कनाडा में भारतीय महिला गिरफ्तार! किराये के नाम पर लाखों की ठगी!!
कनाडा में भारतीय मूल की महिला गिरफ्तार: किराये के घर के नाम पर लाखों की ठगी, 17 लोग बने शिकार
कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों से जुड़ा एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। ब्रैम्पटन (Brampton), ओंटारियो में रहने वाली 27 वर्षीय भारतीय मूल की महिला सव्रीत कौर (Savreet Kaur) को कथित तौर पर किराये के मकानों के नाम पर लोगों से ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कनाडा की Peel Regional Police का आरोप है कि महिला ने सोशल मीडिया पर फर्जी किराये के विज्ञापन डालकर लोगों से हजारों डॉलर एडवांस में वसूल लिए, लेकिन बाद में उन्हें मकान नहीं दिया।
पुलिस के अनुसार अब तक इस मामले में 17 पीड़ितों की पहचान हो चुकी है और कुल ठगी की रकम 60,000 कनाडाई डॉलर (लगभग 38 लाख रुपये) से अधिक बताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पीड़ितों की संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि जांच जारी है।
कैसे दिया गया ठगी को अंजाम?
जांच में सामने आया कि यह कथित ठगी मई 2025 से फरवरी 2026 के बीच की गई।
आरोप है कि महिला ने Facebook Marketplace, सोशल मीडिया ग्रुप्स और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आकर्षक किराये के घरों और बेसमेंट अपार्टमेंट के विज्ञापन पोस्ट किए। विज्ञापन में कम किराया, अच्छी लोकेशन और तुरंत घर मिलने का दावा किया जाता था।
जब कोई व्यक्ति संपर्क करता, तो उसे घर देखने, किराया तय करने और जल्दी बुकिंग करने का दबाव बनाया जाता। इसके बाद उससे पहले महीने का किराया, आखिरी महीने का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट ऑनलाइन जमा करा लिया जाता।
लेकिन जैसे ही किरायेदार तय तारीख पर सामान लेकर पहुंचते, उन्हें पता चलता कि:
- मकान पहले से किसी और को किराये पर दिया जा चुका है।
- कई मामलों में मकान मालिक उस महिला को जानता तक नहीं था।
- कुछ विज्ञापन पूरी तरह फर्जी थे।
- जमा किया गया पैसा वापस नहीं मिला।
यानी लोगों ने अपना पुराना घर छोड़ दिया, नया घर मिला नहीं और हजारों डॉलर भी गंवा बैठे।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
Peel Regional Police ने कई महीनों तक शिकायतों की जांच करने के बाद 13 जुलाई को आरोपी महिला को गिरफ्तार किया।
उस पर लगाए गए प्रमुख आरोप:
- Fraud Over $5,000 के 38 आरोप
- Obstruct Police (पुलिस जांच में बाधा डालने) का 1 आरोप
मामले की सुनवाई कनाडा की अदालत में जारी है। फिलहाल आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं और अंतिम फैसला अदालत द्वारा ही किया जाएगा।
क्यों बढ़ रहे हैं Rental Scam?
कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पिछले कुछ वर्षों में Rental Fraud तेजी से बढ़ा है।
इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
- घरों की कमी (Housing Shortage)
- बढ़ते किराये
- सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन वाले विज्ञापन
- जल्दी घर लेने की मजबूरी
- ऑनलाइन एडवांस भुगतान
ठग लोगों की इसी जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं।
इस मामले से क्या सीख मिलती है?
आज ऑनलाइन ठगी सिर्फ बैंक खाते या UPI तक सीमित नहीं है। अब ठग:
- किराये का घर
- नौकरी
- वीजा
- निवेश
- सेकेंड हैंड सामान
- ऑनलाइन टिकट
जैसी सेवाओं के नाम पर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं।
एक फर्जी विज्ञापन, नकली रेंट एग्रीमेंट और थोड़ी-सी बातचीत के जरिए हजारों डॉलर की ठगी की जा रही है।
किराये पर घर लेते समय ये गलतियां बिल्कुल न करें
- ✅ मकान देखे बिना एडवांस न दें।
- ✅ केवल सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करें।
- ✅ मकान मालिक की पहचान और स्वामित्व की पुष्टि करें।
- ✅ Rental Agreement की वैधता जांचें।
- ✅ केवल Verified Property Website या Licensed Realtor का उपयोग करें।
- ✅ बैंक ट्रांसफर का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- ✅ यदि किराया बाजार से बहुत कम लगे, तो अतिरिक्त सावधानी बरतें।
- ✅ कोई जल्दी भुगतान का दबाव बनाए तो सतर्क हो जाएं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
साइबर और वित्तीय अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, Rental Scam एक Social Engineering Fraud है। इसमें ठग पहले विश्वास जीतते हैं, फिर जल्द भुगतान कराने का दबाव बनाते हैं। जैसे ही पैसा ट्रांसफर होता है, वे संपर्क तोड़ देते हैं।
इस तरह की ठगी में अपराधी अक्सर नकली पहचान, फर्जी ईमेल, एडिट किए गए दस्तावेज़ और सोशल मीडिया प्रोफाइल का इस्तेमाल करते हैं।
मुख्य बातें
- भारतीय मूल की 27 वर्षीय महिला कनाडा में गिरफ्तार।
- सोशल मीडिया पर फर्जी किराये के मकानों के विज्ञापन डालने का आरोप।
- 17 लोगों से 60,000 कनाडाई डॉलर (करीब ₹38 लाख) से अधिक की कथित ठगी।
- 38 धोखाधड़ी और 1 पुलिस जांच में बाधा डालने का आरोप।
- पुलिस को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है।
- मामले की जांच जारी है और अदालत में कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
निष्कर्ष
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि ऑनलाइन दिखने वाला हर आकर्षक ऑफर भरोसेमंद नहीं होता। चाहे भारत हो या विदेश, किराये का घर लेने से पहले उसकी पूरी जांच करना, मालिक की पहचान सत्यापित करना और बिना पुष्टि के एडवांस भुगतान न करना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। थोड़ी-सी सावधानी आपको लाखों रुपये के नुकसान और मानसिक परेशानी से बचा सकती है।
