ठगी का पैसा पहुंचाने वाला 21 वर्षीय युवक गिरफ्तार, सामने आया अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क!!!!
21 साल के भारतीय युवक पर अमेरिका में बुजुर्गों से 7.56 मिलियन डॉलर की ठगी में ‘मनी म्यूल’ बनने का आरोप….
अमेरिका में बुजुर्गों को निशाना बनाकर चलाए जा रहे एक बड़े साइबर-फ्रॉड नेटवर्क में गुजरात के 21 वर्षीय भारतीय नागरिक जय सुनीलभारती गोस्वामी का नाम सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वह कथित तौर पर इस नेटवर्क में “मनी म्यूल” यानी ठगी से हासिल नकदी और सोना एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाले व्यक्ति के रूप में काम कर रहा था।
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि इसमें केवल ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने की बात नहीं थी। आरोप है कि गिरोह ने बुजुर्गों को डराकर उनकी बचत, नकदी, सोना और गिफ्ट कार्ड तक अपने कब्जे में लेने की कोशिश की।
नौ बुजुर्गों से करीब 7.56 मिलियन डॉलर की ठगी
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, कथित नेटवर्क ने कम से कम 9 बुजुर्ग पीड़ितों को निशाना बनाया। इनकी उम्र 59 से 87 वर्ष के बीच थी। अधिकारियों का कहना है कि इन पीड़ितों को कुल मिलाकर लगभग 7,559,185 डॉलर यानी करीब 7.56 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ।
भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ₹72 करोड़ से अधिक बैठती है, हालांकि वास्तविक रुपये का मूल्य विनिमय दर के अनुसार बदल सकता है।
ठगी का तरीका क्या था?
अमेरिकी जांच के मुताबिक, कथित ठग पहले बुजुर्गों से फोन या इंटरनेट के जरिए संपर्क करते थे। उन्हें बताया जाता था कि उनके बैंक खाते, पैसे या निजी जानकारी खतरे में है या किसी ने उन्हें हैक कर लिया है।
इसके बाद पीड़ितों को उनकी संपत्ति को नकदी, सोने या गिफ्ट कार्ड में बदलने के लिए तैयार किया जाता था। कथित ठग खुद को पुलिस या किसी अन्य भरोसेमंद अधिकारी के रूप में पेश करके पीड़ितों पर दबाव बनाए रखते थे।
यहीं मनी म्यूल की भूमिका सामने आती है।
‘मनी म्यूल’ आखिर होता क्या है?
सरल भाषा में समझें तो मनी म्यूल वह व्यक्ति होता है जो किसी अपराध से हासिल पैसे या सामान को अपराधियों के लिए इधर-उधर पहुंचाता है।
इस मामले में अमेरिकी अभियोजन पक्ष का आरोप है कि गोस्वामी ने बुजुर्ग पीड़ितों से नकदी और सोना लेने के बाद उसे नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
अमेरिकी शिकायत के अनुसार, वह न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी में कम से कम 9 मौकों पर बुजुर्गों से नकदी या सोना लेने में व्यक्तिगत रूप से शामिल था या कथित तौर पर इसकी साजिश में शामिल था।
बैंक खाते में 90 हजार डॉलर से ज्यादा नकद जमा
जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर गोस्वामी के Bank of America खाते की गतिविधियों को भी जांचा। शिकायत के मुताबिक, 1 अगस्त 2025 से 6 अप्रैल 2026 के बीच उसके खाते में 90,000 डॉलर से अधिक नकद जमा किया गया।
अधिकारियों का मानना है कि ये नकद जमा कथित तौर पर मनी म्यूल के रूप में मिलने वाले भुगतान से संबंधित हो सकते हैं।
हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि ये अभी जांच और अभियोजन पक्ष के आरोप हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक गोस्वामी को कानूनन निर्दोष माना जाता है।
अमेरिका से कनाडा और फिर कतर जाने की कोशिश का आरोप
मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया।
गोस्वामी ने 17 अगस्त 2026 को अमेरिकी अदालत में प्रारंभिक पेशी की और कुछ शर्तों के साथ उसे रिहा किया गया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इसके अगले दिन वह Peace Bridge के रास्ते अमेरिका से कनाडा चला गया।
जांचकर्ताओं को बाद में पता चला कि उसने टोरंटो से दोहा, कतर जाने वाली उड़ान बुक की थी।
इसके बाद अमेरिकी अदालत ने गिरफ्तारी का आदेश जारी किया। कनाडाई अधिकारियों ने उसे Toronto Pearson International Airport पर हिरासत में लिया। अमेरिकी अनुरोध पर 20 अगस्त को उसे प्रत्यर्पण प्रक्रिया के लिए फिर गिरफ्तार किया गया।
अमेरिकी न्याय विभाग का Office of International Affairs अब कनाडा से उसके अमेरिका प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में सहायता कर रहा है।
उस पर कौन-कौन से आरोप हैं?
अमेरिकी अधिकारियों ने गोस्वामी पर कथित तौर पर ये आरोप लगाए हैं:
- Wire Fraud
- Wire Fraud की साजिश
- Money Laundering
- Money Laundering की साजिश
अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, इन आरोपों में प्रत्येक के लिए अधिकतम 20 वर्ष तक की जेल का प्रावधान हो सकता है। लेकिन अधिकतम सजा का मतलब यह नहीं है कि आरोपी को इतनी ही सजा मिलेगी; अंतिम परिणाम अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
इस मामले की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी की कहानी नहीं है। यह बताती है कि आधुनिक Elder Fraud कितना संगठित और अंतरराष्ट्रीय हो चुका है।
इस मॉडल में अलग-अलग लोग अलग-अलग काम कर सकते हैं—कोई ऑनलाइन पीड़ित खोजता है, कोई फोन पर विश्वास जीतता है, कोई पुलिस अधिकारी बनकर डराता है और कोई मनी म्यूल बनकर नकदी या सोना लेकर आगे पहुंचाता है।
यानी अपराध का पूरा नेटवर्क कई हिस्सों में बंटा हो सकता है। इससे मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल हो जाता है।
बुजुर्गों को ही क्यों बनाया जाता है निशाना?
ऐसे गिरोह अक्सर बुजुर्गों को इसलिए निशाना बनाते हैं क्योंकि उनके पास वर्षों की जमा पूंजी, रिटायरमेंट सेविंग्स या अन्य संपत्ति हो सकती है। साथ ही, पुलिस, बैंक या सरकारी एजेंसी के नाम का इस्तेमाल करके उनमें डर और जल्दबाजी पैदा की जा सकती है।
इस मामले में कथित तरीका भी इसी मनोवैज्ञानिक दबाव पर आधारित था—पहले पीड़ित को बताया गया कि उसका पैसा खतरे में है और फिर उसी “सुरक्षा” के नाम पर पैसा या सोना अपराधियों तक पहुंचाया गया।
आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सबक
बैंक, पुलिस या कोई सरकारी एजेंसी फोन करके आपको अपना पैसा निकालकर किसी व्यक्ति को देने, सोना सौंपने या गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए मजबूर नहीं करती।
अगर कोई व्यक्ति कहे—
“आपका बैंक अकाउंट हैक हो गया है”,
“आपके नाम पर अपराध हुआ है”,
“अपना पैसा सुरक्षित जगह भेजिए”, या
“पुलिस अधिकारी को नकदी/सोना सौंपिए”,
तो तुरंत बातचीत रोकना और संबंधित संस्था के आधिकारिक नंबर से स्वयं संपर्क करना सबसे सुरक्षित कदम है।
निष्कर्ष
जय सुनीलभारती गोस्वामी के खिलाफ मामला दिखाता है कि आज की साइबर ठगी केवल मोबाइल स्क्रीन तक सीमित नहीं है। डिजिटल डर पैदा करने के बाद अपराधी वास्तविक दुनिया में लोगों के घरों तक पहुंचकर कैश और गोल्ड भी हासिल कर सकते हैं।
अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, इस मामले में नौ बुजुर्गों से लगभग $7.56 मिलियन की कथित ठगी और कम से कम नौ बार नकदी-सोना संग्रह करने का आरोप है। गोस्वामी पर गंभीर वित्तीय अपराधों के आरोप हैं, लेकिन अदालत में दोष सिद्ध होने तक वह निर्दोष माना जाता है।
सबसे अहम बात: अगर कोई फोन पर आपको डराकर आपकी बचत को “सुरक्षित” करने के नाम पर नकदी, सोना या बैंक ट्रांसफर करने को कह रहा है, तो संभव है कि असली खतरा आपके बैंक खाते में नहीं, बल्कि फोन के दूसरी तरफ मौजूद ठग में हो।
