PM और वित्त मंत्री का डीपफेक दिखाकर पूर्व सैनिक से करोड़ों की ठगी, साइबर ठगों का नया जाल
डीपफेक वीडियो दिखाकर 80 साल के पूर्व सैनिक से ₹1 करोड़ की ठगी
पुणे में साइबर ठगी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां 80 वर्षीय रिटायर्ड आर्मी अधिकारी को कथित तौर पर ऑनलाइन निवेश के नाम पर करीब ₹1 करोड़ का चूना लगाया गया। ठगों ने भरोसा जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल किया। मामले में पुणे के कोंढवा इलाके में रहने वाले पूर्व सैन्य अधिकारी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
कैसे शुरू हुआ पूरा खेल?
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित को सोशल मीडिया के जरिए एक ऐसा वीडियो दिखाया गया जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे दिखने वाले वीडियो/ऑडियो के जरिए निवेश से जुड़े दावे किए जा रहे थे।
वीडियो को इस तरह तैयार किया गया था कि देखने वाले को यह वास्तविक सरकारी संदेश जैसा लगे। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपियों ने पीड़ित को ऑनलाइन निवेश और ज्यादा मुनाफे का लालच दिया।
इसके बाद बातचीत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आगे बढ़ी और पीड़ित को निवेश के लिए अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजने के लिए तैयार किया गया। आखिरकार रकम करीब ₹1 करोड़ तक पहुंच गई। मामले की जांच पुलिस कर रही है।
असली खतरा Deepfake नहीं, ‘विश्वास की चोरी’ है
इस मामले को केवल एक सामान्य ऑनलाइन फ्रॉड समझना गलती होगी। यहां अपराधियों ने तीन चीजों को एक साथ जोड़ा—
AI Deepfake + सरकारी चेहरे की विश्वसनीयता + Investment का लालच
यानी ठगों ने सिर्फ नकली वीडियो नहीं बनाया, बल्कि पीड़ित के मन में यह विश्वास पैदा करने की कोशिश की कि “अगर प्रधानमंत्री या वित्त मंत्री से जुड़ा वीडियो है, तो योजना सुरक्षित होगी।”
यही डीपफेक फ्रॉड का सबसे खतरनाक हिस्सा है।
CyberPeace की फैक्ट-चेक रिपोर्ट ने भी ऐसे वायरल वीडियो को फर्जी बताया है, जिनमें वित्त मंत्री को निवेश प्लेटफॉर्म का प्रचार करते हुए दिखाया गया। जांच में पाया गया कि वास्तविक वीडियो को AI-generated आवाज और बदले हुए कंटेंट के साथ इस्तेमाल किया गया था।
यह कोई अकेला मामला नहीं है
2026 में ही ऐसे कई मामलों में Nirmala Sitharaman Deepfake Scam का पैटर्न सामने आया है।
बेंगलुरु में एक 22 वर्षीय छात्र कथित तौर पर ऐसे ही डीपफेक निवेश वीडियो के जरिए लगभग ₹3.5 लाख गंवा बैठा। ठगों ने शुरुआत में छोटी रकम निकालने की अनुमति देकर भरोसा बनाया और बाद में बड़ी रकम निकालने पर अतिरिक्त “processing fee” मांगी।
एक अन्य बेंगलुरु मामले में रिटायर्ड प्रोफेसर से ₹65 लाख तक ट्रांसफर कराए गए। इस मामले में भी डीपफेक वीडियो, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, Telegram चैट और नकली मुनाफे का इस्तेमाल कथित तौर पर किया गया।
एक महिला से भी कथित तौर पर ₹33 लाख से ज्यादा की ठगी हुई, जहां ठगों ने डीपफेक वीडियो के साथ नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और फर्जी फीस/टैक्स की मांग का सहारा लिया।
ठगी का नया पैटर्न समझिए
इस तरह के मामलों में अक्सर एक ही तरह की रणनीति दिखाई देती है:
1. Deepfake Video
किसी प्रसिद्ध नेता, अधिकारी या सेलिब्रिटी का चेहरा और आवाज इस्तेमाल की जाती है।
2. Fake Investment Opportunity
वीडियो में बड़े मुनाफे या सुरक्षित निवेश का दावा किया जाता है।
3. Social Media से Contact
पीड़ित को WhatsApp, Telegram या किसी दूसरी डिजिटल सेवा पर ले जाया जाता है।
4. Fake Trading Dashboard
स्क्रीन पर निवेश बढ़ता हुआ दिखाई देता है, जिससे पीड़ित को लगता है कि पैसा वास्तव में मुनाफा कमा रहा है।
5. Small Withdrawal Trick
कभी-कभी शुरुआत में थोड़ी रकम वापस दी जाती है ताकि भरोसा मजबूत हो जाए।
6. Bigger Investment
इसके बाद पीड़ित से ज्यादा पैसे लगाने को कहा जाता है।
7. Withdrawal Trap
पैसा निकालने पर Tax, Processing Fee, GST, Security Deposit या अन्य शुल्क मांगे जाते हैं।
8. अंत में संपर्क बंद
जब पीड़ित पैसा देना बंद करता है या सवाल पूछता है, तो आरोपी गायब हो जाते हैं।
सबसे बड़ा सबक: वीडियो देखकर निवेश न करें
इस मामले से आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी बड़े नेता या सरकारी अधिकारी का वीडियो अब अपने-आप में प्रमाण नहीं है।
AI तकनीक ने चेहरे, आवाज और वीडियो को इस स्तर तक बदलना आसान बना दिया है कि सामान्य व्यक्ति के लिए असली और नकली में अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए किसी भी निवेश प्रस्ताव में यह चार सवाल जरूर पूछें:
किसने कहा? → कहां कहा? → आधिकारिक वेबसाइट पर प्रमाण है? → पैसा किस खाते में जा रहा है?
अगर जवाब अस्पष्ट है तो निवेश रोक देना बेहतर है।
⚠️ Fact Check
- डीपफेक वीडियो को सरकारी निवेश सलाह का प्रमाण न मानें।
- प्रधानमंत्री/मंत्री/अधिकारी के नाम से आया निवेश संदेश अपने-आप में वैध नहीं होता।
- Guaranteed/बहुत ज्यादा Return बड़ा Red Flag है।
- Telegram/WhatsApp पर मिले “Investment Expert” पर भरोसा न करें।
- पैसा भेजने से पहले संस्था और निवेश योजना को आधिकारिक स्रोत से verify करें।
- छोटी रकम वापस मिलना भी योजना के असली होने का प्रमाण नहीं है।
- बड़ी रकम फंसने के बाद “Tax/Processing Fee देकर पैसा निकालने” की मांग अक्सर दूसरे चरण की ठगी हो सकती है।
निष्कर्ष: पुणे का यह मामला दिखाता है कि आने वाले समय में साइबर ठग केवल फर्जी लिंक और OTP पर निर्भर नहीं रहेंगे। अब वे AI से भरोसा पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए डिजिटल सुरक्षा का अगला नियम साफ है—“चेहरा असली दिखे, फिर भी दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।”
