Online shopping करने वालों सावधान!! Fake Customer Care बनकर उड़ाए जा रहे हैं पैसे।!!
गाजियाबाद में घर से चल रहा था फर्जी Flipkart कॉल सेंटर, 5 राज्यों के ग्राहकों को बनाया शिकार….
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने एक ऐसे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जो खुद को Flipkart का कस्टमर केयर बताकर लोगों से ठगी कर रहा था। इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान और तेलंगाना के ग्राहकों को निशाना बना चुका है।
कैसे चलता था ठगी का खेल?
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने गाजियाबाद के शक्ति खंड इलाके में एक मकान को कॉल सेंटर में बदल रखा था। यहां से कर्मचारी Flipkart के कस्टमर सपोर्ट अधिकारी बनकर ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों को फोन करते थे।
वे ग्राहकों से कहते थे—
- आपका पेमेंट फेल हो गया है।
- ऑर्डर अभी पेंडिंग है।
- रिफंड जारी करना है।
- पेमेंट वेरिफिकेशन जरूरी है।
- ऑर्डर कन्फर्म करने के लिए दोबारा भुगतान करना होगा।
विश्वास दिलाने के बाद वे लोगों से दोबारा पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे या बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते थे।
पुलिस ने क्या बरामद किया?
छापेमारी के दौरान पुलिस ने
- 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- 10 मोबाइल फोन बरामद किए।
- ₹20,010 नकद जब्त किए।
- कई डिजिटल सबूत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कब्जे में लिए।
दो आरोपी—सिद्धार्थ और काजल—फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
ग्राहकों का डेटा कहां से आया?
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का कथित मास्टरमाइंड सिद्धार्थ बिहार से Flipkart ग्राहकों का डेटा उपलब्ध कराता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि यह डेटा किसी अवैध तरीके से हासिल किया गया था या किसी अन्य साइबर नेटवर्क के माध्यम से। जांच एजेंसियां डेटा लीक और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं।
पांच राज्यों तक फैला नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार
- उत्तर प्रदेश
- दिल्ली
- गुजरात
- राजस्थान
- तेलंगाना
में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस के अनुसार जब्त मोबाइल फोन के IMEI नंबर कई पुराने साइबर शिकायतों से मेल खाते हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय हो सकता है।
शुरुआती नुकसान कितना?
अब तक की जांच में लगभग ₹2.5 लाख की ठगी की पुष्टि हुई है। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच आगे बढ़ेगी, पीड़ितों की संख्या और ठगी की रकम दोनों बढ़ सकती हैं।
पुलिस किन पहलुओं की जांच कर रही है?
जांच एजेंसियां अब इन बिंदुओं पर काम कर रही हैं—
- ठगी की रकम किन बैंक खातों में भेजी गई।
- ग्राहक डेटा कहां से लीक हुआ।
- क्या इस नेटवर्क में अन्य राज्यों के सदस्य भी शामिल हैं।
- जब्त मोबाइल और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच।
- म्यूल बैंक खातों (Mule Accounts) और धन शोधन (Money Trail) की पड़ताल।
यह ठगी क्यों खतरनाक है?
विशेषज्ञों के अनुसार आजकल साइबर अपराधी केवल OTP नहीं मांगते, बल्कि वे ग्राहकों को भरोसे में लेकर “पेमेंट फेल”, “रिफंड”, “KYC अपडेट”, “ऑर्डर वेरिफिकेशन” और “डिलीवरी समस्या” जैसे बहाने बनाते हैं। कई मामलों में उनके पास ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और ऑर्डर से जुड़ी जानकारी भी होती है, जिससे कॉल असली लगती है। इसी कारण लोग आसानी से उनके झांसे में आ जाते हैं।
ऑनलाइन खरीदारी करने वाले क्या सावधानी रखें?
- किसी भी ई-कॉमर्स कंपनी का कर्मचारी कभी फोन पर OTP, UPI PIN या CVV नहीं मांगता।
- केवल आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से ही भुगतान करें।
- किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें।
- कॉल करने वाले की पहचान स्वतंत्र रूप से कंपनी के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर से सत्यापित करें।
- किसी भी संदिग्ध कॉल या भुगतान अनुरोध की तुरंत रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर करें।
निष्कर्ष
यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब फर्जी कॉल सेंटर बनाकर बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं। थोड़ी-सी लापरवाही आपकी मेहनत की कमाई को मिनटों में गायब कर सकती है। इसलिए ऑनलाइन खरीदारी करते समय केवल आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें और किसी भी फोन कॉल पर बिना पुष्टि किए भुगतान या निजी बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
