नौकरी चाहिए तो सावधान! दिल्ली में फर्जी प्लेसमेंट सेंटर का खुलासा, बेरोजगारों को बनाया जा रहा था निशाना!!!
नौकरी का सपना दिखाकर ठगी! दिल्ली में दो फर्जी जॉब कॉल सेंटर पकड़े गए, 11 लोग हिरासत में…….
नई दिल्ली: बेरोजगारी और नौकरी की तलाश को निशाना बनाकर चलाए जा रहे कथित फर्जी प्लेसमेंट नेटवर्क पर दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मध्य दिल्ली के रंजीत नगर, शादिपुर मेट्रो स्टेशन के पास एक ही इमारत में चल रहे दो संदिग्ध जॉब प्लेसमेंट कॉल सेंटरों का पता लगाया है। कार्रवाई के दौरान कुल 11 लोगों को हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने भी 5 अक्टूबर को अपनी प्रेस रिलीज में इस कार्रवाई की पुष्टि की है।
पुलिस के मुताबिक, कथित गिरोह का तरीका सीधा लेकिन काफी चालाक था। ऑनलाइन जॉब पोर्टल और रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म से नौकरी तलाशने वालों की जानकारी हासिल की जाती थी। इसके बाद उम्मीदवारों को फोन करके खुद को भर्ती करने वाली कंपनी या रिक्रूटर के तौर पर पेश किया जाता था।
फोन पर उम्मीदवार को आकर्षक नौकरी का ऑफर दिया जाता। जब सामने वाला नौकरी को लेकर उत्साहित हो जाता, तो उससे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस या किसी दूसरे बहाने से पैसे मांगे जाते थे।
पुलिस के अनुसार, अलग-अलग मामलों में ₹1,200, ₹1,400 और ₹3,500 तक की रकम मांगी गई। पैसा मिलने के बाद कथित ऑपरेटर कुछ दिनों तक उम्मीदवार से संपर्क बनाए रखते थे और नौकरी की प्रक्रिया आगे बढ़ने का भरोसा देते थे। इसके बाद संपर्क बंद कर दिया जाता था।
शादिपुर के पास एक ही इमारत में चल रहे थे दो सेंटर
पुलिस को 3 अक्टूबर को शादिपुर मेट्रो के पास एक संदिग्ध फर्जी प्लेसमेंट सेंटर की जानकारी मिली। इसके बाद तकनीकी जांच और फील्ड वेरिफिकेशन किया गया। पुलिस को उस जगह से बड़ी संख्या में संदिग्ध भर्ती कॉल किए जाने के संकेत मिले।
इसके बाद लाल रतन बिल्डिंग में छापा मारा गया। पहले सेंटर से चार महिलाओं और दो पुरुषों समेत छह लोगों को हिरासत में लिया गया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि उसी इमारत में एक दूसरा संदिग्ध प्लेसमेंट कॉल सेंटर भी चल रहा था। वहां पांच पुरुष कथित तौर पर कॉलिंग का काम कर रहे थे। उन्हें भी हिरासत में लिया गया। इस तरह दोनों कार्रवाई में कुल 11 लोग पुलिस की जांच के दायरे में आए।
कंप्यूटर, मोबाइल और नौकरी तलाशने वालों का डेटा बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने दोनों जगहों से कुल 13 कंप्यूटर सिस्टम और पांच मोबाइल फोन बरामद किए। इसके अलावा कॉलिंग सॉफ्टवेयर, नौकरी तलाशने वालों का डेटा, संपर्क रिकॉर्ड और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़ी डिजिटल सामग्री भी जब्त की गई।
दूसरे सेंटर में पुलिस को X-Lite नाम का VoIP सॉफ्टवेयर मिला। VoIP यानी इंटरनेट के जरिए फोन कॉल करने वाली तकनीक। इसका इस्तेमाल सामान्य कॉल की तरह उम्मीदवारों से संपर्क करने के लिए किया जा सकता है।
पुलिस के लिए एक और बात महत्वपूर्ण रही। पूछताछ के दौरान कथित ऑपरेटर कॉर्पोरेट ऑथराइजेशन लेटर, प्लेसमेंट एग्रीमेंट या वास्तविक रूप से उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने का रिकॉर्ड पेश नहीं कर सके। इसी आधार पर उनकी गतिविधियों की वैधता पर गंभीर सवाल उठे।
सबसे बड़ा सवाल: नौकरी तलाशने वालों का डेटा आया कहां से?
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू सिर्फ पैसे की ठगी नहीं, बल्कि Job Seeker Data है।
पुलिस के अनुसार, नौकरी तलाशने वालों के नाम और संपर्क संबंधी जानकारी का इस्तेमाल उन्हें सीधे फोन करने के लिए किया गया। रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया है कि डेटा ऑनलाइन जॉब-सर्च और रिक्रूटमेंट प्लेटफॉर्म से हासिल किया गया था। पुलिस ने Shine.com जैसे प्लेटफॉर्म से कथित रूप से प्राप्त डेटा के इस्तेमाल की भी बात कही है।
इसका मतलब यह है कि किसी व्यक्ति ने नौकरी पाने के लिए ऑनलाइन अपना मोबाइल नंबर या अन्य जानकारी दी और बाद में उसी जानकारी का इस्तेमाल उसके खिलाफ किया गया—तो डेटा खुद ठगी की शुरुआत का हथियार बन सकता है।
हालांकि, इस डेटा का वास्तविक स्रोत, उसे किसने उपलब्ध कराया और क्या वह अवैध तरीके से हासिल किया गया था, इसकी जांच अभी जारी है। इसलिए इस स्तर पर किसी विशेष प्लेटफॉर्म को डेटा लीक का जिम्मेदार बताना सही नहीं होगा।
यह ठगी कैसे काम करती है?
इस मामले से कथित ठगी का एक पूरा पैटर्न सामने आता है—
पहला कदम: नौकरी तलाशने वालों का डेटा हासिल करना।
दूसरा कदम: उन्हें सीधे फोन करना।
तीसरा कदम: आकर्षक नौकरी या अच्छी सैलरी का ऑफर देना।
चौथा कदम: रजिस्ट्रेशन या प्रोसेसिंग फीस मांगना।
पांचवां कदम: पैसा मिलने के बाद कुछ दिनों तक भरोसा बनाए रखना।
छठा कदम: आखिर में संपर्क बंद कर देना।
यानी ठगी की शुरुआत हमेशा बड़ी रकम से नहीं होती। कई बार छोटी रकम से शुरुआत करके पहले व्यक्ति का भरोसा जीता जाता है।
दिल्ली में ऐसा मामला पहले भी सामने आ चुका है
यह घटना अकेली नहीं है। सितंबर 2026 में दिल्ली पुलिस ने एक अन्य कथित फर्जी भर्ती रैकेट में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। उस मामले में नौकरी के अलग-अलग चरणों के नाम पर उम्मीदवारों से लगातार भुगतान कराने का आरोप था।
पुलिस के अनुसार, उम्मीदवारों से पहले ₹499 कूरियर चार्ज, फिर यूनिफॉर्म, लैपटॉप सिक्योरिटी, अकाउंट ओपनिंग, मेडिकल सिक्योरिटी और एफिडेविट जैसे अलग-अलग बहानों से पैसे मांगे गए। कुल रकम ₹25,999 तक पहुंचती थी। पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी जॉइनिंग लेटर और QR कोड भी बरामद किए थे।
इससे एक महत्वपूर्ण पैटर्न दिखाई देता है—फर्जी नौकरी का ऑफर → छोटी फीस → भरोसा → नई फीस → लगातार भुगतान।
नौकरी चाहने वालों के लिए सबसे जरूरी चेतावनी
अगर किसी कंपनी या रिक्रूटर की तरफ से आपको फोन आता है और कहा जाता है कि “नौकरी पक्की है, बस रजिस्ट्रेशन या प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी”, तो तुरंत पैसे न भेजें।
कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उसकी भर्ती प्रक्रिया जांचें। जिस व्यक्ति ने फोन किया है, उसके दिए मोबाइल नंबर के बजाय कंपनी के आधिकारिक संपर्क माध्यम से जानकारी लें।
अपना आधार, PAN, बैंक डिटेल, OTP, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी भी बिना सत्यापन साझा न करें।
सबसे महत्वपूर्ण बात—सिर्फ इसलिए किसी रिक्रूटर पर भरोसा न करें क्योंकि उसके पास आपका नाम, रिज्यूमे या आपकी नौकरी की पसंद से जुड़ी जानकारी मौजूद है। यह जानकारी किसी जॉब पोर्टल से भी हासिल की गई हो सकती है।
जांच अभी बाकी है—असली नेटवर्क कितना बड़ा है?
दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। अब जांचकर्ताओं के सामने कुछ बड़े सवाल हैं—इस नेटवर्क का असली संचालक कौन है? नौकरी तलाशने वालों का डेटा कहां से आया? कितने लोगों को फोन किया गया? कितने उम्मीदवारों से पैसे लिए गए? पैसा किन खातों में गया? और क्या इन दोनों सेंटरों के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था?
पुलिस जब्त किए गए कंप्यूटर, मोबाइल, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय जानकारी की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इस कथित नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और ठगी की कुल रकम का पता चल सकेगा।
आम आदमी के लिए सीधी बात
नौकरी के नाम पर फोन आए और पहले ही पैसे मांगे जाएं, तो सावधान हो जाइए।
असली नौकरी के नाम पर “रजिस्ट्रेशन फीस”, “प्रोसेसिंग फीस”, “सिक्योरिटी फीस” या किसी और बहाने से तुरंत भुगतान मांगना बड़ा रेड फ्लैग हो सकता है।
आज ठगों को आपके घर तक आने की जरूरत नहीं है। अगर उनके पास आपका नाम, मोबाइल नंबर और नौकरी की जानकारी है, तो वे फोन पर ही आपके भरोसे को निशाना बना सकते हैं।
नौकरी की जरूरत आपकी मजबूरी हो सकती है, लेकिन इसी मजबूरी को ठगों की कमाई का रास्ता मत बनने दीजिए।
