असम बाढ़ के नाम पर Instagram पर ठगी, मदद से पहले सच जरूर जांचें।नकली NGO और फर्जी UPI से चल रही राहत फंड की बड़ी ठगी।
असम बाढ़ के नाम पर Instagram पर ठगी! राहत भेज रहे हैं या ठगों की जेब भर रहे हैं?
असम में आई भीषण बाढ़ ने लाखों लोगों का जीवन प्रभावित किया है। सोशल मीडिया पर हर तरफ मदद की अपीलें दिखाई दे रही हैं। लेकिन इसी मानवीय संकट का फायदा साइबर ठग भी उठा रहे हैं। एक जांच में सामने आया है कि बाढ़ पीड़ितों के नाम पर पैसे मांगने वाले बड़ी संख्या में Instagram अकाउंट संदिग्ध हैं। ऐसे में लोगों को भावनाओं में बहकर दान करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करनी चाहिए।
क्या सामने आया?
India Today की OSINT (Open Source Intelligence) टीम ने असम बाढ़ राहत के नाम पर दान मांगने वाले 40 Instagram अकाउंट की जांच की।
जांच में पाया गया कि:
- 40 में से 35 अकाउंट बेहद संदिग्ध या फर्जी गतिविधियों वाले लगे।
- लगभग 90% अकाउंट विश्वसनीयता की सामान्य जांच में असफल रहे।
- अधिकांश अकाउंट जुलाई 2026 में ही बनाए गए थे।
- कई अकाउंट पर केवल 20-30 फॉलोअर्स थे लेकिन वीडियो पर सैकड़ों व्यूज दिखाई दे रहे थे।
- अधिकांश अकाउंट दान के लिए किसी ट्रस्ट या NGO के बैंक खाते की बजाय व्यक्तिगत UPI ID का इस्तेमाल कर रहे थे।
- कई प्रोफाइल पर फोन नंबर नहीं था या दिया गया नंबर काम नहीं कर रहा था।
ठगी पकड़ने के लिए किन बातों की जांच की गई?
OSINT टीम ने तीन मुख्य आधारों पर जांच की।
1. अकाउंट कब बनाया गया?
अगर अकाउंट बिल्कुल नया है और उसका कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं है तो जोखिम बढ़ जाता है।
2. संस्था असली है या नहीं?
क्या प्रोफाइल में लिखी संस्था सरकार में पंजीकृत है?
क्या उसका कोई आधिकारिक वेबसाइट, कार्यालय या पुराना रिकॉर्ड मौजूद है?
3. पैसा किसके खाते में जा रहा है?
क्या पैसा किसी मान्यता प्राप्त संस्था के खाते में जा रहा है या किसी व्यक्ति के निजी UPI पर?
इन तीनों जांच में असफल होने वाले अकाउंट को अत्यधिक संदिग्ध माना गया।
पुराने वीडियो को नया बताकर लोगों को बनाया जा रहा निशाना
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ Instagram पेजों ने राहत कार्य दिखाने के लिए पुराने वीडियो इस्तेमाल किए।
एक वीडियो को असम बाढ़ राहत का बताया गया, लेकिन Reverse Video Search में पता चला कि वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक अलग खाद्य वितरण कार्यक्रम का था।
कुछ अन्य अकाउंट ने असम के असली लोगों द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो दोबारा अपलोड कर दिए और ऐसा दिखाया जैसे राहत कार्य वही कर रहे हों।
स्थानीय लोगों ने भी लगाए सवाल
असम के कुछ सोशल मीडिया क्रिएटर्स ने आरोप लगाया कि कुछ लोग जनता से पैसा इकट्ठा करते हैं लेकिन राहत सामग्री जिला प्रशासन से मुफ्त में लेकर उसे अपनी खरीदी हुई सामग्री बताकर प्रचार करते हैं।
हालांकि ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सभी मामलों में नहीं हुई है, इसलिए इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
असम में हालात कितने गंभीर हैं?
इस वर्ष असम में बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है।
रिपोर्टों के अनुसार:
- 6.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए।
- कई जिलों में गांवों का संपर्क टूट गया।
- मृतकों की संख्या 60 से अधिक पहुंच चुकी थी।
- सरकार और विभिन्न एजेंसियां राहत सामग्री पहुंचाने में लगी हैं।
मुख्यमंत्री ने सरकारी राहत अभियान के तहत करोड़ों रुपये की राहत सामग्री भी रवाना की है।
साइबर अपराधी आपदाओं का फायदा क्यों उठाते हैं?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लोग भावनात्मक रूप से तुरंत मदद करना चाहते हैं।
ठग इसी भावना का फायदा उठाते हैं।
वे
- नकली NGO बनाते हैं,
- फर्जी QR Code शेयर करते हैं,
- व्यक्तिगत UPI पर पैसा मंगाते हैं,
- पुरानी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करते हैं,
- और कुछ दिनों बाद अकाउंट गायब कर देते हैं।
ऐसी घटनाएं केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में भूकंप, बाढ़, युद्ध और महामारी जैसी आपदाओं के दौरान भी देखी गई हैं।
सुरक्षित तरीके से दान कैसे करें?
विशेषज्ञों के अनुसार दान करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें।
✅ केवल सरकारी या विश्वसनीय संस्थाओं को दान करें।
✅ संस्था का PAN, Registration Number और आधिकारिक वेबसाइट देखें।
✅ व्यक्तिगत UPI ID पर बड़ी रकम भेजने से बचें।
✅ Reverse Image Search या Google Search से संस्था की जांच करें।
✅ सोशल मीडिया फॉलोअर्स देखकर भरोसा न करें।
✅ यदि कोई अकाउंट बहुत नया हो तो अतिरिक्त सावधानी बरतें।
सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म क्या कर सकते हैं?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में ऐसी ठगी रोकने के लिए:
- राहत अभियान चलाने वाले अकाउंट का सत्यापन (Verification) किया जाए।
- संदिग्ध QR Code और UPI लिंक की निगरानी बढ़े।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फर्जी फंडरेज़िंग अकाउंट तेजी से हटाएं।
- लोगों को डिजिटल दान से पहले सत्यापन की जानकारी दी जाए।
- साइबर पुलिस और CERT-In जैसी एजेंसियां शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करें।
निष्कर्ष
असम बाढ़ जैसी त्रासदी में मदद करना मानवता का सबसे बड़ा धर्म है, लेकिन बिना जांच-पड़ताल के ऑनलाइन दान करना आपकी मेहनत की कमाई ठगों तक पहुंचा सकता है। यदि आप किसी राहत अभियान में आर्थिक सहयोग करना चाहते हैं, तो केवल सत्यापित सरकारी एजेंसियों, पंजीकृत NGOs या विश्वसनीय संस्थाओं के माध्यम से ही दान करें। एक छोटी-सी जांच न केवल आपके पैसे की सुरक्षा करेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि आपकी मदद वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे।
