AI खुद बन गया हैकर, मिनटों में हजारों को बनाता है निशाना, जागरूक रहिए वरना ठगी से बचना मुश्किल।
AI से साइबर हमले: अब हैकर का काम “AI एजेंट” कर रहे हैं……
मामला क्या है?
अब तक हैकिंग में इंसान को हर कदम खुद करना पड़ता था: ईमेल लिखना, कमजोरी खोजना, सिस्टम में घुसना। अब एजेंटिक AI (Agentic AI) आ गया है। यह ऐसा AI है जो खुद फैसला लेता है, खुद योजना बनाता है और बिना बार-बार इंसानी आदेश के काम पूरा करता है।
मलेशिया की The Edge की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे AI एजेंट खुद निर्देश तय कर सकते हैं, हालात के हिसाब से बदल सकते हैं और एक साथ कई निशानों पर हमला कर सकते हैं। यानी एक हैकर के पास अब “AI की पूरी फौज” हो सकती है।
खास शब्द (आसान भाषा में)
| शब्द | मतलब |
|---|---|
| Agentic AI | खुद सोचने और काम करने वाला AI |
| Phishing | नकली ईमेल या मैसेज से पासवर्ड और पैसे ठगना |
| Ransomware | आपका डेटा लॉक करके पैसे माँगने वाला वायरस |
| Bad Bots | इंटरनेट पर चलने वाले गलत मकसद के ऑटोमैटिक प्रोग्राम |
| Shadow AI | कर्मचारियों का बिना इजाजत इस्तेमाल किया गया AI टूल |
| Human-in-the-loop | AI के फैसलों पर इंसान की निगरानी |
आँकड़े क्या कहते हैं?
1. इंटरनेट पर आधे से ज्यादा ट्रैफिक बॉट्स का है।
Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया के वेब ट्रैफिक का 53% हिस्सा बॉट्स का था। इसमें 40% खराब या अनजान बॉट्स थे और 13% भरोसेमंद बॉट्स।
2. AI वाले बॉट हमले कई गुना बढ़े।
उसी रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में रोके गए AI-आधारित बॉट हमले पिछले साल से 12.5 गुना बढ़े, और कंपनियाँ औसतन रोज 2.5 करोड़ ऐसे हमले रोक रही थीं।
3. किन सेक्टर पर सबसे ज्यादा निशाना?
रिटेल सबसे ज्यादा निशाने पर है (20%), उसके बाद बिजनेस सर्विसेज और फाइनेंशियल सर्विसेज, दोनों 14% पर।
4. रैनसमवेयर में AI का दखल।
Malwarebytes की “State of Malware 2025” रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि करीब 80% रैनसमवेयर हमलों में अब किसी न किसी रूप में AI ऑटोमेशन इस्तेमाल हो रहा है।
5. फिशिंग अब भी सबसे बड़ा खतरा।
ESET के आँकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2024 से मई 2025 के बीच मलेशिया में पकड़े गए खतरों में लगभग 37% फिशिंग के थे। फर्क यह है कि अब AI से बने मैसेज ज्यादा असली और इंसानी लगते हैं।
चार्ट: 2025 में इंटरनेट ट्रैफिक
कुल वेब ट्रैफिक 2025 (बॉट्स का हिस्सा = 53%)
खराब/अनजान बॉट्स ████████████████████ 40%
भरोसेमंद बॉट्स ██████ 13%
(बाकी 47% इंसानी ट्रैफिक)विश्लेषण: यह खतरा पुराने खतरे से अलग क्यों है?
- रफ्तार: हमला मिनटों में हो सकता है, जबकि पहले इंसान को दिन लगते थे।
- पैमाना: एक ही समय में हजारों लोगों को निशाना बनाया जा सकता है।
- चालाकी: विशेषज्ञों के अनुसार हैकर अब सिर्फ अलग-अलग काम ऑटोमेट नहीं कर रहे, बल्कि पूरी फैसला लेने की प्रक्रिया ऑटोमेट कर रहे हैं, यानी ऐसे हमले जो सोच सकें, योजना बना सकें और खुद को बदल सकें।
- कम हुनर की जरूरत: CrowdStrike की रिसर्च के हवाले से कहा गया कि अब मामूली तकनीकी समझ वाला इंसान भी वह हमला कर सकता है जिसके लिए पहले सालों का हुनर चाहिए था।
- छिपा हुआ खतरा: रिपोर्ट के अनुसार जो AI ट्रैफिक पकड़ में आता है, वह शायद कुल खतरे का सिर्फ एक हिस्सा है। मतलब असली तस्वीर इससे बड़ी हो सकती है।
कंपनियाँ AI अपना भी रही हैं
Blueprism के सर्वे में दुनिया की 1,650 कंपनियों में से 29% पहले से एजेंटिक AI इस्तेमाल कर रही थीं और 44% इसे 2026 तक अपनाने की योजना बना रही थीं। यानी AI एक दोधारी तलवार है: बचाव में भी काम आता है और हमले में भी।
IBM मलेशिया के CTO का कहना है कि AI एजेंट को अपनाने वाली कंपनियों को उनकी जाँच, टेस्टिंग और नियंत्रण उतनी ही गंभीरता से करना चाहिए, और ज्यादातर संगठनों के पास AI को सँभालने या “शैडो AI” पकड़ने की व्यवस्था नहीं है।
सुरक्षा के लिए सोच बदलनी होगी
VCI Global की AI सिक्योरिटी अफसर Jane Teh के अनुसार अब यह पूछना काफी नहीं कि “क्या यह चीज खराब दिखती है?” बल्कि यह पूछना होगा कि “क्या इस यूजर या डिवाइस की गतिविधि समझ में आती है?”
KewMann के Kew Yoke Ling का सुझाव है कि सिस्टम अमल में तेज और ऑटोमैटिक हों, लेकिन निगरानी के स्तर पर पारदर्शी और जवाबदेह रहें, यानी “human-in-the-loop” मॉडल।
आम लोग क्या करें?
- अनजान लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक न करें, चाहे संदेश कितना भी असली लगे।
- कोई भी OTP, पासवर्ड या UPI PIN किसी को न बताएँ।
- हर अकाउंट पर दो-स्तरीय सुरक्षा (2FA) चालू रखें।
- आवाज या वीडियो कॉल पर पैसे माँगे जाएँ तो पहले दूसरे नंबर पर फोन करके पुष्टि करें, क्योंकि AI से आवाज और चेहरा नकली बनाया जा सकता है।
- फोन और ऐप समय पर अपडेट करें।
- भारत में साइबर ठगी की शिकायत 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर करें।
निष्कर्ष
AI खुद अच्छा या बुरा नहीं है। खतरा तब बढ़ता है जब निगरानी के बिना उसे ताकत दे दी जाए। आगे की लड़ाई “AI बनाम AI” की होगी, और आम लोगों के लिए सबसे मजबूत ढाल अब भी सावधानी और जागरूकता है।
