दिल्ली पुलिस ने पकड़ा फर्जी लोन और स्कॉलरशिप का ठगी नेटवर्क, दक्षिण भारत के लोग बने निशाना!!!
दिल्ली पुलिस ने पकड़ा फर्जी लोन और स्कॉलरशिप का ठगी नेटवर्क, दक्षिण भारत के लोग बने निशाना…….
खबर एक नज़र में
दिल्ली पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क लोन, स्कॉलरशिप और दूसरे आर्थिक फायदों का झांसा देकर लोगों को ठगता था, खासकर दक्षिण भारत में। इस मामले में चार लोग गिरफ्तार हुए हैं।
पुलिस को सुराग कैसे मिला?
दिल्ली के वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन की टीम राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर आई शिकायतें देख रही थी। इसी दौरान उसे स्कॉलरशिप, लोन और आर्थिक मदद के नाम पर हुई ठगी के मामले दिखे।
जांच में विकासपुरी की कर्नाटक बैंक शाखा का एक खाता तीन साइबर शिकायतों से जुड़ा मिला। खाते और उससे जुड़े सिम कार्ड की पड़ताल करने पर पुलिस अमित कपूर तक पहुंची, जो खाता संभालता था और पीड़ितों से आया पैसा निकलवाने में मदद करता था।
कौन पकड़ा गया?
पुलिस ने अमित कपूर, शिवा सिंह चौधरी और एस. गौरव उर्फ अप्पू को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि गौरव एक कड़ी का काम करता था। वह खाते का इंतज़ाम करने वालों को दक्षिण भारत के पीड़ितों को फोन करने वाले कॉलिंग ग्रुप से जोड़ता था। चौथे आरोपी का नाम जो रिपोर्टें मुझे मिलीं उनमें साफ नहीं था।
मामले में FIR संख्या 56/2026 दर्ज हुई। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(2), 318(4), 317(2), 61(2) और 3(5) लगाई गई हैं। टीम की अगुवाई साइबर थाना वेस्ट के SHO इंस्पेक्टर विकास कुमार बुलडक ने की।
पुलिस को क्या-क्या मिला?
पुलिस ने 12 स्मार्टफोन, 9 कीपैड फोन, 10 नोटपैड, 5 रजिस्टर, एक डेबिट कार्ड, दो चेकबुक और 45,170 रुपये नकद बरामद किए। नोटपैड और रजिस्टरों में ग्राहकों और संभावित पीड़ितों का ब्योरा लिखा था।
ठगी कैसे होती थी?
- लालच देना: पीड़ित को फोन आता था कि उसकी स्कॉलरशिप या लोन मंज़ूर हो गया है।
- पैसा मांगना: फिर “प्रोसेसिंग फीस” या “टैक्स” के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे।
- किराए का खाता: पैसा ठग के अपने नाम के खाते में नहीं जाता था। वह दूसरे लोगों के खातों में जाता था।
- पैसा निकालना: उन खातों से कैश निकालकर गैंग में बांटा जाता था।
इस तरीके में पुलिस के लिए असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
खास शब्द
- NCRP: सरकार का राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, जहां ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज होती है।
- म्यूल अकाउंट (Mule Account): ऐसा बैंक खाता जिसका इस्तेमाल ठगी का पैसा घुमाने या निकालने के लिए होता है। खाताधारक कभी जानबूझकर, कभी कमीशन के लालच में और कभी अनजाने में इसमें शामिल होता है।
- BNS: भारतीय न्याय संहिता, जिसने भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ली है।
- FIR: पुलिस में दर्ज होने वाली पहली औपचारिक रिपोर्ट।
एक जुड़ा हुआ मामला, पर अलग केस
एक दिन पहले, 30 अक्टूबर को दिल्ली के ही ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर थाने ने तमिलनाडु के लोगों को निशाना बनाने वाली एक स्कॉलरशिप ठगी पकड़ी। यह अलग FIR है, पर तरीका वही है।
मामला तमिलनाडु के मुथु कुमार की शिकायत से शुरू हुआ, जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप का ऑफर मिला था। उनसे 1 सितंबर को करीब 17,989 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए। पुलिस ने दो लोगों को पकड़ा और एक मोबाइल बरामद किया, जिसमें करीब 54,000 लोगों के संपर्कों का डेटा था। पुलिस ने यह जांच बैंक रिकॉर्ड, ATM के CCTV फुटेज और डिजिटल सबूतों से की।
इन 54,000 नंबरों से समझ आता है कि ठग पहले लोगों की बड़ी लिस्ट बनाते हैं और फिर उन्हें बार-बार फोन करते हैं।
विश्लेषण: यह खबर क्या बताती है?
1. ठगी अब “फैक्टरी” की तरह चलती है। कोई खाते जुटाता है, कोई सिम, कोई कॉल करता है और कोई पैसा निकालता है। हर आदमी सिर्फ अपना हिस्सा जानता है, इसलिए पूरा नेटवर्क पकड़ना कठिन होता है।
2. पुलिस अब पैसे का पीछा करती है। दोनों मामलों में शिकायत से खाता मिला, खाते से सिम और सिम से आरोपी। यानी “फॉलो द मनी” तरीका काम कर रहा है।
3. यह दिल्ली के लिए नया पैटर्न नहीं है।
- जून 2025 में दिल्ली पुलिस ने एक अखिल भारतीय साइबर गिरोह पकड़ा था जो बैंक किट इस्तेमाल करता था। इसमें 15 लोग गिरफ्तार हुए और करीब पांच करोड़ रुपये का लेन-देन सामने आया।
- दिसंबर 2025 में दिल्ली पुलिस ने 50 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी मामले में 10 लोगों को पकड़ा। इसमें फर्जी लोन ऐप, नकली नौकरी के ऑफर और ऑनलाइन गेमिंग शामिल थे।
- अप्रैल 2026 में दिल्ली पुलिस ने फर्जी लोन ऐप चलाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह के छह लोगों को पकड़ा।
4. दक्षिण भारत क्यों निशाना बना? रिपोर्टों में इसकी साफ वजह नहीं बताई गई है, इसलिए यह अनुमान है। हो सकता है कि दूर के राज्य में बैठे पीड़ित भाषा और जानकारी की कमी के कारण दिल्ली पुलिस तक कम पहुंचते हों। इसे पक्का तथ्य न मानें।
बचाव के आसान तरीके
- सरकारी स्कॉलरशिप के लिए आवेदन सिर्फ National Scholarship Portal (scholarships.gov.in) या अपने स्कूल-कॉलेज के ज़रिए करें। फोन पर आए किसी अनजान आदमी को पैसा न भेजें।
- “लोन मंज़ूर हुआ, पहले फीस भरो” वाला फोन अक्सर ठगी का संकेत होता है।
- OTP, आधार, PAN या बैंक की जानकारी फोन पर किसी को न दें।
- अपना बैंक खाता किसी को “कमीशन” पर किराए पर न दें। ऐसा करने वाला खुद केस में फंस सकता है।
- ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रुकने की उम्मीद उतनी ज़्यादा है।
