Deepfake का नया खेल, कंपनी को लगा करोड़ों का झटका!
AI Deepfake ने कंपनी से उड़ाए ₹11 करोड़! एक नकली आवाज़ और करोड़ों की ठगी ने बढ़ाई कॉर्पोरेट जगत की चिंता….
मुंबई: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डीपफेक (Deepfake) तकनीक अब केवल सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो बनाने तक सीमित नहीं रही। अब इसका इस्तेमाल कंपनियों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने में भी होने लगा है। इसी तरह के एक बड़े मामले में ज्वेलरी निर्माता Sky Gold & Diamonds की सहायक कंपनी Starmangalsutra Private Limited (SPL) को लगभग ₹10.70 करोड़ (करीब ₹11 करोड़) का नुकसान हुआ है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगों ने कंपनी के एक कर्मचारी के आधिकारिक मोबाइल और लैपटॉप तक अनधिकृत पहुंच बना ली और फिर कंपनी के निदेशक (Director) की पहचान का फर्जी इस्तेमाल कर बड़ी रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा दी।
आखिर यह ठगी कैसे हुई?
कंपनी के अनुसार साइबर अपराधियों ने पहले एक कर्मचारी के ऑफिस डिवाइस को निशाना बनाया। इसके बाद उन्होंने AI आधारित Deepfake Voice और प्रोफाइल क्लोनिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करके ऐसा माहौल बनाया कि कर्मचारी को लगा वह कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर काम कर रहा है।
विश्वास में लेने के बाद कर्मचारी से कई बैंक खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर करा दिए गए। जब तक कंपनी को वास्तविक स्थिति का पता चला, तब तक लगभग ₹10.70 करोड़ की राशि ट्रांसफर हो चुकी थी।
कंपनी ने क्या कार्रवाई की?
घटना का पता चलते ही कंपनी ने:
- साइबर क्राइम एजेंसियों को शिकायत दी।
- संबंधित बैंकों को फंड फ्रीज करने का अनुरोध किया।
- आंतरिक जांच शुरू की।
- डिजिटल सुरक्षा और एक्सेस कंट्रोल की समीक्षा प्रारंभ कर दी।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके मुख्य कारोबार पर फिलहाल कोई प्रत्यक्ष असर नहीं पड़ा है, लेकिन इस घटना ने कॉर्पोरेट साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शेयर बाजार पर भी पड़ा असर
इस घटना की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई। परिणामस्वरूप Sky Gold & Diamonds के शेयर में लगभग 3% तक गिरावट दर्ज की गई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि साइबर हमले केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित कर सकते हैं।
Deepfake क्या है?
Deepfake ऐसी AI तकनीक है जो किसी व्यक्ति की आवाज़, चेहरा या वीडियो को इतनी वास्तविकता से नकली बना सकती है कि सामान्य व्यक्ति उसके असली या नकली होने का अंतर नहीं समझ पाता।
आज अपराधी इसका उपयोग कर रहे हैं:
- CEO या Director की नकली आवाज़ बनाकर
- वीडियो कॉल में फर्जी अधिकारी दिखाकर
- फर्जी निर्देश देकर
- कर्मचारियों से बैंक ट्रांसफर करवाने में
- यह पहला मामला नहीं
दुनिया भर में Deepfake आधारित साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं।
- 2024 में हांगकांग की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के कर्मचारी ने AI आधारित नकली वीडियो कॉन्फ्रेंस पर भरोसा कर लगभग 25 मिलियन डॉलर ट्रांसफर कर दिए थे।
- भारत में भी Deepfake वीडियो और नकली निवेश विज्ञापनों के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब केवल OTP या पासवर्ड सुरक्षित रखना पर्याप्त नहीं है। कंपनियों को Zero Trust Security Model, Multi-Factor Authentication (MFA), Dual Approval System, AI आधारित Fraud Detection, तथा बड़े भुगतान से पहले वीडियो या व्यक्तिगत सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं अपनानी होंगी।
आम लोगों और कंपनियों के लिए सीख
- केवल फोन कॉल या व्हाट्सएप निर्देश पर पैसा ट्रांसफर न करें।
- यदि कोई वरिष्ठ अधिकारी अचानक बड़ी रकम भेजने को कहे, तो दूसरे माध्यम से पुष्टि अवश्य करें।
- AI से बनी आवाज़ और वीडियो पर आंख बंद करके भरोसा न करें।
- ऑफिस डिवाइस पर मजबूत पासवर्ड और Multi-Factor Authentication का उपयोग करें।
- बैंक खातों के लिए दो-स्तरीय अनुमोदन (Dual Authorization) लागू करें।
- कर्मचारियों को नियमित साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण दें।
निष्कर्ष
Sky Gold की सहायक कंपनी के साथ हुई यह लगभग ₹11 करोड़ की Deepfake ठगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि साइबर अपराध अब AI के सहारे कहीं अधिक खतरनाक रूप ले चुके हैं। पहले अपराधी केवल फर्जी ईमेल भेजते थे, लेकिन अब वे किसी की आवाज़, चेहरा और पहचान की हूबहू नकल करके भरोसा जीत रहे हैं। आने वाले समय में केवल तकनीक नहीं, बल्कि जागरूकता, मजबूत सुरक्षा प्रक्रियाएं और हर बड़े वित्तीय लेन-देन का स्वतंत्र सत्यापन ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय होगा।
