फोन पर अपनों की आवाज सुनकर भी सावधान रहें, नया साइबर जाल बेहद खतरनाक।
AI Voice Scam: फोन पर आई पहचान वाले की आवाज, 67 साल के शख्स से ₹95,990 की ठगी….
कोलकाता में साइबर ठगी का एक नया और बेहद खतरनाक तरीका सामने आया है। यहां 67 वर्षीय एक व्यक्ति को ठगों ने ऐसी आवाज में फोन किया, जो उनके परिचित अजय की आवाज जैसी लग रही थी। फोन करने वाले ने बताया कि एक रिश्तेदार को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है और इलाज के लिए तुरंत पैसों की जरूरत है। आवाज पर भरोसा करके पीड़ित ने एक घंटे से भी कम समय में कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर दिए और कुल ₹95,990 गंवा दिए। बाद में जब उन्होंने असली अजय से संपर्क किया तो पता चला कि उसने ऐसा कोई फोन किया ही नहीं था।
आवाज असली थी, लेकिन इंसान नकली था
यह घटना कोलकाता के बेलेघाटा इलाके की बताई गई है। पीड़ित को एक अनजान नंबर से कॉल आया। फोन पर मौजूद व्यक्ति की आवाज इतनी परिचित लगी कि उन्हें शक नहीं हुआ। ठग ने रिश्तेदार के अस्पताल में भर्ती होने की कहानी बताकर तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाया।
पीड़ित ने बिना स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए कई बार बैंक से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर दिए। बाद में वास्तविक परिचित से बात करने पर धोखाधड़ी का पता चला। इसके बाद बेलेघाटा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस फोन नंबर, कॉल रिकॉर्ड और जिन बैंक खातों में रकम गई, उनकी जांच कर रही है।
AI Voice Scam आखिर कैसे काम करता है?
AI Voice Cloning ऐसी तकनीक है जिसमें किसी व्यक्ति की आवाज के नमूने का इस्तेमाल करके उसकी जैसी आवाज तैयार की जा सकती है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया वीडियो, ऑनलाइन रिकॉर्डिंग, वॉयस मैसेज या दूसरे सार्वजनिक स्रोतों से आवाज के नमूने हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
इसके बाद ठग उस नकली आवाज का इस्तेमाल करके खुद को भाई, दोस्त, रिश्तेदार, अधिकारी या किसी भरोसेमंद व्यक्ति के रूप में पेश कर सकता है।
सबसे खतरनाक हिस्सा तकनीक से ज्यादा मनोवैज्ञानिक दबाव है। आमतौर पर कहानी में दुर्घटना, अस्पताल, गिरफ्तारी, मुसीबत या किसी जरूरी भुगतान जैसी आपात स्थिति बनाई जाती है ताकि सामने वाला सोचने और जांच करने के बजाय तुरंत पैसा भेज दे। भारत सरकार से जुड़े एक साइबर-सुरक्षा हैंडबुक में भी AI Voice Scam में इसी तरह की पहचान-नकल और तत्काल पैसे की मांग को प्रमुख तरीका बताया गया है।
सिर्फ आवाज सुनकर भरोसा करना अब खतरनाक क्यों है?
पहले लोग अक्सर कहते थे कि “आवाज तो बिल्कुल उसी की है, इसलिए फोन असली होगा।” AI आधारित voice cloning ने इस भरोसे को कमजोर कर दिया है।
2026 में सामने आए एक अन्य भारतीय मामले में इंदौर की एक महिला को उसके रिश्तेदार जैसी आवाज में फोन करके ₹97,500 की ठगी की गई थी। इससे पता चलता है कि यह केवल विदेशों में होने वाला तकनीकी खतरा नहीं है, बल्कि भारत में भी इसका इस्तेमाल वास्तविक वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है।
हालिया साइबर-सुरक्षा विश्लेषण भी चेतावनी देते हैं कि अब सिर्फ आवाज में हल्की गड़बड़ी, अजीब उच्चारण या रोबोट जैसी आवाज सुनकर AI कॉल पहचानना भरोसेमंद तरीका नहीं है। इसलिए आवाज की पहचान से ज्यादा जरूरी है स्वतंत्र verification।
इस ठगी में सबसे बड़ा हथियार AI नहीं, ‘जल्दी’ है
इस तरह के मामलों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है:
ठग पहले भरोसा बनाता है → फिर डर पैदा करता है → फिर समय कम करता है → फिर पैसे ट्रांसफर करवाता है।
यानी अपराध की सफलता केवल AI की तकनीक पर निर्भर नहीं होती। असली हथियार है Fear + Trust + Urgency।
अगर कोई परिचित व्यक्ति अचानक कहे कि अस्पताल में भर्ती रिश्तेदार के लिए अभी पैसे भेजने हैं, तो घबराने के बजाय कुछ मिनट रुकना ही सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कदम हो सकता है।
AI Voice Scam से बचने के 7 आसान नियम
1. परिचित आवाज = परिचित व्यक्ति, यह मानकर न चलें।
आवाज सुनकर तुरंत पैसे न भेजें।
2. उसी व्यक्ति के पुराने नंबर पर वापस कॉल करें।
कॉलर ने जिस नंबर से फोन किया है, उसी पर भरोसा करने के बजाय आपके फोन में सेव किए गए पुराने और verified नंबर से संपर्क करें।
3. एक Secret Family Code बनाएं।
परिवार के सदस्य आपस में ऐसा शब्द या सवाल तय कर सकते हैं जिसे केवल परिवार के लोग जानते हों। सरकारी साइबर-सुरक्षा सामग्री भी ऐसे verification mechanism का सुझाव देती है।
4. अचानक आई Emergency को स्वतंत्र रूप से Verify करें।
अस्पताल, पुलिस, बैंक या रिश्तेदार—जिसका भी नाम लिया जा रहा हो, दूसरे माध्यम से पुष्टि करें।
5. पैसे भेजने से पहले वीडियो कॉल करें।
वीडियो कॉल भी अंतिम प्रमाण नहीं है, लेकिन अतिरिक्त verification layer जरूर देता है।
6. अपनी आवाज की अनावश्यक रिकॉर्डिंग सार्वजनिक न करें।
सोशल मीडिया पर लंबे public voice/video clips उपलब्ध होने से voice-cloning का जोखिम बढ़ सकता है।
7. ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर रिपोर्ट करें।
भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal के अनुसार वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के लिए 1930 हेल्पलाइन 24×7 उपलब्ध है। शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है।
पैसे चले गए तो क्या करें?
सबसे बड़ी गलती होगी कि पीड़ित शर्म या डर के कारण शिकायत करने में देर करे।
तुरंत ये कदम उठाएं:
- 1930 पर कॉल करें।
- cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
- बैंक को तुरंत सूचित करें।
- Transaction ID, UTR, मोबाइल नंबर, स्क्रीनशॉट और चैट सुरक्षित रखें।
- जिस नंबर से फोन आया, उसे डिलीट न करें।
- पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।
सरकार के अनुसार 1930 और संबंधित साइबर-फ्रॉड सिस्टम का उद्देश्य धोखाधड़ी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के लिए बैंकों, वित्तीय संस्थानों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तेजी से कार्रवाई कराना है। मार्च 2026 तक सरकार ने इस सिस्टम के जरिए 24.65 लाख से ज्यादा शिकायतों में ₹8,690 करोड़ से अधिक राशि बचाए जाने की जानकारी संसद में दी थी।
निष्कर्ष
कोलकाता की ₹95,990 वाली घटना सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी नहीं है। यह संकेत है कि साइबर अपराधी अब OTP, फर्जी लिंक और APK के साथ-साथ इंसान के सबसे पुराने भरोसे—आवाज पहचानने—का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसलिए अगली बार अगर फोन पर कोई अपना व्यक्ति बेहद घबराई हुई आवाज में कहे—“अभी पैसे भेजो, बहुत जरूरी है”, तो सबसे पहले पैसे नहीं, पहचान Verify करें।
क्योंकि AI के दौर में आवाज पहचान सकती है, लेकिन आवाज हमेशा सच नहीं बताती।
