फर्जी नियुक्ति पत्र और सरकारी मुहरों से रचा जाल, नौकरी चाहने वालों को बनाया निशाना।
₹93 लाख का फर्जी सरकारी नौकरी घोटाला: नकली नियुक्ति पत्र से युवाओं को ठगा, साइबर पुलिस ने आरोपी पकड़ा…..
विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद कर रहे युवाओं को निशाना बनाकर चलाए जा रहे एक कथित फर्जी भर्ती रैकेट का साइबरक्राइम पुलिस ने पर्दाफाश किया है। आंध्र प्रदेश CID की साइबरक्राइम टीम ने सलादी राम गोपाल को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के नाम पर नकली भर्ती प्रक्रिया खड़ी कर युवाओं से करीब ₹93 लाख की ठगी की।
कैसे शुरू हुआ फर्जी नौकरी का खेल?
पुलिस के अनुसार, इस कथित रैकेट की जड़ें 2021 के एक अखबार के विज्ञापन तक जाती हैं। विज्ञापन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत नौकरी दिलाने का दावा किया गया था। इसके बाद नौकरी की तलाश कर रहे लोगों से संपर्क किया गया और उनसे व्यक्तिगत जानकारी तथा पैसे लिए गए।
आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी भर्ती नोटिफिकेशन, इंटरव्यू लेटर, नियुक्ति पत्र और ट्रेनिंग ऑर्डर तैयार किए। इन दस्तावेजों में सरकारी प्रतीकों और आधिकारिक पते का इस्तेमाल किया गया, ताकि पीड़ितों को यह पूरी प्रक्रिया असली सरकारी भर्ती जैसी लगे।
यानी ठगी सिर्फ फोन या मैसेज से पैसे मांगने तक सीमित नहीं थी। कथित तौर पर आरोपियों ने एक पूरा नकली भर्ती सिस्टम तैयार किया—विज्ञापन से लेकर इंटरव्यू और नियुक्ति तक।
OLX से बनाए गए ‘म्यूल अकाउंट’
जांच में पुलिस को एक और महत्वपूर्ण तरीका सामने आया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने OLX के जरिए बैंक खातों की व्यवस्था की और उन खातों का इस्तेमाल पीड़ितों से पैसा प्राप्त करने के लिए किया।
इन खाताधारकों को कथित तौर पर करीब 30 प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया जाता था। बाकी रकम आरोपी अपने पास रखता था। पुलिस का आरोप है कि कुछ मामलों में बैंक खातों से पैसे निकालने के लिए ATM कार्ड भी अपने कब्जे में रखे गए।
यह तरीका साइबर फ्रॉड में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि म्यूल अकाउंट यानी किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम को घुमाने और असली अपराधी तक पहुंच मुश्किल बनाने के लिए किया जा सकता है।
भरोसा जीतने के लिए ‘सरकारी अधिकारी’ बनने का नाटक
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए ‘AYUSHMAN BHARAT FOUNDATION’ नाम से बैंक खाता भी खोला।
इसके अलावा, कथित तौर पर वह महंगी किराये की गाड़ियों का इस्तेमाल करके खुद को वरिष्ठ सरकारी अधिकारी जैसा दिखाता था। इस तरह की रणनीति का मकसद पीड़ितों के मन में यह विश्वास पैदा करना था कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में सरकारी व्यवस्था से जुड़ा है।
जांच कैसे आगे बढ़ी?
शिकायत मिलने के बाद साइबरक्राइम पुलिस ने केवल बैंक लेनदेन ही नहीं देखा, बल्कि डिजिटल फुटप्रिंट, ईमेल अकाउंट और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण किया। तकनीकी सबूतों और जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई गई और उसे गिरफ्तार किया गया।
यह बताता है कि आज के साइबर फ्रॉड मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड—जैसे ईमेल, बैंक ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन संपर्क—जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सबूत बन सकते हैं।
सरकार भी फर्जी भर्ती को लेकर दे चुकी है चेतावनी
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से जुड़ी PMSSY की आधिकारिक वेबसाइट खुद फर्जी भर्ती और ट्रेनिंग गतिविधियों को लेकर चेतावनी देती है। वेबसाइट लोगों से आधिकारिक जानकारी के लिए मंत्रालय और संबंधित सरकारी वेबसाइटों पर भरोसा करने को कहती है।
इससे एक बड़ा सबक सामने आता है—सरकारी नौकरी की असली भर्ती प्रक्रिया में सिर्फ किसी विज्ञापन, ईमेल, WhatsApp संदेश या कथित अधिकारी की बात पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए।
इस तरह की ठगी से कैसे बचें?
1. सरकारी नौकरी के लिए पैसा देने से पहले रुकें।
कोई व्यक्ति अगर नौकरी पक्की कराने, नियुक्ति पत्र दिलाने या अधिकारी से सेटिंग कराने के नाम पर बड़ी रकम मांग रहा है, तो इसे बड़ा रेड फ्लैग मानें।
2. भर्ती नोटिफिकेशन का आधिकारिक स्रोत देखें।
विज्ञापन में दिए ईमेल या फोन नंबर को ही अंतिम प्रमाण न मानें। संबंधित मंत्रालय, विभाग या भर्ती संस्था की आधिकारिक वेबसाइट पर वही भर्ती खोजें।
3. नियुक्ति पत्र देखकर भी तुरंत भरोसा न करें।
फर्जी दस्तावेजों में सरकारी लोगो, मुहर, अधिकारी का नाम और आधिकारिक भाषा तक इस्तेमाल की जा सकती है।
4. बैंक खाते का इस्तेमाल किसी और के लिए न होने दें।
कमीशन के बदले अपना बैंक अकाउंट, ATM कार्ड या बैंकिंग जानकारी किसी व्यक्ति को देना भविष्य में गंभीर कानूनी और वित्तीय परेशानी पैदा कर सकता है।
5. ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें।
भारत के National Cyber Crime Reporting Portal पर साइबर अपराध की शिकायत की जा सकती है।
निष्कर्ष
इस मामले में कथित ठगी की असली ताकत सिर्फ फर्जी कागज नहीं थी, बल्कि विश्वास का निर्माण था। अखबार का विज्ञापन, सरकारी मंत्रालय का नाम, नकली नियुक्ति पत्र, सरकारी अधिकारी जैसा व्यवहार और बैंकिंग व्यवस्था—इन सभी चीजों को जोड़कर एक ऐसा माहौल बनाया गया जिसमें नौकरी तलाश रहे व्यक्ति को धोखा असली प्रक्रिया जैसा दिखाई दे सकता था।
इसलिए आज के दौर में “सरकारी नौकरी” शब्द खुद प्रमाण नहीं है। प्रमाण है—भर्ती की आधिकारिक वेबसाइट, सत्यापित नोटिफिकेशन और निर्धारित भर्ती प्रक्रिया।
नोट: ऊपर दी गई जानकारी पुलिस के आरोपों और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपी को अदालत में दोष सिद्ध होने तक कानूनन निर्दोष माना जाता है।
