फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, विदेशी नागरिकों को बनाते थे साइबर ठगी का शिकार।
लखनऊ में फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों की साइबर ठगी….
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर चलाकर मुख्य रूप से अमेरिका (US) के नागरिकों को निशाना बना रहा था। पुलिस ने इस कार्रवाई में मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नकदी तथा अन्य डिजिटल सबूत बरामद किए हैं।
कैसे करते थे ठगी?
जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को अमेरिका की सरकारी एजेंसियों, जैसे Federal Trade Commission (FTC) या अदालत से जुड़े अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे।
पीड़ितों से कहा जाता था कि—
- उनके नाम पर कोई वित्तीय अपराध हुआ है।
- उनकी पहचान (Identity) चोरी हो गई है।
- उनके बैंक खाते का गलत इस्तेमाल हो रहा है।
- यदि उन्होंने तुरंत सहयोग नहीं किया तो उन्हें जेल या भारी जुर्माना भुगतना पड़ेगा।
डर और घबराहट पैदा करके उनसे पैसे वसूलने की कोशिश की जाती थी। कई मामलों में पीड़ितों को नकली सरकारी दस्तावेज और फर्जी नोटिस भी भेजे जाते थे।
गिरोह की कार्यप्रणाली
पुलिस के अनुसार यह गिरोह पूरी तरह संगठित तरीके से काम कर रहा था।
इनके पास—
- हाई-स्पीड इंटरनेट
- लैपटॉप
- कॉलिंग सॉफ्टवेयर
- VoIP (Voice over Internet Protocol) तकनीक
- फर्जी वेबसाइटें
- विदेशी नंबरों से कॉल करने की सुविधा
उपलब्ध थी।
कई मामलों में आरोपी पीड़ितों के कंप्यूटर में रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करवाकर उनकी स्क्रीन और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते थे। इसके बाद उनसे गिफ्ट कार्ड, नकद या अन्य माध्यमों से भुगतान कराया जाता था।
पुलिस को क्या मिला?
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बरामद किए—
- 31 लैपटॉप
- लगभग ₹18.50 लाख नकद
- 35 कॉलिंग एजेंट
- कई मोबाइल फोन
- अन्य डिजिटल उपकरण
अब पुलिस इन सभी उपकरणों की फोरेंसिक जांच करा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह के तार किन-किन राज्यों और देशों से जुड़े हुए हैं।
रिश्तेदार मिलकर चला रहे थे सिंडिकेट
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के कई सदस्य आपस में रिश्तेदार हैं। इससे पुलिस को शक है कि यह कोई छोटा गैंग नहीं बल्कि लंबे समय से सक्रिय एक संगठित साइबर सिंडिकेट है, जो विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका हो सकता है।
लखनऊ बन रहा था अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का अड्डा
हाल के सप्ताहों में लखनऊ पुलिस ने ऐसे कई फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटरों पर कार्रवाई की है।
- कुछ दिन पहले ही पुलिस ने एक अन्य कॉल सेंटर से बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया था।
- एक अन्य मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन पर अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप है।
- पुलिस का कहना है कि कई गिरोह विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर भारत से साइबर अपराध संचालित कर रहे हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी ठगी Social Engineering पर आधारित होती है। अपराधी तकनीकी हैकिंग से ज्यादा लोगों के मन में डर पैदा करके उनसे स्वयं पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
इसी कारण अमेरिका, कनाडा और यूरोप में ऐसे “टेक सपोर्ट” और “सरकारी एजेंसी” वाले कॉल स्कैम वर्षों से बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
आप कैसे बच सकते हैं?
- किसी भी अनजान कॉल पर खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले व्यक्ति की बात पर तुरंत भरोसा न करें।
- कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर जुर्माना या गिफ्ट कार्ड से भुगतान नहीं मांगती।
- किसी अनजान व्यक्ति को अपने कंप्यूटर का Remote Access न दें।
- OTP, बैंक विवरण या कार्ड की जानकारी कभी साझा न करें।
- संदिग्ध कॉल मिलने पर संबंधित एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से सत्यापन करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
निष्कर्ष
लखनऊ में पकड़ा गया यह फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर दिखाता है कि साइबर अपराध अब स्थानीय नहीं बल्कि वैश्विक नेटवर्क का रूप ले चुका है। आधुनिक तकनीक, नकली पहचान और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था। पुलिस की कार्रवाई से इस नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है, लेकिन जांच अभी जारी है और इससे जुड़े अन्य लोगों तथा संभावित अंतरराष्ट्रीय कड़ियों का पता लगाया जा रहा है।
