नकली सोना, असली कर्ज और करोड़ों का खेल, ओडिशा में बैंक मैनेजर पर बड़ा गोल्ड लोन फ्रॉड का आरोप!!!
ओडिशा में ₹2.12 करोड़ का गोल्ड लोन घोटाला: बैंक मैनेजर गिरफ्तार, 100 फर्जी लोन से जुड़ा मामला…..
ओडिशा पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) ने एक सरकारी बैंक की जटिल गोल्ड-लोन धोखाधड़ी के मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक सत्यब्रत भोई को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी पर अन्य बैंक कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी या नकली सोने के आभूषणों के आधार पर करीब ₹2.12 करोड़ के 100 गोल्ड लोन मंजूर और वितरित करने का आरोप है।
मामला ओडिशा के केओंझार जिले की जोड़ा शाखा से जुड़ा है। भोई सितंबर 2022 से इस शाखा के मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। बैंक में गड़बड़ी सामने आने के बाद उन्हें निलंबित किया गया था और बाद में EOW ने मामले की जांच शुरू की।
कैसे सामने आया मामला?
बैंक के बालेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख आशुतोष सुशील कुमार पटनायक की शिकायत के आधार पर EOW ने मामला दर्ज किया। शिकायत के मुताबिक, जून 2023 से जून 2024 के बीच कथित तौर पर 100 गोल्ड लोन मंजूर किए गए, जिनकी कुल राशि ₹2,12,29,900 थी। आरोप है कि इन लोन के लिए असली सोने के बजाय नकली/घटिया आभूषण इस्तेमाल किए गए और जरूरी दस्तावेजी प्रक्रियाओं का भी पालन नहीं किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि 100 लोन खातों में से 23 खाते बंद हो चुके थे, जबकि 76 खाते अभी भी बकाया थे। 18 अगस्त 2026 तक इन 76 सक्रिय खातों में लगभग ₹1.97 करोड़ की राशि बकाया बताई गई।
सिर्फ फर्जी सोना ही नहीं, पैसे का ट्रांसफर भी सवालों के घेरे में
EOW के अनुसार, कथित धोखाधड़ी का तरीका केवल नकली सोना गिरवी रखने तक सीमित नहीं था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि कुछ लोन की राशि संबंधित उधारकर्ताओं के खातों में जमा की गई, लेकिन उनकी जानकारी या सहमति के बिना रकम दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
इसके बाद धन कथित तौर पर आरोपी और उसके सहयोगियों से जुड़े खातों तक पहुंचा। जांच एजेंसी का मानना है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल Money Trail छिपाने और कथित गबन को छुपाने के लिए किया गया।
इस मामले में असली समस्या क्या है?
गोल्ड लोन में बैंक ग्राहक के सोने को सुरक्षा के तौर पर अपने पास रखता है। इसलिए सामान्य तौर पर बैंक को Gold Valuation, KYC, दस्तावेज, ग्राहक की पहचान, लोन स्वीकृति और Gold Custody जैसी प्रक्रियाओं की जांच करनी होती है।
इस मामले में EOW की जांच जिस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वह है—एक साथ इतने सारे लोन में बैंक की आंतरिक जांच और नियंत्रण कैसे विफल हुए?
यदि 100 अलग-अलग खातों में नकली सोने के आधार पर लोन जारी हुए, तो यह केवल एक कर्मचारी की गलती का मामला नहीं बल्कि Internal Control Failure की संभावना भी पैदा करता है। हालांकि, इस स्तर पर किसी अन्य कर्मचारी की आपराधिक भूमिका को अदालत में साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता; जांच अभी जारी है।
ओडिशा में गोल्ड लोन फ्रॉड का बड़ा पैटर्न
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ओडिशा में इस साल गोल्ड लोन से जुड़ी अन्य वित्तीय धोखाधड़ियां भी सामने आई हैं।
अप्रैल 2026 में EOW ने एक SBI अधिकारी को कथित ₹5.21 करोड़ के गोल्ड लोन घोटाले में गिरफ्तार किया था। उस मामले में 105 गोल्ड लोन से संबंधित अनियमितताओं का आरोप था और जांच में कुछ मामलों में नकली सोना तथा कुछ मामलों में बिना सोना जमा किए लोन स्वीकृत करने की बात सामने आई थी।
इससे संकेत मिलता है कि Gold Loan Fraud में केवल नकली आभूषण ही जोखिम नहीं हैं। कमजोर दस्तावेजी प्रक्रिया, गलत valuation, कर्मचारियों की मिलीभगत और loan proceeds के गलत इस्तेमाल जैसे कई स्तरों पर धोखाधड़ी हो सकती है।
आम ग्राहक के लिए इसका क्या मतलब?
गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहकों को भी सावधान रहना चाहिए। किसी बैंक कर्मचारी के कहने मात्र पर बिना पढ़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न करें और अपने नाम पर स्वीकृत लोन की जानकारी जरूर जांचें।
अगर किसी व्यक्ति ने गोल्ड लोन नहीं लिया है, लेकिन उसके नाम से बैंक में कोई लोन खाता खुला है, तो यह गंभीर मामला हो सकता है। ऐसी स्थिति में बैंक से तुरंत लिखित शिकायत करने के साथ संबंधित अधिकारियों को सूचना देना जरूरी है।
जांच में अब किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
- नकली सोने की valuation किसने की?
- 100 लोन की मंजूरी में बैंक की कौन-कौन सी प्रक्रियाएं bypass हुईं?
- ग्राहकों के खातों में पैसा किस तरीके से पहुंचा?
- रकम किन खातों में transfer हुई?
- कथित लाभार्थियों और बैंक कर्मचारियों के बीच क्या संबंध था?
- बैंक के internal audit और supervisory checks ने इन अनियमितताओं को समय पर क्यों नहीं पकड़ा?
- 76 सक्रिय खातों में बकाया ₹1.97 करोड़ की वसूली कैसे होगी?
महत्वपूर्ण: आरोपी पर लगे आरोप जांच के आधार पर हैं और अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं। अंतिम दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी। EOW की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और बैंक को वास्तविक आर्थिक नुकसान कितना हुआ।
