विदेशी ऑर्डर का सपना दिखाकर कारोबारी से ₹75 लाख की बड़ी साइबर ठगी
विदेश में माल बेचने का झांसा देकर अहमदाबाद के कारोबारी से ₹75.6 लाख की ठगी, जानिए कैसे चलता है यह नया एक्सपोर्ट फ्रॉड……
विदेश में बड़ा ऑर्डर दिलाने का सपना बना करोड़ों की ठगी का जाल…
गुजरात के अहमदाबाद में एक व्यापारी को विदेश में माल बेचने (Export Business) का सुनहरा अवसर दिखाकर साइबर ठगों ने करीब ₹75.6 लाख की ठगी कर ली। यह मामला बताता है कि अब साइबर अपराधी केवल UPI, OTP या बैंक कॉल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे इंटरनेशनल ट्रेड और एक्सपोर्ट बिजनेस के नाम पर भी कारोबारियों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पूरा मामला क्या है?
पीड़ित व्यापारी को एक ऑनलाइन B2B (Business-to-Business) प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क किया गया। शुरुआत में उनसे सदस्यता (Membership) लेने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्हें एक तथाकथित “प्रोफाइल हैंडलर” सौंपा गया जिसने दावा किया कि वह विदेशी खरीदारों से उनका संपर्क कराएगा।
कुछ दिनों बाद कथित विदेशी खरीदार की ओर से खरीद आदेश (Purchase Order) भेजे गए। व्यापारी को भरोसा दिलाया गया कि ऑर्डर पूरी तरह असली है और जल्द ही भुगतान भी मिल जाएगा।
लेकिन भुगतान से पहले ठगों ने अलग-अलग बहाने बनाकर कई तरह की फीस मांगनी शुरू कर दी, जैसे—
- Export Certification Fee
- EDI (Electronic Data Interchange) Clearance
- International Compliance Charges
- Processing Fee
- Documentation Charges
- Verification Fee
व्यापारी को लगातार यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि अगली प्रक्रिया पूरी होते ही विदेश से बड़ी रकम उनके खाते में आ जाएगी। इसी भरोसे में उन्होंने जनवरी से जुलाई के बीच कई बैंक खातों में कुल लगभग ₹75.59 लाख जमा करा दिए। जब काफी समय बाद भी कोई भुगतान नहीं मिला और आरोपी संपर्क से बाहर हो गए, तब व्यापारी ने साइबर हेल्पलाइन और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
इस ठगी का तरीका क्यों खतरनाक है?
यह ठगी पारंपरिक ऑनलाइन फ्रॉड से अलग है। इसमें अपराधी सीधे पैसे मांगने के बजाय पहले भरोसा बनाते हैं।
आमतौर पर उनकी रणनीति इस प्रकार होती है—
- विदेशी खरीदार का झूठा प्रोफाइल बनाना।
- नकली Purchase Order भेजना।
- प्रोफेशनल ईमेल और WhatsApp चैट का इस्तेमाल करना।
- सरकारी या अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्रों के नाम पर फीस मांगना।
- हर भुगतान के बाद नया शुल्क जोड़ देना।
- अंत में संपर्क समाप्त कर देना।
इस प्रकार पीड़ित को लंबे समय तक यह एहसास ही नहीं होता कि उसके साथ धोखाधड़ी हो रही है।
विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी विदेशी व्यापार प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले निम्नलिखित जांच अवश्य करनी चाहिए—
- खरीदार की कंपनी का आधिकारिक रजिस्ट्रेशन जांचें।
- कंपनी की वेबसाइट, ईमेल डोमेन और व्यापारिक पहचान सत्यापित करें।
- IEC (Import Export Code) और DGFT से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी रखें।
- किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर “Certification” या “Approval Fee” जमा न करें।
- विदेशी खरीदार का भुगतान सुरक्षित बैंकिंग माध्यम या अधिकृत ट्रेड प्लेटफॉर्म से ही स्वीकार करें।
- यदि लगातार नई-नई फीस मांगी जा रही हो तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
भारत में क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे फ्रॉड?
हाल के वर्षों में ऑनलाइन व्यापार, B2B पोर्टल और डिजिटल एक्सपोर्ट सेवाओं के बढ़ने के साथ ऐसे मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है। साइबर अपराधी अब छोटे और मध्यम व्यापारियों (MSME) को निशाना बना रहे हैं क्योंकि वे तेजी से विदेशी बाजारों में पहुंचने की कोशिश करते हैं।
पिछले कुछ समय में निवेश, नकली सप्लाई ऑर्डर, वर्क फ्रॉम होम, फर्जी सरकारी अधिकारी और एक्सपोर्ट डील के नाम पर ठगी के कई मामले सामने आए हैं, जिससे स्पष्ट है कि साइबर अपराधियों के तरीके लगातार बदल रहे हैं।
यदि आपके साथ ऐसा हो जाए तो क्या करें?
- तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- सभी बैंक लेन-देन, ईमेल, WhatsApp चैट और भुगतान रसीद सुरक्षित रखें।
- संबंधित बैंक को तुरंत सूचित करें ताकि रकम फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सके।
- स्थानीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं।
निष्कर्ष
यह घटना केवल एक व्यापारी की ठगी नहीं बल्कि तेजी से बदलते साइबर अपराध का उदाहरण है। आज ठग नकली विदेशी खरीदार, फर्जी एक्सपोर्ट ऑर्डर और प्रोफेशनल दस्तावेजों का सहारा लेकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर रहे हैं। इसलिए किसी भी विदेशी व्यापार प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी जांच करना और बिना सत्यापन किसी भी प्रकार की फीस जमा न करना ही सबसे बड़ा बचाव है।
