुर्ग ने ऑनलाइन आवेदन किया था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आवेदन किसी फर्जी वेबसाइट पर किया गया था या जानकारी किसी अन्य माध्यम से लीक हुई।
- ₹5 के भुगतान की कोशिश के बाद पैसे कैसे निकले? उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, खाते से दो NEFT ट्रांजैक्शन हुए। लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच कैसे बनाई गई, कौन-सा प्रमाणीकरण इस्तेमाल हुआ और क्या किसी लॉगिन या अन्य जानकारी से समझौता हुआ था।
- क्या UPI भुगतान की असफलता ही ठगी का कारण थी? फिलहाल इसका प्रमाण नहीं है। केवल भुगतान असफल होने और उसके बाद खाते से पैसे निकलने के क्रम से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि UPI प्रक्रिया ने ही बैंक खाता खाली किया।
आवेदन की स्थिति आधिकारिक पोर्टल पर खुद जांचें। अनजान व्यक्ति द्वारा दी गई वेबसाइट या लिंक पर अपनी जानकारी भरने से बचें।
OTP, UPI PIN, ATM PIN और बैंकिंग पासवर्ड किसी को न बताएं। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप भी इंस्टॉल न करें।
बैंक को तुरंत सूचना दें और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 पर कॉल करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करें।
विश्लेषण
- पुष्ट जानकारी: रिपोर्ट में पीड़ित की उम्र 79 वर्ष, कुल नुकसान ₹11.92 लाख और दो NEFT ट्रांजैक्शन का उल्लेख है।
- आधिकारिक पुष्टि: निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर Form 8 उपलब्ध है और इसके निर्धारित उपयोग स्पष्ट हैं।
- अभी जांच का विषय: ठग को आवेदन की जानकारी कहां से मिली, बैंकिंग लेनदेन कैसे अधिकृत हुए और क्या किसी फर्जी वेबसाइट की भूमिका थी। इन सवालों का अंतिम जवाब उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दिया गया है।
विश्लेषण: इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि ठग ने एक वास्तविक सरकारी सेवा के संदर्भ का इस्तेमाल करके पीड़ित का भरोसा जीता। हालांकि, यह कहना अभी सही नहीं होगा कि निर्वाचन आयोग के सिस्टम से ही डेटा लीक हुआ। जांच में फर्जी वेबसाइट, किसी अन्य माध्यम से जानकारी हासिल करने और बैंकिंग सुरक्षा में संभावित चूक—सभी पहलुओं की पड़ताल जरूरी है।
यह घटना याद दिलाती है कि साइबर ठगी हमेशा बड़े लालच से शुरू नहीं होती। कभी-कभी एक सामान्य आवेदन, WhatsApp संदेश और मामूली फीस के बहाने भी व्यक्ति को निशाना बनाया जा सकता है। सरकारी प्रक्रिया की जानकारी होना और सरकारी अधिकारी होना—दो अलग बातें हैं।
