नालंदा में साइबर ठगी के नेटवर्क का पर्दाफाश, फर्जी SIM और बैंक खातों की सप्लाई करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार।
नालंदा में साइबर ठगी के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई, फर्जी SIM और बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले 2 आरोपी गिरफ्तार…..
नालंदा में पुलिस ने एक ऐसे इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया है, जो कथित तौर पर साइबर अपराधियों को फर्जी तरीके से एक्टिवेट किए गए SIM कार्ड और बैंक खाते उपलब्ध कराता था। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई रविवार रात की गई और जांच अब इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों तथा पैसों के लेन-देन तक पहुंचने पर केंद्रित है।
क्या है पूरा मामला?
नालंदा साइबर पुलिस को National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर दर्ज अलग-अलग शिकायतों की तकनीकी जांच के दौरान कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर मिले। पुलिस के मुताबिक, कई राज्यों में सामने आए साइबर फ्रॉड मामलों में इस्तेमाल किए गए नंबरों को सोहसराय इलाके से एक्टिवेट किए जाने के संकेत मिले।
इसके बाद Cyber DSP-cum-SHO ऋषभ आनंद के नेतृत्व में जांच आगे बढ़ाई गई और पुलिस ने खासगंज स्थित एक मोबाइल दुकान पर छापा मारा। यहां से पुलिस ने गुड्डू कुमार, निवासी जलालपुर, को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह नियमों को दरकिनार कर SIM कार्ड एक्टिवेट करता था। दुकान से ग्राहक संबंधी दस्तावेज, फिंगरप्रिंट वाले फॉर्म, दो मोबाइल फोन और बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैनर बरामद किए गए।
दूसरी कार्रवाई में पुलिस ने नीतीश कुमार उर्फ रोमियो (20) को गिरफ्तार किया। वह मूल रूप से शेखपुरा जिले का रहने वाला है और सोहसराय में रह रहा था। पुलिस का आरोप है कि वह नशे के आदी युवाओं को पैसे का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते और SIM कार्ड खुलवाता था। इसके बाद कथित तौर पर ये खाते और SIM साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए जाते थे।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से:
- 12 ATM कार्ड
- 3 बैंक पासबुक
- पहचान से जुड़े दस्तावेज
- 2 बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैनर
- POS ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले 2 मोबाइल फोन
- ₹38,900 नकद
- 5.25 लीटर विदेशी शराब
बरामद की गई। दोनों आरोपियों के खिलाफ साइबर थाना में अलग-अलग FIR दर्ज की गई है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
असली खतरा सिर्फ SIM या बैंक खाते का नहीं
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कथित नेटवर्क खुद हर बार लोगों को फोन करके ठगी करे, यह जरूरी नहीं। साइबर अपराध की एक बड़ी चुनौती पूरे सप्लाई चेन मॉडल में बदल रही है।
एक तरफ ऐसे लोग हो सकते हैं जो लोगों को ठगते हैं, दूसरी तरफ कोई उन्हें SIM, कोई बैंक खाता, कोई ATM/पासबुक, और कोई पैसा आगे ट्रांसफर करने की सुविधा उपलब्ध कराता है।
यानी एक व्यक्ति ठगी करता है, लेकिन उसके पीछे कई स्तरों पर काम करने वाला नेटवर्क हो सकता है।
हाल ही में पटना में भी पुलिस ने ऐसे लोगों को पकड़ा था जिन पर साइबर ठगी से जुड़े पैसों को भेजने के लिए करंट और कॉरपोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप था। उस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था और जांच में तीन करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन सामने आने की बात कही गई थी।
इससे स्पष्ट होता है कि Mule Account यानी ऐसे बैंक खाते जिनका इस्तेमाल दूसरों के अवैध पैसे को घुमाने के लिए किया जाता है, साइबर अपराधियों के लिए महत्वपूर्ण कड़ी बन चुके हैं।
देश में भी इसी नेटवर्क पर कार्रवाई तेज
गृह मंत्रालय के अनुसार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के तहत साइबर वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System (CFCFRMS) काम कर रहा है।
30 जून 2026 तक इस व्यवस्था के जरिए 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में ₹11,158 करोड़ से ज्यादा की वित्तीय राशि बचाए जाने की जानकारी सरकार ने दी है। इसी अवधि तक पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर 15.75 लाख से अधिक SIM कार्ड और 5.77 लाख IMEI ब्लॉक किए जा चुके थे।
सरकार ने Suspect Registry के जरिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ संदिग्ध पहचानकर्ताओं और mule accounts से जुड़ी जानकारी साझा करने की व्यवस्था भी विकसित की है।
इसका मतलब है कि नालंदा जैसी स्थानीय कार्रवाई अब केवल स्थानीय अपराध नहीं देख रही, बल्कि मोबाइल नंबर, बैंक खाते और अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर शिकायतों के बीच संबंध तलाशने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
आम लोगों के लिए सबसे जरूरी चेतावनी
किसी दूसरे व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, SIM, OTP या बैंकिंग लॉगिन इस्तेमाल करने देना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। अगर आपका खाता किसी साइबर अपराध में इस्तेमाल हुआ, तो पुलिस जांच में आपको भी जवाब देना पड़ सकता है।
खास तौर पर ऐसे ऑफर से सावधान रहें जिनमें कहा जाता है:
“बस अपना बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने दें और पैसे कमाएं।”
या
“आपके नाम पर SIM/खाता खुलवाना है, बदले में पैसे मिलेंगे।”
ऐसी व्यवस्था आपको money mule के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।
अगर ऑनलाइन ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
समय यहां सबसे महत्वपूर्ण है। वित्तीय साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें। सरकारी पोर्टल पर वित्तीय धोखाधड़ी के लिए अलग शिकायत सुविधा उपलब्ध है।
शिकायत करते समय बैंक/वॉलेट की जानकारी, Transaction ID/UTR, तारीख, रकम और उपलब्ध स्क्रीनशॉट या अन्य सबूत तैयार रखना उपयोगी है।
National Cyber Crime Reporting Portal
निष्कर्ष
नालंदा की कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ ठग को पकड़ने तक सीमित नहीं है। पुलिस के लिए SIM की उत्पत्ति, बैंक खाते का मालिक, बायोमेट्रिक इस्तेमाल, ATM कार्ड, डिजिटल ट्रांजैक्शन और दूसरे राज्यों की शिकायतों को जोड़ना उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।
इस मामले में दो गिरफ्तारियां शुरुआती सफलता हैं, लेकिन असली तस्वीर तब सामने आएगी जब जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि ये SIM और बैंक खाते किन साइबर अपराधियों तक पहुंचाए गए, कितने लोगों के खाते इस्तेमाल हुए और उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन कितने बड़े हैं। फिलहाल पुलिस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और व्यापक वित्तीय कनेक्शन की जांच कर रही है।
नोट: ऊपर का लेखन, उपलब्ध पुलिस/मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। जिन आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है, उन्हें आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।
