SP की फोटो लगाकर ठग ने पुलिसवालों से मांगे पैसे, WhatsApp पर खुला फर्जीवाड़ा!!!
रायगढ़ SP की फोटो लगाकर WhatsApp पर ठगी की कोशिश, पुलिसकर्मियों से मांगे ₹50 हजार…
रायगढ़ में साइबर ठगों ने अब पुलिस विभाग के अधिकारियों की डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर ठगी करने की कोशिश की है। एक अज्ञात व्यक्ति ने रायगढ़ की पुलिस अधीक्षक (SP) अंचल दलाल की WhatsApp प्रोफाइल फोटो लगाकर पुलिसकर्मियों को संदेश भेजे और खुद को SP बताकर पैसे ट्रांसफर करने को कहा। राहत की बात यह रही कि पुलिसकर्मी ठग के झांसे में नहीं आए।
कैसे रची गई ठगी की साजिश?
रिपोर्ट के अनुसार, ठग ने सबसे पहले रायगढ़ SP की WhatsApp Display Picture (DP) का इस्तेमाल किया। इसके बाद उसने एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से SP के रीडर PSI सिद्धेश्वर मुरकुटे को संदेश भेजा।
मैसेज में ठग ने दावा किया कि वह मीटिंग में हैं और उनका मोबाइल बंद है। इसके बाद तुरंत ₹50,000 बैंक खाते में ट्रांसफर करने की मांग की गई।
लेकिन PSI मुरकुटे ने संदेश को तुरंत संदिग्ध मान लिया। उन्हें नंबर सेव नहीं होने और अंतरराष्ट्रीय नंबर से संदेश आने के कारण शक हुआ। उन्होंने पैसे भेजने के बजाय ठग से बैंक खाते की जानकारी मांगी। यह जानकारी आगे की साइबर जांच में संभावित डिजिटल सुराग के तौर पर उपयोगी हो सकती है।
सिर्फ ₹50 हजार ही नहीं, ₹2 हजार का भी बनाया बहाना
जांच में यह भी सामने आया कि उसी नंबर से एक अन्य पुलिस अधिकारी को ₹2,000 भेजने के लिए कहा गया। इस बार ठग ने कहानी बनाई कि गाड़ी में डीजल भरवाने के लिए पैसे चाहिए, लेकिन SP का मोबाइल बंद हो गया है और वह ऑनलाइन भुगतान नहीं कर पा रही हैं।
यानी ठग ने दो महत्वपूर्ण हथियारों का इस्तेमाल किया—अधिकारी की पहचान और तत्काल पैसे की जरूरत का बहाना।
FIR दर्ज, साइबर पुलिस कर रही जांच
मामले में रायगढ़ साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में व्यक्ति की पहचान का गलत इस्तेमाल कर धोखाधड़ी (cheating by personation) का मामला दर्ज किया है। पुलिस आरोपी तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किए गए नंबर और बैंक खाते से जुड़े डिजिटल सुरागों की जांच कर रही है।
रायगढ़ साइबर पुलिस के API अमोल जाधव के अनुसार, ऐसे अपराधों में ठग VPN जैसी तकनीकों से अपनी वास्तविक पहचान या लोकेशन छिपाने की कोशिश कर सकते हैं। जांच में WhatsApp नंबर से जुड़े तकनीकी विवरण और बैंक खाते की जानकारी अहम हो सकती है।
यह मामला आम लोगों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह घटना सिर्फ पुलिस विभाग को निशाना बनाने वाली एक छोटी ठगी नहीं है। यह Impersonation Scam यानी पहचान की नकल करके ठगी के बदलते तरीके को दिखाती है।
आज किसी व्यक्ति की फोटो सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप से लेकर उसके नाम पर दूसरे लोगों को संदेश भेजना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इसलिए केवल प्रोफाइल फोटो देखकर किसी व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित नहीं की जा सकती।
भारत सरकार के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने भी अलग-अलग मामलों में साइबर अपराधियों द्वारा पुलिस, CBI, RBI और अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को डराने या पैसे ऐंठने की चेतावनी दी है।
जून 2026 में I4C ने एक अन्य खतरनाक पैटर्न पर भी चेतावनी जारी की थी, जिसमें अपराधी वरिष्ठ अधिकारियों या अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल करके WhatsApp के जरिए अधीनस्थ कर्मचारियों से वित्तीय लेनदेन करवाने की कोशिश कर रहे थे। कुछ मामलों में मैलवेयर के जरिए WhatsApp अकाउंट पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश भी सामने आई है।
WhatsApp DP देखकर भरोसा करना क्यों खतरनाक है?
इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सबक यही है कि DP पहचान का प्रमाण नहीं है।
अगर किसी वरिष्ठ अधिकारी, बॉस, रिश्तेदार या परिचित की फोटो वाले नए नंबर से अचानक पैसे मांगने का संदेश आए तो:
- तुरंत पैसे ट्रांसफर न करें।
- पुराने और सत्यापित नंबर पर फोन करके पुष्टि करें।
- अचानक आए अंतरराष्ट्रीय नंबर या अनजान नंबर को गंभीरता से जांचें।
- बैंक अकाउंट, UPI ID या QR code मिलने पर भी बिना पुष्टि भुगतान न करें।
- स्क्रीनशॉट, नंबर और बैंक विवरण जैसे सबूत सुरक्षित रखें।
- संदिग्ध नंबर को Report और Block करें।
- पैसे चले गए हों तो तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें और cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।
WhatsApp/Meta भी यूजर्स को संदिग्ध संदेशों में Pause, Question और Verify करने की सलाह देता है—यानी जल्दबाजी रोकें, मांग पर सवाल करें और दूसरे माध्यम से पहचान की पुष्टि करें। अगस्त 2026 में Meta ने WhatsApp के लिए संभावित स्कैम संदेशों की पहचान में मदद करने वाली नई Scam Alert तकनीक का सीमित परीक्षण शुरू करने की जानकारी दी।
पुलिस के नाम पर आने वाले संदेशों में सबसे बड़ा खतरा
इस तरह के मामलों में ठग अक्सर Authority + Urgency + Trust का इस्तेमाल करते हैं।
Authority: सामने वाला खुद को SP, पुलिस अधिकारी या वरिष्ठ अधिकारी बताता है।
Urgency: कहा जाता है कि पैसे तुरंत चाहिए।
Trust: असली अधिकारी की फोटो लगाकर विश्वास पैदा किया जाता है।
इन तीनों को एक साथ इस्तेमाल करने का मकसद पीड़ित को सोचने और सत्यापन करने का समय न देना होता है।
रायगढ़ मामले में पुलिसकर्मियों की साइबर जागरूकता के कारण ठगी सफल नहीं हुई। लेकिन यही तरीका किसी आम कर्मचारी, कारोबारी या परिवार के सदस्य के खिलाफ इस्तेमाल किया जाए तो नुकसान हो सकता है।
सबसे जरूरी बात: WhatsApp पर किसी परिचित या अधिकारी की फोटो दिखना यह साबित नहीं करता कि संदेश वास्तव में उसी व्यक्ति ने भेजा है। पैसा भेजने से पहले पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना ही सबसे मजबूत सुरक्षा है।
रायगढ़ पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर SP कार्यालय के संपर्क विवरण भी उपलब्ध हैं, इसलिए किसी कथित अधिकारी के नाम से आए असामान्य वित्तीय अनुरोध की पुष्टि आधिकारिक चैनल से करना अधिक सुरक्षित है। रायगढ़ पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट
