पेंशन का लालच पड़ा भारी, WhatsApp पर आई एक APK फाइल ने बुजुर्ग के तीन बैंक खाते खाली कर दिए।
पेंशन कार्ड बनवाने का झांसा, WhatsApp पर APK भेजा… और कुछ घंटों में बुजुर्ग के ₹36.39 लाख गायब…..
लखनऊ में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पेंशन कार्ड बनवाने के नाम पर एक बुजुर्ग को निशाना बनाया गया। ठग ने खुद को बैंक कर्मचारी बताया, WhatsApp पर एक APK फाइल भेजी और उसे खोलने के बाद मोबाइल में एक स्क्रीन पर दिखाई दे रही तस्वीर पर क्लिक करने को कहा। इसके बाद मोबाइल से छेड़छाड़ हुई और कुछ ही घंटों में बुजुर्ग के तीन बैंक खातों से कुल ₹36.39 लाख निकाल लिए गए।
मामला लखनऊ के आशियाना सेक्टर-K का है। रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्ग उमेश चंद्र को 30 सितंबर को WhatsApp पर एक कॉल आई। सामने वाले व्यक्ति ने खुद को ICICI Bank का कर्मचारी बताते हुए पेंशन कार्ड बनवाने की बात कही।
बातचीत के दौरान आरोपी ने उनके मोबाइल पर एक APK फाइल भेजी। बुजुर्ग को बताया गया कि इसी प्रक्रिया के जरिए पेंशन कार्ड से जुड़ा काम पूरा किया जाएगा।
यहीं से पूरा खेल शुरू हुआ।
बुजुर्ग ने फाइल खोली तो स्क्रीन पर डेबिट कार्ड से जुड़ा एक इंटरफेस/तस्वीर दिखाई दी। कॉल करने वाले ने उन्हें उस तस्वीर पर क्लिक करने के लिए कहा। जैसे ही उन्होंने क्लिक किया, आरोपी ने कॉल काट दी। इसके बाद कुछ ही समय में उनके अलग-अलग बैंक खातों से पैसे निकलने लगे।
बैंक से आए Transaction Alerts देखने के बाद उन्हें पता चला कि उनके साथ साइबर ठगी हो चुकी है।
पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रकम को फ्रीज कराने के लिए संबंधित बैंकों से भी संपर्क किया गया है।
असली खतरा पेंशन कार्ड नहीं, APK था
इस घटना को समझना बहुत जरूरी है।
APK यानी Android Package Kit वह फाइल फॉर्मेट है जिसका इस्तेमाल Android फोन में ऐप इंस्टॉल करने के लिए किया जा सकता है। सामान्य तौर पर लोग Play Store से ऐप डाउनलोड करते हैं, लेकिन जब कोई अनजान व्यक्ति WhatsApp या किसी दूसरे माध्यम से सीधे APK फाइल भेजकर उसे इंस्टॉल या खोलने के लिए कहता है, तो यह बड़ा साइबर रेड फ्लैग है।
हर APK अपने आप में वायरस नहीं होता। लेकिन अनजान स्रोत से आई APK फाइल में malicious code हो सकता है, जो फोन की सुरक्षा और उसमें मौजूद संवेदनशील जानकारी को खतरे में डाल सकता है।
इस मामले में भी ठगी की पूरी प्रक्रिया एक साधारण फोन कॉल से शुरू हुई—पहले भरोसा बनाया गया, फिर बैंक कर्मचारी होने का दावा किया गया, उसके बाद पेंशन कार्ड का लालच दिया गया और अंत में मोबाइल पर फाइल भेजी गई।
यानी ठगों ने सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि विश्वास और लालच दोनों को हथियार बनाया।
लखनऊ में APK ठगी का पैटर्न क्यों चिंताजनक है?
यह घटना अकेली नहीं दिखती।
लखनऊ में हाल के दिनों में Green Gas, बिल अपडेट और दूसरे जरूरी कामों के नाम पर भी लोगों को APK या संदिग्ध लिंक भेजकर ठगी के मामले सामने आए हैं। एक रिपोर्ट में ऐसे कई मामलों में कुल ₹53.72 लाख की ठगी का उल्लेख है। इनमें पेंशन कार्ड के नाम पर इसी मामले में ₹36.39 लाख की रकम भी शामिल है।
इससे एक पैटर्न दिखाई देता है—
जरूरी सेवा का नाम → फर्जी कर्मचारी → WhatsApp कॉल → APK/लिंक → मोबाइल से छेड़छाड़ → बैंक खाते से पैसा गायब।
यही वजह है कि किसी भी व्यक्ति को यह समझना होगा कि साइबर अपराधी हमेशा डराकर ही ठगी नहीं करते। कभी वे सरकारी योजना, कभी बैंक सुविधा, कभी गैस कनेक्शन, कभी KYC और कभी पेंशन जैसी भरोसे वाली चीजों का नाम लेकर भी लोगों को फंसा सकते हैं।
सरकार भी लगातार चेतावनी दे रही है
केंद्र सरकार के अनुसार, Indian Cyber Crime Coordination Centre यानी I4C के तहत वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई के लिए Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System (CFCFRMS) काम कर रहा है।
गृह मंत्रालय के अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 30 जून 2026 तक इस व्यवस्था के जरिए 32.80 लाख से ज्यादा शिकायतों में ₹11,158 करोड़ से अधिक रकम बचाई गई। इसी अवधि तक I4C ने 3,718 मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक किए थे।
इसका मतलब साफ है—साइबर ठगी का पैमाना इतना बढ़ चुका है कि सरकार, बैंक और पुलिस को भी इसे रोकने के लिए लगातार नए सिस्टम लगाने पड़ रहे हैं।
लेकिन आम आदमी क्या करे?
इस घटना से सबसे बड़ी सीख बहुत सीधी है।
WhatsApp पर कोई बैंक कर्मचारी आपको APK भेजे, तो उसे खोलना ही नहीं है।
अगर कोई व्यक्ति कहे कि—
- पेंशन कार्ड बनाना है,
- बैंक KYC अपडेट करनी है,
- गैस कनेक्शन बंद हो जाएगा,
- बिजली या पानी का बिल अपडेट करना है,
- कोई सरकारी लाभ मिलेगा,
और इसके लिए वह APK डाउनलोड करने या अनजान लिंक पर क्लिक करने को कहे, तो बातचीत वहीं रोक दें।
बैंक कर्मचारी होने का दावा करने वाला व्यक्ति भी आपको WhatsApp पर अनजान APK इंस्टॉल करने को कहे, तो उस पर भरोसा न करें।
और अगर गलती से पैसा चला गया है, तो इंतजार न करें। तुरंत 1930 पर कॉल करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें। जल्दी शिकायत करने से बैंकिंग सिस्टम के जरिए रकम को रोकने या फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।
इस मामले की सबसे खतरनाक बात सिर्फ ₹36.39 लाख की रकम नहीं है। असली खतरा यह है कि आज ठगों को आपके बैंक तक पहुंचने के लिए हमेशा आपका OTP जानने की जरूरत नहीं पड़ती—वे पहले आपके फोन को ही निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
एक अनजान APK पर किया गया एक क्लिक, कई बैंक खातों की बचत को कुछ घंटों में खत्म कर सकता है।
