₹1,500 की साड़ी खरीदने निकली महिला, Instagram के जाल में फंसी और कुछ घंटों में गंवा दिए ₹1.19 लाख!
₹1,500 की साड़ी के चक्कर में महिला ने गंवाए ₹1.19 लाख, Instagram Reel से शुरू हुआ साइबर फ्रॉड……
पुणे: ऑनलाइन खरीदारी में कुछ हजार रुपये बचाने या पसंद की चीज सस्ते में पाने की कोशिश कभी-कभी बड़ी आर्थिक ठगी में बदल सकती है। पुणे में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां 27 साल की एक महिला को ₹1,500 की साड़ी खरीदना भारी पड़ गया और साइबर ठगों ने उससे कुल ₹1,19,209 ट्रांसफर करा लिए।
मामला पिंपरी-चिंचवड़ के हिंजवड़ी पुलिस स्टेशन का है। महिला ने बुधवार को शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के मुताबिक, ठगी की शुरुआत Instagram पर दिखाई गई साड़ी की Reel से हुई थी।
Instagram Reel से WhatsApp तक पहुंचा मामला
पुलिस के अनुसार, 29 सितंबर को महिला ने Instagram पर “manish_saree” और “manish_saree_9” नाम के अकाउंट से कुछ साड़ियों की Reels देखीं। उसे लगा कि ये किसी कपड़े की दुकान के अकाउंट हैं।
महिला को एक साड़ी पसंद आई, जिसकी कीमत करीब ₹1,500 बताई गई थी। इसके बाद उसने Reel में दिए गए WhatsApp नंबर पर संपर्क किया।
यहीं से ठगी का असली खेल शुरू हुआ।
ठगों ने महिला को बैंक अकाउंट की जानकारी दी और साड़ी की कीमत ट्रांसफर करने को कहा। महिला ने करीब ₹1,500 भेज दिए। लेकिन इसके बाद उसे बताया गया कि तकनीकी समस्या के कारण कुछ और रकम भेजनी होगी और बाद में वह पैसा वापस कर दिया जाएगा।
महिला ने भरोसा करके अगली रकम भी भेज दी।
लेकिन पैसा वापस आने के बजाय ठगों ने एक के बाद एक नए बहाने बनाने शुरू कर दिए।
एक भुगतान के बाद लगातार बढ़ती गई मांग
पुलिस के मुताबिक, ठग अलग-अलग कारण बताकर महिला से पैसे ट्रांसफर करवाते रहे। हर बार उसे भरोसा दिलाया गया कि रकम बाद में वापस मिल जाएगी।
29 सितंबर की शाम 6 बजे से 8 बजे के बीच, महिला ने कुल 13 ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किए और अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹1,19,209 भेज दिए।
इसके बाद ठगों ने एक और मांग रखी। उन्होंने महिला से कहा कि अब उसे ₹16,706 GST के रूप में जमा करना होगा।
यहीं महिला को शक हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हो रही है। इसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया।
इस ठगी का सबसे बड़ा RED FLAG क्या था?
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पैटर्न दिखाई देता है—पहले छोटी रकम, फिर अतिरिक्त भुगतान का दबाव।
साइबर ठगी में अपराधी अक्सर शुरुआत में बहुत बड़ी रकम नहीं मांगते। पहले वे एक छोटा भुगतान करवाते हैं। इसके बाद किसी technical problem, refund, GST, verification, processing fee या दूसरे charge का बहाना बनाया जा सकता है।
इस मामले में भी शुरुआत करीब ₹1,500 से हुई, लेकिन कुछ ही घंटों में कुल नुकसान ₹1.19 लाख से ज्यादा हो गया।
यानी असली खतरा सिर्फ फर्जी Instagram अकाउंट नहीं था। खतरा उस भरोसे की सीढ़ी में था, जिसमें पीड़ित को बार-बार यह विश्वास दिलाया गया कि अगला भुगतान करने के बाद पहले के पैसे वापस मिल जाएंगे।
Social Media Shop को असली दुकान समझना महंगा पड़ सकता है
यह मामला ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े एक महत्वपूर्ण खतरे की ओर भी इशारा करता है।
Instagram पर किसी अकाउंट पर अच्छी तस्वीरें, Reels, कम कीमत और आकर्षक ऑफर दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि अकाउंट किसी वास्तविक दुकान या अधिकृत विक्रेता का ही है।
भारत सरकार के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की साइबर-सुरक्षा सामग्री भी लोगों को ऑनलाइन खरीदारी के दौरान भरोसेमंद वेबसाइटों और स्रोतों का इस्तेमाल करने तथा संदिग्ध लिंक और ऑनलाइन माध्यमों से सावधान रहने की सलाह देती है।
पुलिस ने क्या कार्रवाई शुरू की?
पुलिस ने इस मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और Information Technology Act के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस अब कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और Instagram अकाउंट्स की जांच कर रही है। मामले की जांच पुलिस सब-इंस्पेक्टर Mayur Patil कर रहे हैं।
आम आदमी के लिए 5 जरूरी सबक
1. Instagram Reel = Verified Shop नहीं
किसी सोशल मीडिया अकाउंट को दुकान मानने से पहले उसका पता, आधिकारिक वेबसाइट, ग्राहक समीक्षा और अन्य स्वतंत्र जानकारी जांचें।
2. एक बार भुगतान के बाद अचानक नए Charges मांगे जाएं तो रुक जाएं।
“Refund के लिए और पैसे भेजें”, “GST दो”, “Account activate करने के लिए payment करो” जैसे बहाने बड़ा RED FLAG हो सकते हैं।
3. WhatsApp पर मिले बैंक अकाउंट में तुरंत पैसा न भेजें।
खासकर तब, जब खरीदारी किसी अनजान सोशल मीडिया अकाउंट से शुरू हुई हो।
4. छोटी रकम देखकर सावधान रहना बंद न करें।
₹500 या ₹1,500 का शुरुआती भुगतान बाद में बड़ी ठगी का रास्ता बन सकता है।
5. पैसा चले जाने पर इंतजार न करें।
भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार, वित्तीय साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करना चाहिए और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। जल्दी रिपोर्ट करना महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
पुणे का यह मामला सिर्फ एक महिला के साथ हुई ₹1.19 लाख की ठगी नहीं है। यह बताता है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाला सस्ता ऑफर, फर्जी विक्रेता और बार-बार भुगतान का दबाव मिलकर किस तरह सामान्य ऑनलाइन खरीदारी को साइबर फ्रॉड में बदल सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर कोई ऑनलाइन seller आपके पैसे लेने के बाद लगातार नए कारण बताकर और रकम मांग रहा है, तो भुगतान रोककर उसकी स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है।
ऑनलाइन खरीदारी में सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि सामान सस्ता है या अकाउंट देखने में असली लगता है। यह भी देखना जरूरी है कि जिस व्यक्ति या व्यवसाय को पैसा भेज रहे हैं, वह वास्तव में वही है जिसका दावा किया जा रहा है या नहीं।
