सरकारी नौकरी के नाम पर बड़ा खेल, बेरोजगार युवाओं को ऐसे बनाया गया शिकार।
फर्जी आयुर्वेद नौकरी रैकेट का पर्दाफाश: 9 गिरफ्तार, 14 युवाओं को कराया गया मुक्त…
उत्तर प्रदेश में पुलिस ने एक बड़े फर्जी नौकरी रैकेट का खुलासा करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह पर आरोप है कि यह बेरोजगार युवाओं को आयुर्वेद विभाग, आयुष संस्थानों और हेल्थ सेक्टर में सरकारी या अच्छी निजी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान 14 युवाओं को भी सुरक्षित बाहर निकाला, जिन्हें कथित तौर पर नौकरी दिलाने के नाम पर रोका गया था। मामले की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं।
कैसे काम करता था यह गिरोह?
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और ऑनलाइन जॉब पोर्टलों के जरिए युवाओं से संपर्क करते थे। वे खुद को आयुर्वेद अस्पताल, आयुष विभाग या मेडिकल भर्ती एजेंसियों का प्रतिनिधि बताते थे। उम्मीदवारों को आकर्षक वेतन, जल्दी नियुक्ति और बिना कठिन परीक्षा के नौकरी का लालच दिया जाता था।
इसके बाद युवाओं से रजिस्ट्रेशन फीस, ट्रेनिंग शुल्क, मेडिकल टेस्ट, सिक्योरिटी डिपॉजिट और दस्तावेज़ सत्यापन जैसे अलग-अलग बहानों से पैसे मांगे जाते थे। कई मामलों में फर्जी नियुक्ति पत्र और नकली पहचान पत्र भी तैयार किए जाते थे ताकि पीड़ितों को भरोसा हो जाए।
14 युवाओं को क्यों कराया गया मुक्त?
पुलिस के अनुसार, जिन 14 युवाओं को मुक्त कराया गया, उन्हें नौकरी मिलने की उम्मीद में एक स्थान पर रखा गया था। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि उनसे लगातार पैसे मांगे जा रहे थे और उन्हें यह कहकर रोका जा रहा था कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने वाली है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं इन युवाओं का इस्तेमाल आगे और लोगों को फंसाने के लिए तो नहीं किया जा रहा था।
पुलिस की जांच में क्या मिला?
प्रारंभिक जांच में पुलिस को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं, जिनमें शामिल हैं—
- फर्जी नियुक्ति पत्र
- नकली पहचान पत्र
- मोबाइल फोन और लैपटॉप
- संभावित उम्मीदवारों की सूची
- बैंक खातों और ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड
- डिजिटल चैट और कॉल रिकॉर्ड
इन सबकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
यह सिर्फ एक राज्य की समस्या नहीं
पिछले कुछ महीनों में देश के कई राज्यों में फर्जी नौकरी रैकेट का खुलासा हुआ है। ऐसे गिरोह बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं को सरकारी नौकरी, मेडिकल सेक्टर, रेलवे, बैंक, एयरपोर्ट, सेना और निजी कंपनियों में भर्ती का झांसा देकर ठगते हैं। हाल ही में वाराणसी में भी एक बड़े फर्जी जॉब रैकेट का भंडाफोड़ हुआ था, जहां सैकड़ों युवाओं को नौकरी के नाम पर फंसाया गया था।
ऐसे रैकेट क्यों बढ़ रहे हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके प्रमुख कारण हैं—
- सरकारी नौकरी की भारी मांग
- सोशल मीडिया पर फर्जी भर्ती विज्ञापनों की भरमार
- बेरोजगार युवाओं की जल्द नौकरी पाने की इच्छा
- नकली वेबसाइट और फर्जी ईमेल का बढ़ता इस्तेमाल
- डिजिटल भुगतान के जरिए आसानी से पैसा वसूलना
नौकरी तलाशने वाले क्या सावधानी रखें?
- किसी भी नौकरी के लिए पहले संस्था की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी जरूर जांचें।
- नियुक्ति से पहले यदि रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी या जॉइनिंग फीस मांगी जाए तो सतर्क रहें।
- केवल आधिकारिक ईमेल और वेबसाइट पर भरोसा करें।
- फर्जी नियुक्ति पत्र या संदिग्ध कॉल मिलने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
- किसी भी दस्तावेज़ या बैंक जानकारी को अनजान लोगों के साथ साझा न करें।
जांच अभी जारी
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने युवाओं से पैसे वसूले, कितने राज्यों में इसका नेटवर्क फैला था और क्या इसमें अन्य लोग या एजेंसियां भी शामिल थीं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
