Mule Account गैंग का बड़ा खुलासा, जांच एजेंसियां अलर्ट!!!
₹1,000 करोड़ के ‘म्यूल अकाउंट’ घोटाले की जांच अब TGCSB के हाथों में, साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क आया सामने
हैदराबाद: तेलंगाना में सामने आए लगभग ₹1000 करोड़ के कथित म्यूल अकाउंट (Mule Account) साइबर फ्रॉड की जांच अब तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) को सौंप दी गई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह मामला केवल कुछ बैंक खातों तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर में फैले ऐसे नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है, जो साइबर ठगी से कमाए गए पैसों को एक खाते से दूसरे खाते में भेजकर उनका असली स्रोत छिपाते हैं।
इस मामले की शुरुआत खम्मम जिले में दर्ज दो साइबर ठगी के मामलों से हुई। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को कई ऐसे बैंक खातों का पता चला जिनका इस्तेमाल केवल ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच स्थानीय पुलिस से लेकर TGCSB को सौंप दी गई।
म्यूल अकाउंट क्या होता है?
म्यूल अकाउंटवह बैंक खाता होता है जिसका उपयोग अपराधी चोरी या साइबर ठगी से आए पैसों को छिपाने के लिए करते हैं।
ऐसे खाते कई तरीकों से इस्तेमाल किए जाते हैं—
- कमीशन देने का लालच देकर किसी व्यक्ति का बैंक खाता किराये पर लेना।
- बेरोजगार युवाओं को “पार्ट टाइम इनकम” के नाम पर खाता उपलब्ध कराने के लिए तैयार करना।
- गरीब या अनजान लोगों के नाम पर खाते खुलवाना।
- फर्जी दस्तावेजों या नकली कंपनियों के जरिए खाते संचालित करना।
जब किसी व्यक्ति से ऑनलाइन ठगी होती है, तो पैसा सीधे अपराधी के खाते में नहीं जाता। पहले वह कई अलग-अलग म्यूल अकाउंट में भेजा जाता है। इससे पुलिस के लिए असली अपराधी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
जांच में अब क्या होगा?
TGCSB अब कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करेगी—
- कितने बैंक खाते इस नेटवर्क में शामिल हैं।
- खाते किसके नाम पर खोले गए।
- खाते उपलब्ध कराने वाले एजेंट कौन हैं।
- किन राज्यों तक यह नेटवर्क फैला हुआ है।
- पैसा देश के भीतर घुमाया गया या विदेश भी भेजा गया।
- क्या किसी बैंक कर्मचारी या फिनटेक एजेंट की लापरवाही या मिलीभगत रही।
यदि जांच में संगठित गिरोह की पुष्टि होती है, तो कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में शामिल हो सकती हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं म्यूल अकाउंट?
भारत में डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों ने म्यूल अकाउंट का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
आज लगभग हर बड़े साइबर फ्रॉड में इनका उपयोग देखा जा रहा है, जैसे—
- डिजिटल अरेस्ट स्कैम
- निवेश (Investment) फ्रॉड
- फर्जी ट्रेडिंग ऐप
- फर्जी लोन ऐप
- UPI और इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड
- OTP ठगी
- सोशल मीडिया और WhatsApp स्कैम
साइबर अपराधी एक ही दिन में ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर जांच एजेंसियों के लिए पैसों का पता लगाना बेहद कठिन बना देते हैं।
देशभर में चल रही है कार्रवाई
केंद्र सरकार के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) और विभिन्न राज्यों की साइबर पुलिस लगातार म्यूल अकाउंट नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही हैं।
हाल के महीनों में कई राज्यों में हजारों संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। उत्तर प्रदेश की “ऑपरेशन साइ-वज्र” जैसी कार्रवाई में भी बड़ी संख्या में म्यूल अकाउंट की पहचान कर करोड़ों रुपये फ्रीज किए गए थे। इसी तरह तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में भी ऐसे नेटवर्क के खिलाफ लगातार अभियान चल रहे हैं।
RBI और बैंकों की चेतावनी
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और बैंक समय-समय पर ग्राहकों को चेतावनी देते रहे हैं कि—
- अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें।
- ATM कार्ड, चेकबुक, पासबुक, UPI या नेट बैंकिंग की जानकारी साझा न करें।
- कमीशन या नौकरी के नाम पर बैंक खाता उपलब्ध कराने वालों से सावधान रहें।
यदि किसी व्यक्ति के खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध में होता है, तो जांच के दौरान उस खाताधारक से भी पूछताछ हो सकती है। कई मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है।
आम लोगों के लिए सबसे बड़ी सीख
यदि कोई व्यक्ति कहे—
- “बस कुछ दिनों के लिए अपना बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने दो।”
- “हर महीने कमीशन मिलेगा।”
- “ATM कार्ड और चेकबुक दे दो, अच्छी कमाई होगी।”
- “ऑनलाइन KYC या बिजनेस के लिए आपका अकाउंट चाहिए।”
तो तुरंत मना कर दें।
कुछ हजार रुपये कमाने के लालच में आपका बैंक खाता करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का हिस्सा बन सकता है।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
- अपना बैंक खाता कभी किराये पर न दें।
- ATM कार्ड, PIN, OTP और UPI PIN किसी से साझा न करें।
- संदिग्ध लेन-देन दिखाई दे तो तुरंत बैंक को सूचना दें।
- साइबर ठगी होने पर बिना देरी 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।
- राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
- बैंक खाते में आने-जाने वाले लेन-देन पर नियमित नजर रखें।
निष्कर्ष
₹1000 करोड़ से जुड़े इस कथित म्यूल अकाउंट नेटवर्क की जांच अब विशेषज्ञ साइबर एजेंसी के हाथ में है। यदि जांच में पूरे गिरोह का खुलासा होता है, तो यह भारत के सबसे बड़े साइबर मनी-रूटिंग नेटवर्क में से एक साबित हो सकता है। यह मामला केवल तेलंगाना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है कि बैंक खाता किराये पर देना या किसी अनजान व्यक्ति को उसका उपयोग करने देना गंभीर कानूनी और आर्थिक जोखिम पैदा कर सकता है। डिजिटल युग में बैंक खाता केवल आपकी संपत्ति नहीं, बल्कि आपकी कानूनी जिम्मेदारी भी है।
