क्राइम ब्रांच के नाम पर बनाया दबाव, फर्जी कार्रवाई का डर दिखाकर लोगों से रकम वसूलने वाले दो आरोपी गिरफ्तार!!!
बस्ती में साइबर ठगी गिरोह का खुलासा, क्राइम ब्रांच का अफसर बनकर डराते थे आरोपी
बस्ती। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में पुलिस ने ऐसे साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो लोगों को फोन करके खुद को क्राइम ब्रांच या वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताता था और फिर झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठता था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क केवल बस्ती तक सीमित नहीं था और आरोपी देश के कई राज्यों में लोगों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आदित्य गुप्ता (28) और अजय सिंह चौहान (24) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार आदित्य गोंडा जिले के मसकनवा बाजार का रहने वाला है, जबकि अजय का संबंध कानपुर क्षेत्र से बताया गया है। बस्ती पुलिस ने 5 सितंबर को साइबर ठगी का मामला दर्ज करने के बाद जांच आगे बढ़ाई और दोनों आरोपियों तक पहुंची।
फोन नंबर से शुरू होती थी ठगी
पुलिस के मुताबिक आरोपियों का तरीका काफी चालाकी भरा था। वे पहले PhonePe या दूसरे UPI प्लेटफॉर्म पर मोबाइल नंबर डालकर यह पता करने की कोशिश करते थे कि नंबर किस व्यक्ति के नाम से जुड़ा है। इसके बाद उसी व्यक्ति को फोन कर खुद को लखनऊ क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते थे।
फोन पर पीड़ित को बताया जाता था कि उसके खिलाफ कथित तौर पर 42 पन्नों की CDR (Call Detail Record) सामने आई है। इसके बाद अश्लील वीडियो देखने और उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने जैसी बातें कहकर उसे डराया जाता था।
यहीं से शुरू होता था असली खेल। आरोपी कथित तौर पर पीड़ित को बताते थे कि अगर मामला अदालत तक गया तो लाखों रुपये खर्च होंगे, जबकि पुलिस स्तर पर इसे खत्म कराने के लिए कम रकम देनी होगी। पुलिस के अनुसार कुछ मामलों में करीब 4 लाख रुपये और 15 हजार रुपये जैसी रकम की मांग की गई। डर के कारण पीड़ित आरोपी के बताए बैंक खाते या UPI पर पैसे भेज देता था।
एक बार पैसे मिलने के बाद फिर बढ़ती थी मांग
गिरोह की रणनीति केवल एक बार पैसा लेने तक सीमित नहीं थी। पुलिस के अनुसार जब आरोपियों को अंदाजा हो जाता था कि पीड़ित के पास और पैसा है, तो वे अलग आवाज या Voice Changer का इस्तेमाल करके दोबारा संपर्क करते थे।
इस बार वे खुद को किसी और वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश करते और बताते कि मामला पहले बताए गए से भी गंभीर है। इस तरह पीड़ित पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता था और उससे अतिरिक्त रकम वसूलने की कोशिश की जाती थी।
पुलिस को जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपियों पर केवल इसी तरह की ठगी का आरोप नहीं है। पूछताछ में Digital Arrest जैसे साइबर अपराध और दूसरे तरीकों से ठगी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
बैंक खाते और SIM की व्यवस्था भी गिरोह का हिस्सा
जांच में सामने आया कि आरोपी बैंक खातों और SIM कार्ड की व्यवस्था भी करते थे, ताकि ठगी से मिली रकम को अलग-अलग खातों में पहुंचाया जा सके।
पुलिस के अनुसार आदित्य करीब दो वर्षों से साइबर अपराध में सक्रिय था। आरोप है कि वह अपने साथियों को बैंक खाते और SIM उपलब्ध कराता था और बदले में ठगी की रकम का करीब 30 प्रतिशत कमीशन लेता था। पुलिस ने यह भी बताया कि उसके पास 10 से 12 बैंक खातों की व्यवस्था थी और कथित तौर पर उसके भाई के नाम से जुड़े खाते तथा SIM का भी इस्तेमाल किया गया।
एक मामले में जौनपुर के एक व्यक्ति से 11 हजार रुपये ठगे जाने की बात भी जांच में सामने आई है। पुलिस के अनुसार जिन मामलों की जांच चल रही है, उनमें कुल करीब 3.23 लाख रुपये की ठगी सामने आई है। इनमें से 1.72 लाख रुपये होल्ड कराए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।
आरोपियों के पास से क्या मिला?
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 3 मोबाइल फोन, 5 SIM कार्ड, 4 ATM कार्ड, 2 चेकबुक, 2 पासबुक और 4,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। इन सामानों की जांच से पुलिस को कथित वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है।
असली खतरा डर पैदा करने वाली भाषा है
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ठगी के लिए किसी तकनीकी कमजोरी से ज्यादा डर और भरोसे का मनोवैज्ञानिक इस्तेमाल किया गया। आरोपी पुलिस, क्राइम ब्रांच, CDR और कानूनी कार्रवाई जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके पीड़ित को इतना घबरा देते थे कि वह बिना सत्यापन किए पैसे भेज देता था।
आम नागरिक के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि कोई पुलिस अधिकारी फोन पर केस खत्म करने के बदले पैसे नहीं मांगता। अगर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, क्राइम ब्रांच, CBI, ED या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाए, तो बातचीत रोकना और स्वतंत्र माध्यम से संबंधित विभाग से पुष्टि करना जरूरी है।
साइबर ठगी होने पर समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। बस्ती पुलिस ने लोगों से अपील की है कि पीड़ित तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर भी रिपोर्ट दर्ज करें। पुलिस ने यह भी कहा है कि अनजान व्यक्ति के साथ OTP, बैंक डिटेल, UPI PIN या पहचान संबंधी संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
ध्यान रखें: फोन पर पुलिस का नाम, CDR, अश्लील वीडियो, गिरफ्तारी या कोर्ट का डर दिखाकर पैसे मांगना साइबर ठगी का बड़ा संकेत हो सकता है। डरने के बजाय कॉल काटें, परिवार के किसी सदस्य को बताएं और तुरंत आधिकारिक माध्यम से शिकायत करें।
