ठगी के बाद शिकायत करना पड़ा भारी? साइबर गिरोह ने शिकायतकर्ताओं को ही दोबारा निशाना बनाया।जयपुर साइबर केस में बड़ा सवाल खड़ा।
जयपुर साइबर फ्रॉड में बड़ा खुलासा: ठगों को कैसे पता चली शिकायतकर्ताओं की जानकारी?
जयपुर: राजस्थान के डीग पुलिस की साइबर फ्रॉड जांच में ऐसा चौंकाने वाला सुराग सामने आया है, जिसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस को शक है कि जिस साइबर गिरोह का फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा गया, उसे उन लोगों की जानकारी मिल रही थी जिन्होंने उसके खिलाफ RBI या अन्य नियामक एजेंसियों में शिकायत की थी। इतना ही नहीं, शिकायत करने वालों से दोबारा संपर्क कर कथित तौर पर शिकायत वापस लेने के लिए उन्हें पैसे देने की कोशिश भी की गई।
पुलिस ने जांच के दौरान करीब 50 शिकायतों और उनसे जुड़े पत्रों को बरामद किया है। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अब जांचकर्ताओं को आशंका है कि बैंकिंग सिस्टम के भीतर मौजूद कोई इनसाइडर गोपनीय जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंचा रहा था। हालांकि, अभी यह साबित नहीं हुआ है कि किसी बैंक कर्मचारी ने जानबूझकर जानकारी लीक की थी। यह फिलहाल पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण एंगल है।
फर्जी बैंक अधिकारी बनकर करते थे ठगी
पुलिस के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर खुद को प्राइवेट बैंक का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करता था। कॉल के दौरान क्रेडिट कार्ड रिन्यू कराने, कार्ड की लिमिट बढ़ाने या बैंकिंग सुविधा से जुड़ी दूसरी सेवाओं का लालच दिया जाता था।
ठग पहले से उपलब्ध व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी का इस्तेमाल करके पीड़ित को भरोसे में लेते थे। इसके बाद उनसे बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी और OTP हासिल करने की कोशिश की जाती थी। इस तरह की ठगी में अपराधी आमतौर पर बैंक कर्मचारी जैसी भाषा और प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं, ताकि सामने वाले व्यक्ति को शक न हो।
सबसे बड़ा सवाल: शिकायत की जानकारी अपराधियों तक कैसे पहुंची?
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यही है।
अगर किसी व्यक्ति ने साइबर ठगी की शिकायत संबंधित संस्था या RBI के पास की, तो उस शिकायत पर जवाब लेने के लिए मामला संबंधित बैंक तक पहुंच सकता है। पुलिस को शक है कि शिकायतों से संबंधित इसी आधिकारिक प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ताओं की जानकारी किसी तरह अपराधियों तक पहुंची।
इसके बाद गिरोह ने उन्हीं लोगों से संपर्क किया जिन्होंने शिकायत की थी। कुछ मामलों में कथित तौर पर शिकायत वापस लेने के बदले पैसे देने की पेशकश की गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शिकायत की जानकारी किस स्तर पर और किस व्यक्ति के जरिए बाहर गई।
दिल्ली के फर्जी कॉल सेंटर पर कार्रवाई
यह मामला उस कार्रवाई से जुड़ा है जिसमें डीग पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर में चल रहे कथित साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 64 संदिग्धों को गिरफ्तार किया और मौके से 88 एंड्रॉयड फोन तथा फर्जी बैंक पहचान-पत्र बरामद किए।
अब जांच सिर्फ कॉल सेंटर और उसके ऑपरेटरों तक सीमित नहीं है। पुलिस उस पूरे डेटा-फ्लो को समझने की कोशिश कर रही है जिसके जरिए शिकायतकर्ता की जानकारी अपराधियों तक पहुंच सकती थी।
जांच का अगला फोकस क्या है?
जांचकर्ता अब शिकायत की पूरी यात्रा को ट्रैक कर रहे हैं—यानी शिकायतकर्ता से लेकर RBI या संबंधित एजेंसी और फिर बैंक तक। इसके बाद यह देखा जा रहा है कि इन शिकायतों को किन अधिकारियों या कर्मचारियों ने देखा था और किसके पास संबंधित जानकारी तक पहुंच थी।
इससे यह भी पता चल सकता है कि कथित सूचना लीक एक अलग घटना थी या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा।
विश्लेषण: यह मामला सिर्फ साइबर ठगी नहीं, डेटा सुरक्षा का भी है
इस घटना की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि यहां सवाल केवल पैसे की चोरी का नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता की गोपनीय जानकारी की सुरक्षा का भी है।
आम तौर पर जब कोई व्यक्ति धोखाधड़ी की शिकायत करता है तो उसका उद्देश्य अपनी रकम बचाना और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कराना होता है। लेकिन यदि शिकायत से जुड़ी जानकारी ही संदिग्ध लोगों तक पहुंच जाए और वही लोग पीड़ित को दोबारा संपर्क करके शिकायत वापस लेने के लिए दबाव या लालच दें, तो यह डेटा एक्सेस और सूचना सुरक्षा की बड़ी कमजोरी का संकेत हो सकता है।
हालांकि, पुलिस की जांच पूरी होने से पहले किसी बैंक कर्मचारी या अधिकारी को दोषी मानना उचित नहीं होगा। अभी यह केवल पुलिस की आशंका और जांच का एंगल है।
आम लोगों के लिए जरूरी सावधानी
अगर साइबर फ्रॉड के बाद कोई व्यक्ति आपको फोन करके कहे कि आपकी शिकायत उनके पास पहुंच गई है और पैसे लेकर मामला खत्म किया जा सकता है, तो सावधान रहें।
- शिकायत वापस लेने के लिए किसी अनजान व्यक्ति को पैसे न दें।
- बैंकिंग PIN, OTP, CVV या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
- संदिग्ध कॉल, नंबर और मैसेज का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें और cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें। राजस्थान पुलिस भी साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल का उल्लेख करती है।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है—गिरोह को शिकायतकर्ताओं की पहचान किसने बताई? इसका जवाब मिलने पर इस पूरे साइबर नेटवर्क की असली तस्वीर सामने आ सकती है।
