फर्जी मेजर बनकर युवाओं के सपनों से लाखों की ठगी, CID का बड़ा खुलासा!
असम राइफल्स में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का भंडाफोड़, फर्जी ‘मेजर’ बनकर युवाओं से ऐंठे लाखों रुपये….
असम में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को निशाना बनाने वाले एक बड़े फर्जी भर्ती गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। असम पुलिस की अपराध जांच शाखा (CID) ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसने खुद को असम राइफल्स का मेजर बताकर कई युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूले। शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका है कि इस मामले में कई और पीड़ित हो सकते हैं और यह अकेले व्यक्ति का नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा भी हो सकता है।
कैसे रचा गया पूरा खेल?
CID के अनुसार आरोपी की पहचान अनुवार हुसैन के रूप में हुई है। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि वे पिछले वर्ष असम राइफल्स की भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे लेकिन चयन नहीं हो पाया। इसी दौरान आरोपी ने उनसे संपर्क किया और खुद को असम राइफल्स का अधिकारी (मेजर) बताते हुए दावा किया कि वह “विशेष या दया नियुक्ति (Compassionate Appointment)” के जरिए नौकरी दिला सकता है।
आरोप है कि उसने उम्मीदवारों से अलग-अलग किस्तों में बड़ी रकम ली और उन्हें भरोसा दिलाया कि नियुक्ति पत्र जल्द जारी हो जाएगा। जब लंबे समय तक नौकरी नहीं मिली और आरोपी टालमटोल करने लगा, तब पीड़ितों को ठगी का शक हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। FIR 14 जुलाई को कई शिकायतकर्ताओं की ओर से दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद CID ने जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
जांच में क्या-क्या सामने आ रहा है?
CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि—
- आरोपी ने कुल कितने लोगों से पैसे वसूले।
- ठगी की रकम कितनी है।
- क्या उसके साथ अन्य लोग भी इस गिरोह में शामिल थे।
- क्या फर्जी नियुक्ति पत्र, पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज भी तैयार किए गए थे।
- बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन के जरिए पैसे कहां भेजे गए।
जांच एजेंसियों का मानना है कि बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का लालच देकर ठगने वाले ऐसे गिरोह अक्सर सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और निजी संपर्कों का इस्तेमाल करते हैं।
देशभर में बढ़ रहे हैं फर्जी भर्ती घोटाले
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में सेना, अर्धसैनिक बलों, रेलवे, पुलिस, बैंक, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सरकारी नौकरियों के नाम पर ठगी के मामलों में वृद्धि देखी गई है। साइबर अपराधी नकली वेबसाइट, फर्जी नियुक्ति पत्र, जाली पहचान पत्र और अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग कर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते हैं।
सरकारी भर्ती एजेंसियां बार-बार स्पष्ट करती हैं कि किसी भी सरकारी नौकरी के लिए चयन केवल आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से होता है। किसी अधिकारी, एजेंट या बिचौलिए को पैसे देकर नौकरी नहीं मिल सकती।
युवाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
- केवल संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भर्ती की जानकारी देखें।
- नौकरी दिलाने के बदले पैसे मांगने वाले किसी व्यक्ति पर भरोसा न करें।
- किसी निजी खाते में भर्ती शुल्क या “सिफारिश शुल्क” जमा न करें।
- नियुक्ति पत्र, कॉल लेटर और ईमेल की आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।
- किसी भी संदिग्ध भर्ती संदेश या कॉल की तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
- भर्ती से जुड़े सभी दस्तावेज और भुगतान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
इस मामले से क्या सीख मिलती है?
यह मामला दिखाता है कि सरकारी नौकरी पाने की जल्दबाजी और बेरोजगारी का फायदा उठाकर ठग युवाओं को अपना शिकार बना रहे हैं। इसलिए किसी भी व्यक्ति के बड़े-बड़े दावों, प्रभावशाली पहचान या “गारंटीड नौकरी” के वादों पर विश्वास करने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल करना जरूरी है। यदि कोई भर्ती प्रक्रिया आधिकारिक वेबसाइट, लिखित परीक्षा और निर्धारित नियमों के बजाय पैसे के बदले नौकरी का वादा करे, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानें और संबंधित एजेंसियों को सूचना दें।
