SIR Verification के नाम पर भेजा लिंक, क्लिक करते ही शुरू हुआ बैंक फ्रॉड।
SIR Verification के नाम पर नया साइबर फ्रॉड: बुजुर्गों को डराकर APK और फर्जी लिंक से लूट रहे ठग…..
देश में Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ ही साइबर अपराधियों ने इसी के नाम पर ठगी का नया तरीका खोज लिया है। ठग खुद को Election Commission of India (ECI), Booth Level Officer (BLO) या चुनावी अधिकारी बताकर लोगों को फोन और मैसेज कर रहे हैं। दावा किया जाता है कि वोटर लिस्ट में उनका नाम, पता या परिवार की जानकारी गलत है और तुरंत सुधार नहीं किया तो मतदाता सूची से नाम हट सकता है। इसी डर का फायदा उठाकर पीड़ितों को फर्जी लिंक, APK फाइल और छोटी-सी फीस के बहाने बैंकिंग जानकारी देने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
SIR क्या है और ठग इसका फायदा क्यों उठा रहे हैं?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करने की वास्तविक चुनावी प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना तथा मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, डुप्लीकेट या लंबे समय से नहीं मिल रहे मतदाताओं जैसी प्रविष्टियों की जांच करना है।
सरकारी जानकारी के अनुसार SIR कई चरणों में किया जा रहा है और दिल्ली सहित कुछ क्षेत्रों में इसका चरणबद्ध कार्य चल रहा है। प्रक्रिया में Booth Level Officers की भूमिका, मतदाता सूची का प्रकाशन और दावे-आपत्तियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं।
यही वास्तविक प्रक्रिया अब ठगों के लिए विश्वास पैदा करने वाला बहाना बन गई है।
ठगों का पूरा खेल ऐसे समझिए
फर्जी कॉल → वोट कटने का डर → तुरंत समाधान का दावा → लिंक/APK → ₹5 जैसी छोटी फीस → बैंकिंग जानकारी → खाते से बड़ी रकम गायब
ठग कई बार कहते हैं कि SIR फॉर्म में रिकॉर्ड से जानकारी मैच नहीं कर रही या फॉर्म रिजेक्ट हो गया है। इसके बाद वे WhatsApp या SMS पर री-वेरिफिकेशन लिंक या APK भेजते हैं। कुछ मामलों में केवल ₹5 जैसी मामूली फीस मांगी जाती है, ताकि पूरा मामला सरकारी प्रक्रिया जैसा लगे।
मुंबई में बुजुर्ग बने खास निशाना
मुंबई में सामने आए मामलों ने इस फ्रॉड के खतरनाक तरीके को उजागर किया है।
Deonar के एक सेवानिवृत्त कॉलेज प्रिंसिपल को ठग ने Election Commission का अधिकारी बनकर संपर्क किया। उन्हें बताया गया कि उनके पिता का नाम वोटर रिकॉर्ड में गलत दर्ज है और SIR के तहत तुरंत सुधार जरूरी है। उन्हें एक APK डाउनलोड कराया गया और ₹5 की फीस जमा करने के दौरान बैंकिंग जानकारी दर्ज कराई गई। इसके बाद पांच संदिग्ध लेनदेन में उनके खाते से ₹17 लाख निकल गए। मामले में साइबर पुलिस ने FIR दर्ज की है।
एक अन्य मामले में 77 वर्षीय रिटायर्ड डॉक्टर को बताया गया कि उनके नाम और पिता के नाम में मतदाता रिकॉर्ड के दौरान mismatch है। उन्हें SIR फॉर्म भरने के लिए कहा गया और कथित तौर पर ₹6.7 लाख की ठगी हो गई। Chembur की एक सेवानिवृत्त इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी की अधिकारी को पता बदलने के नाम पर लिंक भेजा गया। APK इंस्टॉल करने के बाद उन्हें करीब ₹11.2 लाख का नुकसान हुआ।
मुंबई से अलग, Pune के 70 से अधिक उम्र के एक व्यक्ति से ₹4.98 लाख और Bengaluru के 82 वर्षीय व्यक्ति से ₹3.49 लाख की कथित SIR-फ्रॉड ठगी का भी उल्लेख किया है।
असली SIR और फर्जी SIR कॉल में सबसे बड़ा अंतर
यह समझना जरूरी है कि SIR खुद कोई फ्रॉड नहीं है। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR 2026 के लिए नाम खोजने और Enumeration Form जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
समस्या तब शुरू होती है जब कोई अनजान व्यक्ति SIR के नाम पर आपको फोन करके कहता है:
- “आपका नाम वोटर लिस्ट से हट सकता है।”
- “आपका SIR फॉर्म reject हो गया है।”
- “अभी ₹5 देकर verification पूरा करें।”
- “यह APK डाउनलोड करिए।”
- “OTP बताइए, तभी verification होगा।”
ये संकेत गंभीर खतरे की घंटी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, SIR से जुड़ी सेवाएं फ्री हैं और अधिकारियों द्वारा बैंकिंग credentials, कार्ड की जानकारी, OTP या ATM PIN मांगने की बात नहीं है।
APK फाइल सबसे बड़ा खतरा क्यों है?
APK (Android Package Kit) Android फोन में ऐप इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। किसी भरोसेमंद स्रोत के बजाय WhatsApp, SMS या किसी अनजान नंबर से मिली APK को इंस्टॉल करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
इस फ्रॉड में अपराधी APK को “Voter Verification”, “Device Protection” या SIR से संबंधित ऐप जैसा नाम देकर भरोसा पैदा कर सकते हैं। मुंबई के एक मामले में संदिग्ध ऐप इंस्टॉल होने के बाद पीड़ित के फोन पर ऐसे ही नामों वाले ऐप दिखाई दिए और उसके बाद बैंकिंग धोखाधड़ी हुई।
इसलिए यहां असली खतरा सिर्फ ₹5 की फीस नहीं है। असली खतरा है कि एक संदिग्ध ऐप या लिंक के जरिए अपराधी आपके फोन, संवेदनशील जानकारी या बैंकिंग गतिविधियों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
ठग बुजुर्गों को ज्यादा क्यों निशाना बना रहे हैं?
यह फ्रॉड सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि Psychological Manipulation पर आधारित है।
ठग तीन चीजों को एक साथ इस्तेमाल करते हैं:
1. डर — “नाम वोटर लिस्ट से हट जाएगा।”
2. अधिकार का भ्रम — “मैं Election Commission से बोल रहा हूं।”
3. जल्दबाजी — “आज ही verification पूरा करना होगा।”
जब व्यक्ति डर जाता है तो वह सामान्य सावधानी छोड़कर ठग के बताए कदमों का पालन करने लगता है।
Cybersecurity expert Nikhil Mahadeshwar ने TOI से बातचीत में बताया कि अपराधी पहले ऐसी स्थिति बनाते हैं जिसमें पीड़ित को लगता है कि उसके पास समय बहुत कम है। इसके बाद तत्काल समाधान के तौर पर APK या ऐप डाउनलोड करवाया जाता है।
यानी इस फ्रॉड की असली ताकत तकनीक से पहले डर है।
एक महत्वपूर्ण तथ्य: SIR में नाम हटाना इतना आसान नहीं है
ठगों का सबसे बड़ा झूठ यही होता है कि “फोन पर verification नहीं किया तो नाम तुरंत काट दिया जाएगा।”
सरकारी जानकारी के मुताबिक SIR में नाम हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और कई safeguards हैं। इसमें BLO द्वारा सत्यापन, घर-घर संपर्क, draft electoral roll का प्रकाशन और claims/objections का अवसर शामिल है। पात्र मतदाता को आपत्ति और अपील का भी रास्ता उपलब्ध है।
इसलिए किसी अनजान कॉलर की धमकी सुनकर घबराकर APK डाउनलोड करना या बैंकिंग जानकारी देना बिल्कुल जरूरी नहीं है।
अगर ऐसा फोन आए तो क्या करें?
पहला नियम: फोन काटें।
इसके बाद स्वयं आधिकारिक Election Commission वेबसाइट खोलकर जानकारी जांचें। कॉल करने वाले व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, मोबाइल नंबर या WhatsApp contact से verification न करें।
7 Golden Safety Rules
1. SIR के नाम पर आया कोई अनजान APK डाउनलोड न करें।
2. WhatsApp/SMS के संदिग्ध link पर क्लिक न करें।
3. OTP, ATM PIN, UPI PIN, CVV या NetBanking password किसी को न दें।
4. ₹5 या ₹10 जैसी छोटी फीस को भी “सरकारी प्रक्रिया” मानकर भरोसा न करें।
5. जानकारी केवल official ECI portal या स्थानीय BLO के माध्यम से verify करें।
6. अगर फोन में संदिग्ध ऐप इंस्टॉल हो गया है, तो तुरंत बैंक से संपर्क कर banking access सुरक्षित करें।
7. पैसा निकल गया है तो देरी न करें—भारत के National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत करें या 1930 पर तुरंत कॉल करें।
सबसे जरूरी बात
SIR एक वास्तविक चुनावी प्रक्रिया है, लेकिन SIR के नाम पर आने वाला हर फोन, SMS, WhatsApp मैसेज या APK वास्तविक नहीं है।
आज साइबर ठग KYC, बैंक अपडेट, डिजिटल अरेस्ट और बिजली बिल जैसे पुराने बहानों के साथ-साथ लोगों की मौजूदा सरकारी प्रक्रियाओं को भी अपने फ्रॉड की कहानी में शामिल कर रहे हैं।
इस मामले में सबसे मजबूत सुरक्षा है:
“डरकर क्लिक मत कीजिए, पहले खुद Verify कीजिए।”
अगर कोई व्यक्ति कहता है कि “अभी ₹5 दो, APK डाउनलोड करो, OTP बताओ, वरना वोटर लिस्ट से नाम कट जाएगा”, तो इसे सामान्य verification नहीं बल्कि संभावित साइबर फ्रॉड मानकर सावधानी बरतें।
आधिकारिक SIR सेवाओं के लिए Election Commission का Voters’ Service Portal ही इस्तेमाल करें।
