ऑनलाइन ट्रेडिंग में बड़े मुनाफे का झांसा, Facebook मैसेज से फंसे रिटायर्ड अधिकारी और खाते से निकले ₹40.75 लाख।
फेसबुक के एक मैसेज से शुरू हुआ निवेश का जाल, रिटायर्ड अधिकारी से ₹40.75 लाख की ठगी…..
लखनऊ: ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश से कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का लालच एक बार फिर साइबर ठगी का हथियार बना है। लखनऊ में यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के सेवानिवृत्त अधिकारी शिव कुमार गौतम कथित तौर पर इसी तरह के एक निवेश घोटाले का शिकार हुए और उनके साथ करीब ₹40.75 लाख की धोखाधड़ी हुई।
मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने 23 सितंबर 2026 को एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब उन बैंक खातों और लेनदेन की जांच कर रही है, जिनके जरिए रकम कथित तौर पर आरोपियों तक पहुंची।
शुरुआत फेसबुक के एक संदेश से हुई
पुलिस के अनुसार, शिव कुमार गौतम को Facebook के जरिए निवेश पर आकर्षक और ज्यादा रिटर्न देने का संदेश मिला था। संदेश में निवेश से अच्छा मुनाफा कमाने का दावा किया गया था।
गौतम ने जब दिए गए संपर्क नंबर पर बात की तो उन्हें ‘Exwell’ नाम की कंपनी से जुड़ी कथित निवेश योजनाओं के बारे में बताया गया।
यहीं से पूरा मामला सामान्य निवेश के बजाय एक ऐसे डिजिटल जाल में बदलता गया, जिसमें पीड़ित से अलग-अलग चरणों में पैसे जमा कराए गए।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने उन्हें निवेश के नाम पर कई बार रकम ट्रांसफर करने के लिए राजी किया। अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल रकम करीब ₹40.75 लाख तक पहुंच गई।
शक तब हुआ, जब पैसे निकालने के बजाय और पैसे मांगे गए
ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ अक्सर तब आता है, जब पीड़ित अपनी कथित कमाई निकालने की कोशिश करता है।
इस मामले में भी पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने निवेश के बाद लगातार अतिरिक्त रकम की मांग शुरू कर दी। यहीं गौतम को संदेह हुआ।
उन्होंने जब मामले की जानकारी जुटाई तो उन्हें एहसास हुआ कि वे संभवतः साइबर निवेश ठगी का शिकार हो चुके हैं।
इसके बाद उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब लेनदेन की कड़ियों और उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें रकम भेजी गई थी।
असली खतरा सिर्फ ‘फर्जी ट्रेडिंग ऐप’ नहीं है
इस घटना को केवल एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी मानना अधूरा होगा। इसमें एक बड़ा पैटर्न दिखाई देता है—सोशल मीडिया → निवेश का लालच → भरोसा बनाना → पैसा जमा कराना → निकासी में अड़चन → और पैसे की मांग।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने भी फर्जी ट्रेडिंग ऐप और सोशल मीडिया आधारित निवेश घोटालों को लेकर निवेशकों को चेतावनी दी है।
SEBI के अनुसार, ठग सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों को आकर्षित कर सकते हैं। इसके बाद कथित ‘एक्सपर्ट’ या सलाहकार भरोसा बनाने के लिए नकली मुनाफे, सफल ट्रेड और स्क्रीनशॉट दिखा सकते हैं। कई मामलों में फर्जी प्लेटफॉर्म पर मुनाफा दिखाई देता है, लेकिन जब निवेशक पैसा निकालना चाहता है तो उससे अतिरिक्त शुल्क या और निवेश की मांग की जाती है।
यानी स्क्रीन पर दिखाई देने वाला मुनाफा जरूरी नहीं कि असली पैसा हो।
₹40 लाख की ठगी में सबसे बड़ा सबक क्या है?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि शुरुआत किसी अनजान वेबसाइट पर जाकर निवेश करने से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर मिले एक संदेश से हुई बताई गई है।
आज सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को देखकर यह मान लेना आसान है कि सामने वाला निवेश विशेषज्ञ है। लेकिन उसकी प्रोफाइल, मुनाफे के स्क्रीनशॉट या किसी ग्रुप में दिखाई देने वाले सफल ट्रेड अपने-आप में उसकी विश्वसनीयता साबित नहीं करते।
SEBI साफ तौर पर निवेशकों को गारंटीड या असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न के दावों से सावधान रहने को कहता है। नियामक यह भी बताता है कि निवेश संबंधी सलाह देने वाले व्यक्ति या संस्था की वैधता और पंजीकरण की जांच करना जरूरी है।
‘गारंटीड रिटर्न’ सबसे बड़ा रेड फ्लैग
शेयर बाजार में मुनाफे की गारंटी नहीं होती। बाजार में जोखिम मौजूद रहता है।
इसलिए अगर कोई व्यक्ति कहता है—
“रिटर्न पक्का है”
“नुकसान की कोई संभावना नहीं”
“कुछ ही दिनों में पैसा दोगुना होगा”
“अभी पैसा लगाइए, मौका निकल जाएगा”
तो ऐसे दावे को निवेश का अवसर समझने से पहले उसकी स्वतंत्र जांच करना जरूरी है।
SEBI के मुताबिक असामान्य रूप से ज्यादा या गारंटीड रिटर्न, अपंजीकृत संस्थाएं, बिना लाइसेंस वाले सलाहकार और पैसे निकालने में लगातार परेशानी जैसे संकेत निवेश धोखाधड़ी की ओर इशारा कर सकते हैं।
2026 में सुरक्षा की एक अतिरिक्त व्यवस्था भी
निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि 25 मार्च 2026 को SEBI ने Google Play Store पर SEBI-पंजीकृत ब्रोकरों के स्टॉक ट्रेडिंग ऐप्स के लिए ‘Verified Label’ शुरू करने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य निवेशकों को वास्तविक और पंजीकृत ट्रेडिंग ऐप की पहचान करने में मदद करना है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर निवेश संबंधी संदेश अपने-आप सुरक्षित है। बल्कि निवेशक को ऐप, ब्रोकर, सलाहकार और भुगतान प्राप्त करने वाले खाते—सभी की स्वतंत्र जांच करनी चाहिए।
अगर ठगी हो जाए तो सबसे जरूरी काम
साइबर फ्रॉड में समय बहुत महत्वपूर्ण है।
भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल किया जा सकता है। ऑनलाइन शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है।
ठगी के बाद पीड़ित को:
- तुरंत 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।
- National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
- अपने बैंक/पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तुरंत सूचना देनी चाहिए।
- बैंक ट्रांजैक्शन, UTR/Transaction ID, मोबाइल नंबर, चैट, स्क्रीनशॉट और संबंधित अकाउंट की जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए।
- ठग से आगे कोई भुगतान नहीं करना चाहिए, चाहे वह पैसा निकालने के नाम पर टैक्स, फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या अन्य चार्ज क्यों न मांगे।
सरकारी जानकारी के मुताबिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग का उद्देश्य ठगी की रकम को आगे जाने से रोकने और संबंधित वित्तीय संस्थानों के साथ कार्रवाई में मदद करना है।
असली सवाल: भरोसा किस पर करें?
लखनऊ का यह मामला दिखाता है कि साइबर ठगी अब हमेशा डराने या धमकाने से ही नहीं होती। कई बार ठग मुनाफे का सपना दिखाकर व्यक्ति को अपने जाल में फंसाते हैं।
इसलिए निवेश से पहले तीन सवाल जरूर पूछें:
कौन निवेश करवा रहा है?
किस संस्था या ब्रोकर के जरिए निवेश हो रहा है?
पैसा आखिर किस खाते में जा रहा है?
अगर इन तीन सवालों के स्पष्ट और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जवाब नहीं मिलते, तो पैसा ट्रांसफर करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
लखनऊ के इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है। इसलिए ‘Exwell’ या किसी अन्य संबंधित व्यक्ति/संस्था के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने से पहले अंतिम अपराध-सिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पुलिस लेनदेन और बैंक खातों की कड़ियों को खंगाल रही है।
