निवेश से पहले सावधान, कोलकाता पुलिस ने ऐसे 50 ऐप्स चिन्हित किए जिनके जरिए साइबर ठगी का खतरा बताया गया है।
50 निवेश ऐप पर पुलिस की नजर, कहीं आपका पैसा भी तो नहीं फंसा?
कोलकाता: ऑनलाइन निवेश के नाम पर तेजी से बढ़ रही साइबर ठगी को लेकर कोलकाता पुलिस और बिधाननगर सिटी पुलिस ने लोगों के लिए एक अहम चेतावनी जारी की है। पुलिस ने करीब 50 ऐसे मोबाइल ऐप्स की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को निवेश के नाम पर फंसाने में किया जा रहा है। इनमें कथित तौर पर ट्रेडिंग, फॉरेक्स और माइक्रो-इन्वेस्टमेंट से जुड़े प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, इस तरह की साइबर ठगी से नागरिकों को इस साल औसतन हर महीने करीब 14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अगस्त में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा बताता है कि निवेश के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी अब केवल व्यक्तिगत धोखे का मामला नहीं रह गई है, बल्कि बड़े पैमाने पर चलने वाला साइबर अपराध बनती जा रही है।
किन ऐप्स और प्लेटफॉर्म को लेकर चेतावनी?
पुलिस की सार्वजनिक एडवाइजरी में कई ऐसे प्लेटफॉर्म के नाम सामने आए हैं, जिनके बारे में लोगों को सावधानी बरतने को कहा गया है। रिपोर्ट में OctaFX, Olymp Trade, Binomo, IQ Option, Expert Option, Quotex, Pocket Option, Exness, Guru Trade7, Rubik Trade, Bric Trade, Trust Trade, Dream Trade, Mini Trade, Gate Trade, Ava Trade, eToro, FBS और TP Global FX समेत कई नाम शामिल हैं।
महत्वपूर्ण बात: किसी ऐप का पुलिस की चेतावनी में नाम आना और किसी विशेष कंपनी या प्लेटफॉर्म के खिलाफ अदालत में अपराध साबित होना एक ही बात नहीं है। इसलिए निवेशक किसी भी प्लेटफॉर्म के बारे में अंतिम निर्णय लेने से पहले उसके नियामकीय स्टेटस और आधिकारिक जानकारी की स्वतंत्र रूप से जांच करें।
ठगी का तरीका समझिए
साइबर अपराधियों का तरीका अक्सर एक जैसा होता है। पहले लोगों को WhatsApp, Telegram या सोशल मीडिया के जरिए निवेश का ऑफर दिया जाता है। उन्हें बड़े मुनाफे के स्क्रीनशॉट, कथित सफल निवेशकों की कहानियां और VIP Stock Tips जैसी चीजें दिखाई जाती हैं।
इसके बाद पीड़ित को किसी ऐप या वेबसाइट पर अकाउंट बनाने के लिए कहा जाता है। शुरुआत में ऐप के अंदर निवेश पर बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जा सकता है। इससे व्यक्ति को लगता है कि उसका पैसा सही जगह लगाया गया है।
यहीं से ठगी का अगला चरण शुरू होता है।
जब व्यक्ति ज्यादा रकम जमा कर देता है और पैसा निकालने की कोशिश करता है तो कथित ठग Processing Fee, Tax, Verification Charge या Account Unlock Fee के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांग सकते हैं। कई मामलों में रकम देने के बाद भी निकासी नहीं होती और संपर्क अचानक बंद हो जाता है। पुलिस ने इसी तरह के पैटर्न को लेकर लोगों को सतर्क किया है।
असली खतरा ऐप से ज्यादा ‘फर्जी भरोसे’ का है
ऐसे मामलों में साइबर अपराधी सिर्फ एक ऐप नहीं बेचते, बल्कि पूरा विश्वास का माहौल तैयार करते हैं। सोशल मीडिया ग्रुप में कुछ लोगों को पहले से मुनाफा कमाते हुए दिखाया जाता है। फिर नए व्यक्ति को भी निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
कभी-कभी अपराधी खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ, ट्रेडिंग एक्सपर्ट या वित्तीय सलाहकार बताकर संपर्क करते हैं। पुलिस ने खास तौर पर ऐसे ऑफर से बचने को कहा है जिनमें बिना जोखिम के निश्चित या बहुत ज्यादा रिटर्न का दावा किया जाता है।
SEBI और RBI के नाम का भी दुरुपयोग
कोलकाता में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं जहां साइबर ठगों ने SEBI और RBI के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके लोगों को निवेश के लिए भरोसा दिलाने की कोशिश की। जनवरी 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे मामलों में लोगों को सोशल मीडिया, WhatsApp, Telegram और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से निशाना बनाया गया था। एक मामले में एक व्यक्ति से ₹1.8 करोड़ और दूसरे मामले में ₹27 लाख की ठगी की सूचना सामने आई थी।
इसलिए किसी दस्तावेज पर RBI या SEBI का लोगो दिखाई देना अपने आप में उसकी प्रामाणिकता का प्रमाण नहीं है।
सरकार भी फर्जी मोबाइल ऐप्स पर कार्रवाई कर रही है
यह समस्या केवल कोलकाता तक सीमित नहीं है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) के जरिए फर्जी और गैरकानूनी मोबाइल ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
सरकार ने अगस्त 2026 में बताया था कि 30 जून 2026 तक 3,718 मोबाइल ऐप्स, जिनमें फर्जी लोन ऐप्स भी शामिल हैं, को संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत ब्लॉक किया जा चुका था। सरकार ने साइबर अपराध की शिकायतों के लिए National Cyber Crime Reporting Portal भी उपलब्ध कराया है।
इससे साफ है कि फर्जी ऐप्स की समस्या केवल निवेश तक सीमित नहीं है। साइबर अपराधी अलग-अलग तरह के ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके लोगों के पैसे और निजी जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
कोलकाता में निवेश ठगी की जांच भी जारी
इसी बीच सितंबर 2026 में Enforcement Directorate (ED) ने कोलकाता और मध्य प्रदेश के इंदौर में 17 स्थानों पर तलाशी की। यह कार्रवाई कथित निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई थी। जांच में कुछ कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों के परिसरों को शामिल किया गया था।
यह मामला दिखाता है कि ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी में पैसा केवल एक बैंक खाते से दूसरे खाते में जाने तक सीमित नहीं रहता। जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में मनी ट्रेल, बैंक खातों, कंपनियों और डिजिटल लेनदेन की भी पड़ताल करती हैं।
आम आदमी इन 7 संकेतों से पहचान सकता है खतरा
1. Guaranteed Return: कोई भी असली निवेश बाजार के जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं करता।
2. WhatsApp/Telegram से अचानक ऑफर: अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए निवेश लिंक से सावधान रहें।
3. VIP Trading Group: केवल ग्रुप में दिख रहे कथित मुनाफे को प्रमाण न मानें।
4. Unknown APK: किसी व्यक्ति के भेजे लिंक से APK डाउनलोड न करें।
5. पहले छोटा मुनाफा, फिर बड़ा निवेश: शुरुआत में निकासी संभव होने से प्लेटफॉर्म जरूरी नहीं कि सुरक्षित हो।
6. पैसा निकालने पर नया शुल्क: Tax, verification या processing fee के नाम पर बार-बार भुगतान मांगा जाए तो यह बड़ा खतरा है।
7. Regulatory Verification नहीं: निवेश या ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की वैधता और संबंधित नियामक के साथ उसका पंजीकरण स्वतंत्र रूप से जांचें।
निष्कर्ष
निवेश के नाम पर साइबर ठगी का सबसे खतरनाक हिस्सा यह है कि अपराधी पहले व्यक्ति से पैसा नहीं, भरोसा लेते हैं। फर्जी मुनाफा दिखाकर भरोसा बढ़ाया जाता है और फिर निवेश की रकम बढ़वाई जाती है।
इसलिए किसी भी ऐप पर पैसा डालने से पहले केवल उसके इंटरफेस, विज्ञापन या सोशल मीडिया ग्रुप को देखकर भरोसा न करें। कंपनी की वैधता, नियामकीय पंजीकरण, ऐप का आधिकारिक स्रोत और निकासी की वास्तविक प्रक्रिया की जांच करना जरूरी है।
अगर साइबर ठगी हो चुकी है तो देरी किए बिना 1930 साइबर हेल्पलाइन और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत करना महत्वपूर्ण है। जितनी जल्दी शिकायत होगी, रकम के लेनदेन को रोकने या ट्रेस करने की संभावना के लिए उतनी जल्दी कार्रवाई शुरू की जा सकती है। कोलकाता पुलिस भी निवेश धोखाधड़ी और संदिग्ध लिंक से सावधान रहने की सलाह देती है।
