UPI से एक झटके में ₹1.13 लाख साफ, महिला को बैंक पहुंचने पर पता चला खाते में कुछ नहीं बचा।
UPI Fraud: महिला के बैंक खाते से ₹1.13 लाख गायब, तीन लेनदेन के बाद सामने आया साइबर फ्रॉड….
पंचकूला: डिजिटल पेमेंट की सुविधा ने रोजमर्रा के लेनदेन को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसी के साथ UPI Fraud का खतरा भी लगातार सामने आ रहा है। पंचकूला के सेक्टर-11 की रहने वाली एक महिला के Canara Bank खाते से कथित तौर पर तीन अनधिकृत UPI लेनदेन के जरिए कुल ₹1.13 लाख निकाल लिए गए। महिला ने पुलिस को बताया कि उसने इन लेनदेन को न तो मंजूरी दी और न ही खुद किए थे।
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ज्योति शर्मा, जो गृहिणी हैं, अपने सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी पति के साथ संयुक्त बैंक खाता चलाती हैं। बैंक रिकॉर्ड में महिला और उनके पति, दोनों के मोबाइल नंबर पंजीकृत बताए गए हैं। महिला ने शिकायत में किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनकी UPI सुविधा तक कथित रूप से अनधिकृत पहुंच बनाए जाने की आशंका जताई है।
ATM से पैसे निकालने पहुंचीं तो सामने आया मामला
शिकायत के मुताबिक, 13 सितंबर को ज्योति अपनी बहू शिल्पा शर्मा के साथ सेक्टर-11 स्थित Canara Bank के ATM पर पैसे निकालने पहुंचीं। ATM में कार्ड डालने के बाद खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने का संदेश दिखाई दिया।
महिला ने इसके बाद दूसरे ATM से भी पैसे निकालने की कोशिश की, लेकिन वहां भी उन्हें इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा। उस दिन रविवार होने के कारण वह तत्काल बैंक जाकर खाते की स्थिति की जांच नहीं करा सकीं।
अगले दिन 14 सितंबर को वह अपनी बहू के साथ Canara Bank की सेक्टर-11 शाखा पहुंचीं। बैंक से खाते में पैसे कम होने का कारण पूछा गया तो कथित तौर पर उन्हें पता चला कि उनके खाते से 11 सितंबर को तीन UPI लेनदेन किए गए थे।
महिला का कहना है कि इन तीनों लेनदेन के लिए उन्होंने कोई अनुमति नहीं दी थी। इन लेनदेन के जरिए कुल ₹1.13 लाख खाते से निकल गए।
साइबर पोर्टल पर शिकायत, पुलिस ने दर्ज किया केस
मामले की जानकारी मिलने के बाद ज्योति शर्मा ने 14 और 15 सितंबर को राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई और रकम वापस दिलाने की मांग की।
इसके बाद 17 सितंबर को पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर महिला के UPI खाते या उससे जुड़े डिजिटल माध्यम तक पहुंच कैसे बनाई गई और रकम किस खाते में पहुंची।
मामला सिर्फ UPI का नहीं, डिजिटल सुरक्षा का भी है
इस घटना का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि महिला के अनुसार उन्होंने खुद ये भुगतान नहीं किए थे। इसलिए जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि UPI credentials, मोबाइल, SIM, बैंकिंग ऐप या किसी अन्य डिजिटल माध्यम का दुरुपयोग हुआ या नहीं।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कथित धोखाधड़ी के पीछे कौन-सा तरीका इस्तेमाल किया गया था। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि मामला किसी खास प्रकार के malware, phishing link, SIM fraud या UPI PIN चोरी से जुड़ा था।
यही सावधानी जरूरी है: बिना पुलिस जांच पूरी हुए किसी विशेष साइबर तकनीक को इस घटना का कारण बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
UPI को लेकर एक जरूरी तथ्य
NPCI के अनुसार UPI एक तत्काल भुगतान प्रणाली है, जो बैंक खातों के बीच पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देती है। सामान्य UPI लेनदेन को अधिकृत करने के लिए UPI PIN की आवश्यकता होती है और NPCI स्पष्ट रूप से कहता है कि UPI PIN किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए।
NPCI यह भी चेतावनी देता है कि साइबर ठग कई बार फर्जी लिंक, QR कोड, अनजान ऐप, फर्जी कैशबैक, सोशल मीडिया संदेश और अन्य social-engineering तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। खास तौर पर QR कोड के मामले में NPCI बताता है कि QR स्कैन करके UPI PIN डालना सामान्यतः पैसे भेजने के लिए होता है, पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं।
पैसा कट जाए तो सबसे जरूरी है समय बर्बाद न करना
इस तरह के मामले में शिकायत दर्ज कराने में देरी नुकसान बढ़ा सकती है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की सूचना 1930 हेल्पलाइन पर दी जा सकती है और शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था के साथ समन्वय करके धोखाधड़ी की रकम को आगे जाने से रोकने की कोशिश करना है। उपलब्ध सरकारी निर्देशों में पीड़ित से बैंक/वॉलेट की जानकारी, खाता या UPI ID, transaction ID, तारीख और उपलब्ध स्क्रीनशॉट जैसी जानकारी मांगी जा सकती है।
हाल ही में हरियाणा के एक अलग साइबर फ्रॉड मामले में भी 1930 पर तत्काल शिकायत के बाद बैंकिंग चैनल के साथ तेजी से कार्रवाई की गई और पुलिस के अनुसार ₹1 करोड़ की कथित धोखाधड़ी वाली रकम को आगे जाने से पहले सुरक्षित किया जा सका। यह उदाहरण दिखाता है कि वित्तीय साइबर अपराध में शुरुआती समय कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।
आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
- UPI PIN कभी किसी को न बताएं। बैंक या UPI ऐप का अधिकारी भी इसे मांगने का दावा करे तो PIN साझा न करें।
- पैसे प्राप्त करने के नाम पर QR कोड स्कैन करके PIN न डालें।
- अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए APK, लिंक या ऐप को डाउनलोड न करें।
- बैंक खाते में अनजान लेनदेन दिखते ही तुरंत बैंक को सूचित करें।
- वित्तीय साइबर फ्रॉड होने पर 1930 पर तत्काल शिकायत करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर रिपोर्ट दर्ज करें।
निष्कर्ष
पंचकूला की यह घटना यह सवाल भी उठाती है कि अगर खाताधारक ने भुगतान अधिकृत नहीं किया था, तो कथित तौर पर खाते से तीन UPI लेनदेन कैसे हो गए। इसका वास्तविक जवाब पुलिस की तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल सबसे अहम संदेश यही है कि अनधिकृत डिजिटल लेनदेन दिखने पर इंतजार न करें। बैंक को तुरंत सूचना दें, UPI/बैंकिंग चैनल पर शिकायत दर्ज करें और 1930 पर साइबर फ्रॉड की रिपोर्ट करें। तेज शिकायत से संबंधित संस्थाओं को रकम के आगे ट्रांसफर को रोकने की कोशिश करने का अवसर मिल सकता है।
