एक गलती और आपका बैंक अकाउंट बन सकता है साइबर ठगों का हथियार।
मुंबई में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क बेनकाब: 6 गिरफ्तार, 142 बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, सैकड़ों ATM कार्ड और SIM बरामद
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि यह गिरोह साइबर अपराधियों को ऐसे बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध ऑनलाइन गेमिंग से आने वाले पैसों को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।
कैसे काम करता था पूरा गिरोह?
पुलिस के अनुसार आरोपी पहले अलग-अलग लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद उन खातों की ATM कार्ड, चेकबुक, पासबुक और मोबाइल SIM अपने कब्जे में लेकर उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाते थे। इन खातों को आम भाषा में “म्यूल अकाउंट (Mule Account)” कहा जाता है।
साइबर ठग इन खातों में पीड़ितों से ठगी गई रकम मंगवाते थे। इसके बाद पैसे को कई खातों में तेजी से ट्रांसफर कर दिया जाता था ताकि पुलिस के लिए असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई, जिनमें शामिल हैं—
- 142 बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज
- 122 चेकबुक
- 15 पासबुक
- बड़ी संख्या में ATM कार्ड
- कई SIM कार्ड
- कंप्यूटर सिस्टम
- 68 कंपनियों की मुहरें और दस्तावेज
पुलिस को शक है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी बैंक खाते खोलने और वित्तीय लेन-देन को वैध दिखाने के लिए किया जाता था।
ऑनलाइन गेमिंग और साइबर फ्रॉड से भी जुड़ा था नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था। इन खातों का उपयोग ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल फ्रॉड और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में भी किया जा रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क के तार देश के किन-किन राज्यों और विदेशों तक जुड़े हैं।
क्यों खतरनाक हैं ‘म्यूल अकाउंट’?
साइबर अपराधों में आज सबसे बड़ी चुनौती म्यूल अकाउंट हैं। अपराधी खुद कभी अपने बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं करते। वे लालच देकर, नौकरी का झांसा देकर या कमीशन का वादा करके दूसरों के बैंक खाते किराए पर ले लेते हैं।
कई बार खाताधारक को यह भी पता नहीं होता कि उसके खाते से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का पैसा गुजर रहा है। लेकिन कानून की नजर में ऐसे खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
पूरे देश में बढ़ रहा है ऐसा नेटवर्क
हाल के महीनों में बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में पुलिस ने ऐसे कई गिरोह पकड़े हैं, जहां बड़ी संख्या में ATM कार्ड, SIM कार्ड, चेकबुक और बैंक दस्तावेज बरामद हुए। इससे स्पष्ट है कि साइबर ठगी अब संगठित अपराध का रूप ले चुकी है और अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क के जरिए संचालित हो रही है।
आम लोग कैसे बचें?
- किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता किराए पर न दें।
- ATM कार्ड, चेकबुक या SIM किसी और के हवाले न करें।
- नौकरी या कमीशन के नाम पर बैंक खाता खुलवाने वाले लोगों से सावधान रहें।
- यदि आपके खाते में किसी अज्ञात व्यक्ति का पैसा आए तो तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दें।
- किसी भी साइबर ठगी की शिकायत तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर करें।
निष्कर्ष
मुंबई पुलिस की यह कार्रवाई दिखाती है कि साइबर अपराध केवल मोबाइल या इंटरनेट तक सीमित नहीं रह गया है। इसके पीछे बैंक खाते, फर्जी कंपनियां, SIM कार्ड और संगठित वित्तीय नेटवर्क काम करते हैं। ऐसे मामलों में केवल ठग ही नहीं, बल्कि अपना बैंक खाता या दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले लोग भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकते हैं। इसलिए थोड़े से लालच में अपने बैंक खाते या पहचान संबंधी दस्तावेज किसी के साथ साझा करना भारी पड़ सकता है।
